कुरुक्षेत्र पशु मेले में ऊंट के कैटवॉक ने हर किसी को किया मंत्रमुग्ध, देखें वीडियो
कुरुक्षेत्र पशु मेले में ऊंट का कैटवॉक को देखकर वहां मौजूद हर शख्स मंत्रमुग्ध हो गया.

Published : February 8, 2026 at 6:12 PM IST
कुरुक्षेत्रः स्थानीय मेला ग्राउंड में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय पशु मेला का आयोजन किया जा रहा है. मेले में हरियाणा के अलग-अलग राज्यों से पशुपालक अलग-अलग कैटेगरी में पशु लेकर पहुंचे हैं. वहीं हरियाणा राजस्थान की सीमा से लगते महेंद्रगढ़ जिले से कई पशुपालक ऊंट लेकर यहां पर पहुंचे हैं. यहां पर प्रतियोगिता में भाग लेने के साथ-साथ ऊंट मेले में आए हुए लोगों का मनोरंजन करने के लिए स्टेज पर कैटवॉक करके लोगों को खूब मनोरंजन कर रहे हैं. ऊंट की ऐसी कैटवॉक शायद ही पहले आपने देखी होगी जहां पर मेले के अंदर गानों पर ऊंट थिरकते हुए नजर आए.
महेंद्रगढ़ के ऊंट ने जीता प्रथम पुरस्कारः ऊंट के मालिक जगदेव ने बताया कि "वे महेंद्रगढ़ से यहां पर मेले में पहुंचे हैं. उनके पूर्वज कई पीढ़ियों से ऊंट पालने का काम करते आ रहे हैं और इसी से ही उनकी रोजी-रोटी चलती है. साथ ही ऊंटों का उपयोग हम लोग खेती-बाड़ी में भी करते हैं. यहां पर वे अपने मादा ऊंट को लेकर पहुंचे हैं जिसको सुंदरता में प्रथम पुरस्कार मिला है और ये उनके लिए काफी बड़ी उपलब्धि है."
हरियाणा में ऊंटों की संख्या हो रही है कमः उन्होंने बताया कि "उनके इस मादा ऊंट की कीमत कीमत डेढ़ लाख रुपए है, जिसकी उम्र 3 वर्ष है. उन्होंने कहा कि जिस मादा ऊंट ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है, वह पहले भी दो बार अलग-अलग मेले में प्रथम पुरस्कार पा चुकी है. उन्होंने बताया कि आजकल हरियाणा में ऊंटों की संख्या लगातार कम हो रही हैं. लेकिन वह अब भी ऊंट से ही अपनी रोजी-रोटी चल रहे हैं. उसे हल में जोत कर खेती भी करते हैं. हालांकि यहां पर मात्र 6 से 7 पशुपालक ही ऊंट को लेकर मेले में आए हैं. सबसे बड़ी बात है कि हमारा यह ऊंट काफी ऊंचे कद का है. इसके बालों की कटिंग भी हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, क्योंकि इसके बालों की कटिंग उसकी सुंदरता में चार चांद लगा रही है."

'हम अपने पुश्तैनी काम को आगे बढ़ा रहे हैं': उन्होंने कहा कि "इनको खाने में कुछ अलग से नहीं दिया जाता, घर का जो अनाज होता है. वही मिक्स करके देते हैं. इसके रखरखाव में भी ज्यादा परेशानी नहीं होती है. सबसे बड़ी बात यह है कि आजकल हरियाणा में ऊंटों की संख्या कम हो गई है लेकिन हम लोग अपने इस पुश्तैनी काम को आगे बढ़ाने के लिए अब भी ऊंट पालने का काम कर रहे हैं."








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