वाराणसी के दालमंडी में भवन ध्वस्तीकरण का मामला, बुलडोजर कार्रवाई पर हाई कोर्ट नाराज़
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा, 11 जून को आखिर किसने कराई कार्रवाई?

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 27, 2026 at 9:06 PM IST
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी इलाके में एक भवन के ध्वस्तीकरण को लेकर नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने मामले में दाखिल तीनों अधिकारियों के हलफनामों को देखने के बाद याची को उनका जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को दोपहर दो बजे होगी.
मामला जावेद आलम की अवमानना याचिका से जुड़ा है. याची ने आरोप लगाया था कि हाईकोर्ट के 7 मई 2026 के आदेश के बावजूद उसकी संपत्ति को 11 जून को जबरन ध्वस्त कर दिया गया. याची के अनुसार उसने एक जून को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दाखिल की थी, लेकिन उस पर निर्णय लिए बिना ही भवन गिरा दिया गया.
दरअसल, सात मई को हाईकोर्ट ने नगर निगम को नया निरीक्षण दल गठित करने का निर्देश दिया था. इसमें स्वतंत्र वास्तुकार, कार्यकारी अभियंता और राज्य सरकार के किसी अन्य विभाग के एक कार्यकारी अभियंता को शामिल किया जाना था. निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही धारा 331 के तहत नोटिस जारी करने और याची का जवाब लेने के बाद कानून के अनुसार निर्णय करने को कहा गया था. तब तक संबंधित भवन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया था.
नगर निगम की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि उसने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में समिति गठित की थी और निरीक्षण में भवन बेहद जर्जर एवं खतरनाक पाया गया. हालांकि निगम ने स्पष्ट किया कि 11 जून की ध्वस्तीकरण कार्रवाई उसने नहीं की, बल्कि किसी अन्य विभाग ने की.
दूसरी ओर, संबंधित अधिकारी ने हलफनामे में स्वीकार किया कि 11 जून को वह पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद था. उसके अनुसार ध्वस्तीकरण लोक निर्माण विभाग ने सड़क चौड़ीकरण के लिए किया था और उसकी मौजूदगी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थी. तीसरे अधिकारी ने दावा किया कि याची का हिस्सा पहले से जर्जर था और उसके अनुसार वह हिस्सा स्वयं ढह गया.
कोर्ट ने कहा कि तीनों हलफनामों में अधिकारियों ने ध्वस्तीकरण से इनकार किया है, लेकिन 11 जून को मौके पर अधिकारी की मौजूदगी और ध्वस्तीकरण की बात स्वयं उसके हलफनामे में सामने आ रही है. कोर्ट ने इसे विरोधाभासी और आश्चर्यजनक स्थिति माना तथा याची को तीनों हलफनामों पर जवाब देने का निर्देश दिया है.

