बरसात के मौसम में पशुओं की देखभाल: जानें कैसे करें बीमारियों से बचाव और दूध उत्पादान में कमी को दूर
बारिश के मौसम में पशुओं को कई प्रकार की बीमारियों/संक्रमण का खतरा रहता है. चिकित्सक से जानें कैसे पशुओं को सुरक्षित रखा जाए.

Published : June 26, 2026 at 5:05 PM IST
कुरुक्षेत्र: भारत में मानसून की शुरुआत जहां एक ओर चिलचिलाती गर्मी से राहत लाती है, वहीं दूसरी ओर यह मौसम पशुपालकों और डेयरी किसानों के लिए कई चुनौतियां भी लेकर आता है. बरसात के दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव और उमस बढ़ने के कारण पशुओं में बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है. पशु चिकित्सक डॉ. रोहतास सैनी के अनुसार इस मौसम में लापरवाही बरतने से पशु गंभीर तनाव में आ जाते हैं, जिससे उनके दूध उत्पादन में 15% तक की गिरावट आ सकती है. आइए जानते हैं कि बरसात के मौसम में पशुओं को बीमारियों से बचाने और दूध का उत्पादन बनाए रखने के लिए किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
गर्मी, उमस और हीट स्ट्रेस से बचाव: बरसात के शुरुआती दिनों में पहले से मौजूद गर्मी के साथ जब बारिश का पानी मिलता है, तो उमस बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. यह स्थिति पशुओं के लिए बेहद कष्टदायक होती है. इस मौसम में पशुओं के शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए उन्हें दिन में 4 से 5 बार साफ और ठंडा पानी जरूर पिलाएं. HF (Holstein Friesian) और अन्य क्रॉस ब्रीड नस्ल के पशुओं को इस मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी होती है. उमस के कारण ये पशु हांफने लगते हैं, जिससे वे चारा खाना कम कर देते हैं और धीरे-धीरे बीमार हो जाते हैं. ऐसे में पशुओं को रखने का स्थान पूरी तरह से खुला और हवादार होना चाहिए, ताकि हवा का क्रॉस-वेंटिलेशन बना रहे और उमस का असर कम हो.

चिचड़, मक्खी और मच्छरों का तांडव: बरसात का मौसम परजीवियों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल होता है. इस दौरान चिचड़ , मक्खी और मच्छरों का प्रकोप बहुत बढ़ जाता है. बरसात में पशुओं को कभी भी कच्चे या कीचड़ वाले स्थान पर न बांधें. कच्चे और नमी वाले स्थानों पर चिचड़ बहुत तेजी से पैदा होते हैं, जो पशुओं का खून चूसते हैं और उन्हें बीमार कर देते हैं.
जानलेवा बीमारियां: इन दिनों में काटने वाली मक्खियां और मच्छर पशुओं को अपना शिकार बनाते हैं. इनसे पशुओं में कुछ ऐसी खतरनाक और जानलेवा बीमारियां फैलती हैं, जिससे उनकी मौत तक हो सकती है.
उपचार और साफ-सफाई: यदि पशुओं के शरीर पर चिचड़ दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह से उचित दवाई का छिड़काव या लेप करें. पशुशाला की नियमित सफाई करें और मच्छरों को भगाने के उचित उपाय करें.

खान-पान और संतुलित आहार का महत्व: तनाव और बीमारी के कारण पशुओं में दस्त की शिकायत भी आम हो जाती है, जिससे उनका दूध एकदम से कम हो जाता है. पशुओं को इस स्ट्रेस से बाहर निकालने के लिए उनके भोजन में संतुलित पशु आहार शामिल करें. संतुलित आहार के साथ-साथ पशुओं को पर्याप्त मात्रा में हरा चारा जरूर दें. हरा चारा न सिर्फ पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है, बल्कि दूध की मात्रा को भी कम होने से रोकता है.

चिकित्सक की सलाह पर अमल करेंः बरसात के दिनों में पशुधन को सुरक्षित रखने का मूल मंत्र है सफाई, खुला व हवादार स्थान, पर्याप्त ठंडा पानी और पौष्टिक आहार. डॉ. रोहतास सैनी की इन बातों पर अमल करके आप न केवल अपने पशुओं को गंभीर बीमारियों और मौत के मुंह से बचा सकते हैं, बल्कि डेयरी व्यवसाय में होने वाले नुकसान (दूध की कमी) से भी बच सकते हैं.

