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क्या है AI की अगली सबसे बड़ी चुनौती? केपजेमिनी की वाइस प्रेसीडेंट ने बताया; कही यह बात

इस सम्मेलन के लिए 1369 शोधपत्र प्राप्त हुए, जिनमें गहन समीक्षा के बाद 225 शोधपत्रों का चयन किया गया है.

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर.
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 30, 2026 at 9:53 AM IST

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गोरखपुर: इन दिनों पूरी दुनिया में AI की चर्चा है. एक्सपर्ट्स की राय भी अलग-अलग है. हाल ही में बिल गेट्स ने भी बयान दिया कि AI का समय इतिहास में सबसे उथल-पुथल भरा होगा. लेकिन क्या AI के सामने कोई चुनौती भी है? इसका जवाब केपजेमिनी की वाइस प्रेसीडेंट और AI हेड डॉ. सुदत्ता कर ने दिया है.

शनिवार को कंप्यूटर साइंस के विशेषज्ञों ने मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग द्वारा आयोजित 'इंटेलीजेंट एंड स्मार्ट कम्प्यूटिंग' विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. सुदत्ता कर ने कहा कि AI की विकास यात्रा अब ऐसे दौर में पहुंच गई है, जहां इसे केवल बड़े सर्वर और पारंपरिक कंप्यूटर प्रणालियों के संदर्भ में देखना पर्याप्त नहीं है.

AI तेजी से एम्बेडेड सिस्टम और सीमित संसाधनों वाले उपकरणों तक पहुंच रहा है. ऐसे उपकरणों में ऊर्जा और कंप्यूटिंग क्षमता सीमित होती है, इसलिए चुनौती ऐसी तकनीक विकसित करने की है, जो कम ऊर्जा और कम कंप्यूटिंग संसाधनों में भी बेहतर परिणाम दे सके.

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय. (Video Credit: ETV Bharat)

AI के सामने यही चुनौती है. उन्होंने कहा कि AI का दायरा जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसी के साथ उसके प्रभावी प्रबंधन, सुरक्षित उपयोग और जिम्मेदार तैनाती पर भी ध्यान देना होगा. तकनीक की क्षमता का विस्तार तभी सार्थक होगा, जब उसका उपयोग सुरक्षित, जिम्मेदार और प्रभावी ढंग से किया जाए.

डॉ. कर ने युवा इंजीनियरों और शोधार्थियों से कहा कि तकनीकी दुनिया लगातार बदल रही है, इसलिए सीखने की प्रक्रिया को कभी विराम नहीं देना चाहिए. उन्होंने शोधार्थियों को स्थापित सीमाओं से आगे प्रयोग करने, नए विचारों पर काम करने और असफलताओं से सीख लेने की प्रेरणा दी.

उन्होंने कहा कि शोध और नवाचार के क्षेत्र में हर प्रयोग सफलता नहीं देता, लेकिन प्रत्येक असफलता आगे बेहतर समाधान विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण सीख प्रदान कर सकती है.

कार्यक्रम का उद्घाटन.
कार्यक्रम का उद्घाटन. (Photo Credit: ETV Bharat)

आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. एचएम सूर्यवंशी ने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में स्मार्ट कम्प्यूटिंग का महत्व तेजी से बढ़ रहा है. पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी प्रबंधन प्रणाली भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं.

इन क्षेत्रों में AI और स्मार्ट कम्प्यूटिंग के उपयोग से ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि AI आधारित तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा प्रबंधन, अनुकूली नियंत्रण तथा बैटरी की स्थिति का बेहतर आकलन और पूर्वानुमान संभव है.

विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग के साथ बैटरी की स्थिति और प्रदर्शन की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है. ऐसे में स्मार्ट कम्प्यूटिंग तकनीकें बैटरी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

प्रो. सूर्यवंशी ने डिजिटल ट्विन जैसी तकनीकों को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से जटिल ऊर्जा प्रणालियों की निगरानी और उनकी कार्यक्षमता में सुधार किया जा सकता है.

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य की बुद्धिमान ऊर्जा प्रणालियों का विकास केवल आंकड़ों पर आधारित AI से नहीं होगा. AI को भौतिक विज्ञान के मूलभूत नियमों के साथ जोड़कर ऐसे समाधान विकसित करने होंगे, जो अधिक मजबूत, प्रभावी और भरोसेमंद हों.

वहीं एमएमएमयूटी की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि AI और स्मार्ट कम्प्यूटिंग आने वाले वर्षों की महत्वपूर्ण तकनीकों में शामिल होंगी. विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को तकनीकों से जोड़ने और उन्हें शोध एवं उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर जोर दे रहा है.

उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं. ऐसे में विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक ज्ञान तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है. उन्हें उभरती तकनीकों को समझने, उनके व्यावहारिक उपयोग को जानने और शोध एवं नवाचार के माध्यम से नई समस्याओं के समाधान तलाशने के अवसर मिलना जरूरी है.

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में AI, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण और शोध के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

उन्होंने अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा को उद्योग और वास्तविक जीवन की आवश्यकताओं से जोड़कर ही विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकता है.

गोरखपुर में कार्यक्रम.
गोरखपुर में कार्यक्रम. (Photo Credit: ETV Bharat)

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान (एबीवी-आईआईआईटीएम) के निदेशक प्रो. एसएन सिंह ने शोधार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ निरंतर सीखने और नवाचार करने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में बदलाव की गति बहुत तेज है और नई तकनीकें पारंपरिक कार्यप्रणालियों को लगातार प्रभावित कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि शोधार्थियों के लिए केवल वर्तमान तकनीकी ज्ञान तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होगा. उन्हें भविष्य की संभावनाओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपने ज्ञान और कौशल का निरंतर विकास करना होगा.

बदलती तकनीकी दुनिया में सफलता के लिए तकनीकी दक्षता के साथ सीखने की निरंतरता, नवाचार की क्षमता और परिवर्तन के अनुरूप स्वयं को ढालने की योग्यता भी जरूरी है.

विभागाध्यक्ष प्रो. डीएस सिंह ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य अकादमिक जगत, उद्योग और शोध संस्थानों को एक साझा मंच पर लाकर वास्तविक जीवन की समस्याओं के लिए स्मार्ट और प्रभावी तकनीकी समाधान तलाशना है.

इस सम्मेलन के लिए 1369 शोधपत्र प्राप्त हुए, जिनमें गहन समीक्षा के बाद 225 शोधपत्रों का चयन किया गया है. एमएमएमयूटी के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी विभाग की ओर से आयोजित सम्मेलन में इतनी बड़ी संख्या में शोधपत्र प्रस्तुतिकरण के लिए प्राप्त हुए हैं.

दो दिवसीय सम्मेलन में इंटेलिजेंट कम्प्यूटिंग, स्मार्ट कम्प्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा प्रणाली, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी प्रबंधन सहित आधुनिक तकनीकों पर मंथन किया जा रहा है.

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