किच्छा का करोड़ों रुपयों की जमीन हड़पने और फर्जी वसीयत से नामांतरण का मामला, कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज
प्रार्थी मानवेन्द्र सिंह, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश की न्यायिक सेवाओं में विभिन्न पदों पर रहे, उच्चन्यायालय, लखनऊ खंडपीठ से वरिष्ठ निबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 7, 2026 at 3:50 PM IST
रुद्रपुर: उधम सिंह नगर के किच्छा में न्यायालय के आदेश पर एक चर्चित भूमि विवाद मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ से सेवानिवृत्त वरिष्ठ निबंधक रहे मानवेन्द्र सिंह की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने किच्छा पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच के निर्देश दिए. आरोप है कि उनके दिवंगत पिता की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को फर्जी और अपंजीकृत वसीयत के आधार पर नामांतरण कराकर हड़प लिया गया तथा बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग के भूमि अधिग्रहण का करोड़ों रुपये का मुआवजा भी प्राप्त कर लिया गया.
किच्छा जमीन हड़पने और फर्जी वसीयत मामले में मुकदमा दर्ज: किच्छा कोतवाली क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद में न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. प्रार्थी मानवेन्द्र सिंह, जो बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की न्यायिक सेवाओं में विभिन्न पदों पर कार्य करने के बाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ से वरिष्ठ निबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर गंभीर आरोप लगाए हैं.
रिटायर्ड वरिष्ठ निबंधक ने लगाया है आरोप: प्रार्थना पत्र के अनुसार, उनके पिता नरेन्द्र सिंह का 23 फरवरी 2005 को लंबी बीमारी के दौरान निधन हो गया था. उस समय प्रार्थी अपनी न्यायिक सेवाओं के कारण विभिन्न स्थानों पर तैनात थे, जिसके चलते पैतृक संपत्तियों की देखरेख उनके छोटे भाई के माध्यम से की जाती रही. सेवानिवृत्ति के बाद जब उन्होंने संपत्तियों का निरीक्षण किया, तो उन्हें पता चला कि किच्छा स्थित उनके पिता की बहुमूल्य कृषि एवं व्यावसायिक भूमि का बड़ा हिस्सा कथित रूप से फर्जी और अपंजीकृत वसीयत के आधार पर अन्य लोगों के नाम दर्ज करा दिया गया.
फर्जी तरीके से भूमि नामांतरण कराने का आरोप: प्रार्थी का आरोप है कि 23 नवंबर 2004 की जिस वसीयत के आधार पर नामांतरण किया गया, उस समय उनके पिता गंभीर रूप से बीमार थे और शाहजहांपुर में डायलिसिस सहित उपचाराधीन थे. ऐसे में उनके द्वारा वसीयत निष्पादित करना संभव नहीं था. आरोप है कि वसीयत पर उनके पिता के फर्जी हस्ताक्षर कर चकबंदी अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से भूमि का नामांतरण कराया गया.
फर्जीवाड़ा करके करोड़ों का मुआवजा भी हड़पने का आरोप: शिकायत में यह भी कहा गया है कि शासन द्वारा 23 अगस्त 2004 के बाद कृषि भूमि से संबंधित अपंजीकृत वसीयत को मान्यता न दिए जाने के बावजूद उक्त वसीयत का उपयोग कर भूमि हस्तांतरित कर दी गई. इतना ही नहीं, बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण के दौरान अधिग्रहित भूमि का करोड़ों रुपये का मुआवजा भी कथित रूप से संबंधित लोगों ने प्राप्त कर लिया.
प्रार्थना पत्र में कई व्यक्तियों तथा वर्ष 2005-06 के दौरान किच्छा चकबंदी कार्यालय में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों पर षड्यंत्र, कूटरचना और फर्जी दस्तावेज तैयार कर संपत्ति हड़पने के आरोप लगाए गए हैं. शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें और उनकी 95 वर्षीय माता को भारी आर्थिक और मानसिक क्षति हुई है.
मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले में वर्ष 2024 के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी, डीआईजी सहित कई उच्च अधिकारियों को शिकायतें भेजीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत न्यायालय की शरण ली.
कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज: न्यायालय द्वारा मामले का संज्ञान लेने के बाद किच्छा पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए गए, जिसके अनुपालन में कोतवाली किच्छा में संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है.
इस संबंध में किच्छा कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रवि सैनी ने बताया कि-
न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्राप्त तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी.
-रवि सैनी, प्रभारी निरीक्षक, किच्छा कोतवाली-
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक के अनुसार यह मामला अब जांच के चरण में है और पुलिस दस्तावेजों, वसीयत, चकबंदी अभिलेखों तथा भूमि नामांतरण की पूरी प्रक्रिया की गहन जांच कर रही है.
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