श्वानों में फैल रहा 'कैनाइन डिस्टेंपर' बना बाघों के लिए खतरा, मुकुन्दरा और रामगढ़ टाइगर रिजर्व में अलर्ट
वन विभाग और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव जाकर श्वानों के सैंपल लेंगी और आवश्यक टीके लगाएगी.

Published : May 24, 2026 at 10:13 PM IST
कोटा/बूंदी: मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व और रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों पर मंडरा रहे खतरनाक 'कैनाइन डिस्टेंपर वायरस' (सीडीवी) को लेकर वन विभाग ने सतर्कता अभियान शुरू कर दिया है. आवारा श्वानों के जरिए फैलने वाले इस घातक वायरस को लेकर अब राजस्थान के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में हाई अलर्ट घोषित कर व्यापक निगरानी, सैम्पलिंग और टीकाकरण अभियान प्रारम्भ किया गया है. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों और अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, राजस्थान के निर्देशों की अनुपालना में कार्यालय मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), कोटा एवं क्षेत्र निदेशक, मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), कोटा एवं क्षेत्र निदेशक सुगना राम जाट ने की.
संभावित प्रभावों पर जताई चिंता: बैठक में पशुपालन विभाग कोटा के अतिरिक्त निदेशक और संयुक्त निदेशक, उप वन संरक्षक मुकुन्दरा राष्ट्रीय उद्यान, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ तेजिंदर सिंह रियार तथा डब्ल्यू डब्ल्यू एफ इंडिया के प्रतिनिधि डॉ कमलेश मौर्य सहित कई विशेषज्ञ अधिकारी मौजूद रहे. विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में सामने आए कैनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण और उसके बाघों, तेंदुओं तथा अन्य मांसाहारी वन्यजीवों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर गंभीर चिंता जताई.
जनजागरूकता अभियान: मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), कोटा एवं क्षेत्र निदेशक सुगना राम जाट ने बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया कि मुकुन्दरा हिल्स और रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर, बफर तथा परिधीय गांवों में बड़े स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. ग्रामीणों को बताया जाएगा कि आवारा एवं पालतू कुत्तों का नियमित टीकाकरण क्यों जरूरी है और संक्रमित जानवरों की सूचना तुरंत विभाग को देना कितनी महत्वपूर्ण है. यह वायरस मुख्य रूप से श्वानों और अन्य मांसाहारी जीवों में फैलता है, लेकिन यदि संक्रमित आवारा श्वान जंगल क्षेत्र के आसपास पहुंचते हैं तो यह संक्रमण बाघों तक भी फैल सकता है. इससे वन्यजीवों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के साथ उनकी मृत्यु तक हो सकती है. देश के कुछ हिस्सों में पहले भी वन्यजीवों में इस वायरस के संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं, जिसके बाद वन विभाग ने इसे गंभीर खतरे के रूप में लिया है.
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वन और पशु पालन की टीम लेंगी सैंपल: जाट ने बताया कि वन विभाग और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव जाकर श्वानों के सैंपल लेंगी और आवश्यक टीके लगाएगी. इस अभियान का उद्देश्य वायरस के संभावित संक्रमण को जंगल क्षेत्र तक पहुंचने से पहले ही रोकना है. डब्ल्यू एफ इंडिया ने इस विशेष अभियान में तकनीकी और फील्ड स्तर पर सहयोग देने की सहमति जताई है. वहीं पशुपालन विभाग टीकाकरण और चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराएगा. उन्होंने बताया कि सैम्पलिंग रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संक्रमण की स्थिति का वैज्ञानिक विश्लेषण कर आगे की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी. जाट ने बताया कि बाघ संरक्षण केवल जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए आसपास के गांवों और वहां रहने वाले पालतू पशुओं की निगरानी भी उतनी ही जरूरी है.
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'बूंदी जिले में कोई मामला नहीं': विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते कैनाइन डिस्टेंपर वायरस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह भविष्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है. बूंदी रामगढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ आलोक नाथ गुप्ता ने बताया कि हाल ही में बूंदी में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को लेकर कलेक्टर की अध्यक्षता में मीटिंग हो चुकी है. अभियान को लेकर पशु पालन विभाग और अन्य विभागों से चर्चा हो चुकी है. डीएफओ ने बताया कि हालांकि बूंदी जिले में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है. लेकिन रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर और बफर के साथ आस पास के गांवों में आवरा श्वान को चिन्हित कर उनका टीका करण किया जाएगा.

