सहकारी परियोजना में गबन पर बड़ा एक्शन, नेकॉफ के खिलाफ मुकदमे दर्ज, ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा
नेकॉफ पर सरकारी धन के गबन का गंभीर आरोप लगा है. इसीलिए सहकारी विभाग की तरफ से नेकॉफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 7, 2026 at 5:46 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना में सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसके बाद सहकारिता विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. सहकारिता विभाग ने नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर्स प्रोक्योरमेंट, प्रोसेसिंग एंड रिटेलिंग कोऑपरेटिव ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेकॉफ) के खिलाफ सुसंगत धाराओं में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है. साथ ही संस्था को अखिल भारतीय स्तर पर ब्लैकलिस्ट करने और सरकारी धन की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.
राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना का उद्देश्य प्रदेश की सहकारी समितियों के जरिए किसानों की आय में वृद्धि करना और पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकना है. इसी क्रम में टिहरी गढ़वाल जिले की मौगी दीर्घाकार बहुउद्देशीय सहकारी समिति लिमिटेड की ओर से 70 एकड़ अनुपयोगी भूमि को लीज पर लेकर संयुक्त सहकारी खेती परियोजना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था.
परियोजना के सफल संचालन के लिए नेकॉफ को हैंडहोल्डिंग सपोर्ट एजेंसी के रूप में चयनित किया गया. परियोजना को स्वीकृति मिलने के बाद समिति को 1,28,43,860 रुपए की धनराशि उपलब्ध कराई गई, जिसमें से तमाम गतिविधियों के संचालन के लिए 71,90,319 रुपए की राशि नेकॉफ संस्था को ट्रांसफर की गई, लेकिन गंभीर आरोप है कि पांच साल बीत जाने के बाद भी संस्था ने न तो परियोजना पर कोई कार्य किया और न ही सरकारी धन वापस किया. इस लापरवाही के चलते समिति को परियोजना से कोई आय प्राप्त नहीं हुई, जबकि सरकारी धन पर ब्याज का भार लगातार बढ़ता गया.
परियोजना कार्यालय और समिति की ओर से कई बार काम पूरा करने या फिर धनराशि ब्याज सहित वापस करने के लिए पत्र भेजा गया, लेकिन संस्था की ओर से सिर्फ आश्वासन दिए जाते रहे, जिसके चलते परियोजना से जुड़े किसानों ने भी संस्था के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे है. इसके बाद जांच में यह भी सामने आया कि ई-एमसीपी (EMCP) योजना के तहत नेकॉफ की ओर से प्रदेश की 9 सहकारी संस्थाओं से प्राप्त सरकारी धन के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं और धोखाधड़ी की गई.
आरोप है कि हर समिति से 8,42,520 रुपए की धनराशि प्राप्त की गई, यानि कुल 75,82,680 रुपए की सरकारी धनराशि का मामला जांच के दायरे में है. इन समितियों में एमपैक्स गरुड़ बागेश्वर, जिला सहकारी विकास संघ चमोली, फल एवं साग-भाजी सहकारी क्रय-विक्रय समिति चकराता, टनकपुर क्रय-विक्रय समिति लिमिटेड चम्पावत, सीमांत सहकारी संघ लिमिटेड चमोली, डीसीडीएफ देहरादून, मंगलौर क्रय-विक्रय समिति हरिद्वार, जिला भेषज एवं सहकारी विकास संघ लिमिटेड टिहरी गढ़वाल, केंद्रीय उपभोक्ता भंडार उत्तरकाशी शामिल हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए सहकारिता सचिव के सामने मामले की जानकारी रखी गई, जिसके बाद संस्था को अखिल भारतीय स्तर पर ब्लैकलिस्ट करने, सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए है.
इसी क्रम में नोडल अधिकारी की ओर से थाना नेहरू कॉलोनी, देहरादून में सरकारी धन के गबन एवं धोखाधड़ी के आरोपों में दो अलग-अलग मुकदमे पंजीकृत कराने के लिए पत्र भेजा गया है, जिस पर पुलिस की ओर से विधिक कार्रवाई की जा रही है.
नेकॉफ संस्था द्वारा सरकारी धन के दुरुपयोग एवं धोखाधड़ी के संबंध में मुकदमा पंजीकृत कराने की कार्रवाई की गई है. संबंधित संस्था को पूरे देश में ब्लैकलिस्ट किए जाने के लिए भी पत्र भेजा जा रहा है. सरकारी धन के दुरुपयोग और सहकारी संस्थाओं के हितों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जो संस्थाएं काम नहीं कर रही हैं या फिर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रही हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
सहकारिता विभाग सरकारी धन के दुरुपयोग के हर मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रहा है और दोषी संस्थाओं एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.
-आनंद शुक्ल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना-
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