नैनीताल में ठंड से बचने के लिए कार के अंदर जलाई कोयले की अंगीठी, दम घुटने से ड्राइवर की मौत
पर्यटकों को नैनीताल घुमाने लाया था कार चालक, ठंड लगने पर गाड़ी में जलाई कोयले की अंगीठी, सुबह मिला मृत

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : December 28, 2025 at 8:31 PM IST
|Updated : December 28, 2025 at 9:16 PM IST
नैनीताल: नोएडा से पर्यटकों को लेकर नैनीताल पहुंचे चालक को गाड़ी के अंदर कोयले की अंगीठी जलाना महंगा पड़ गया. कोयलों की गैस लगने से चालक की मौत हो गई. पुलिस ने शव कब्जे में लेकर परिजनों को सूचित कर पंचनामे की कार्रवाई शुरू कर दी है.
कार के भीतर कोयले की अंगीठी जलाकर सोया था ड्राइवर: जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मथुरा के सिरोहा निवासी मनीष गंधार शनिवार यानी 27 दिसंबर को अपने टैक्सी वाहन संख्या UP 16 JT 8565 से नोएडा से पर्यटकों को लेकर नैनीताल पहुंचा था. रात करीब 9 बजे के आस पास सूखाताल पार्किंग में कार को पार्क किया, फिर कार के भीतर ही अंगीठी में कोयला जलाकर कंबल ओढ़कर सो गया.
शीशा तोड़कर बेसुध पड़े चालक को निकाला गया बाहर: आज यानी 28 दिसंबर की दोपहर तक जब वो नहीं उठा तो पार्किंग कर्मियों ने पुलिस को सूचना दी. सूचना पर कोतवाल हेमचंद्र पंत कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने वाहन को हिला डुला कर चालक को उठाने का प्रयास किया, लेकिन भीतर से कोई हरकत नहीं हुई तो शीशा तोड़कर बेसुध पड़े चालक को बाहर निकाला. जिसके बाद पुलिस उसे बीडी पांडे अस्पताल ले गई, लेकिन बीडी पांडे अस्पताल के डॉक्टरों ने कार चालक को मृत घोषित कर दिया.
"मृत कार चालक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है. जिनके पहुंचने के बाद पंचनामा व पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जाएगी. कार चालक के मुंह से झाग निकल रहा था. प्रथम दृष्टया अंगीठी की गैस लगने से चालक की मौत की संभावना जताई जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही चालक की मौत के स्पष्ट कारण पता लग पाएगा."- डॉ. जगदीश चंद्रा, एसपी ट्रैफिक एवं क्राइम, नैनीताल
कोयले की गैस से होने वाली मौतें और बचाव के उपाय: उत्तर भारत में आमतौर पर ठंड से बचने के लिए कोयले या लकड़ी की अंगीठी जलाई जाती है, लेकिन बंद कमरे में इसे जलाकर सोने से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस जमा हो जाता है, जो कि मौत का कारण भी बनता है. यह गैस रंगहीन, गंधहीन के साथ स्वादहीन होती है.

बंद कमरे में पर्याप्त ऑक्सीजन न होने पर CO यानी कार्बन मोनोऑक्साइड बनती है, जो खून में हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देती है. जो धीरे-धीरे बेहोशी और मौत का कारण बनती है. गहरी नींद की वजह से सोए व्यक्ति को पता नहीं चलता है, जिससे उसकी मौत हो जाती है.
अगर लक्षण की बात करें तो शुरुआत में सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, कमजोरी, मतली होती है. फिर बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, त्वचा लाल की शिकायत होती है. इसके बाद व्यक्ति बेहोश हो जाता है. फिर उसकी जान चली जाती है.
बचाव के तरीके-
- बंद कमरे में अंगीठी कभी न जलाएं.
- खिड़की या दरवाजा खुला रखें. ताकि, हवा का संचार यानी वेंटिलेशन हो सके.
- सोने से पहले अंगीठी बुझा लें. यानी रात भर जलने न दें.
- कमरे में ज्यादा लोग न सोएं. इससे ऑक्सीजन जल्दी कम हो सकती है.
- घर में कार्बन मोनोऑक्साइड अलार्म लगा सकते हैं. यह गैस का स्तर बढ़ने पर अलर्ट करता है.
- गैस लगने या घुटन महसूस होने पर तत्काल ताजी हवा में जाएं. ऑक्सीजन लें और अस्पताल जाएं.
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