मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में बार-बार लापरवाही, CAG रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
कैग रिपोर्ट में कहा गया- पीएससी और विभागों में तालमेल नहीं, सालों की देरी से भेज रहे खाली सरकारी पदों की जानकारी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 24, 2026 at 10:10 PM IST
भोपाल : मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग और प्रदेश के सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी से प्रदेश में भर्तियां ही समय पर नहीं हो पा रही हैं. साल 2018 से 2023 के बीच प्रस्तावित 44 परीक्षाओं से में से सिर्फ 28 परीक्षाएं ही आयोजित की जा सकीं, बाकी 16 परीक्षाओं को लेकर विभाग विज्ञापन ही जारी नहीं कर सका. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने प्रदेश में एमपी पीएससी स्तर की भर्ती की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
खाली पदों की जानकारी 68 माह में भेजी
अलग-अलग विभाग राज्य लोक सेवा आयोग की वेबसाइट के जरिए भर्ती के लिए आयोग को खाली पदों की जानकारी भेजते हैं. आयोग राज्य सिविल सेवा, वन सेवा और इंजीनियरिंग सेवाओं में भर्ती के लिए संबंधित विभागों से खाली पदों की जानकारी मांगता है. इस तरह आयोग और संबंधित विभागों के आपसी सहयोग से चयन की प्रक्रिया की जाती हैं. लेकिन सीएजी ने 2017-18 से 2022-23 के दौरान ऊर्जा विभाग, औद्योगिक नीति व निवेश प्रोत्साहन विभाग, जेल विभाग, मध्यप्रदेश आवास एवं अधोसंरचना विकास बोर्ड और लोक स्वास्थ्य यात्रिकी विभाग के मामले में पाया कि इन विभागों ने 101 खाली पदों की जानकारी भेजने में 31 माह से लेकर 68 माह का समय लग गया.

इसके चलते आयोग द्वारा सिर्फ 25 पदों पर ही भर्ती प्रक्रिया की जा सकी. विभागों के अलावा दूसरी भर्तियों में आयोग द्वारा भी समय सीमा का पालन नहीं किया गया. रिपोर्ट में सामने आया कि आयोग ने 2018-19 से लेकर 2022-23 के दौरान 12 हजार 336 पदों के लिए 56 परीक्षाओं से संबंधित 94 विज्ञापन जारी किए थे. आयोग द्वारा इन विज्ञापनों में से 30 विज्ञापन जारी करने में ही औसतन 136 दिनों का समय लिया गया.
बार-बार बदलते रहे कोटा, चार साल लग गए भर्ती में
सीएम ने दिव्यांगों को आरक्षण को लेकर पूर्व में जताई गई आपत्तियों के बाद भी इसमें सुधार नहीं किया. उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक के 2371 खाली पदों की अधिसूचना फरवरी 2016 में निकाले जाने के बाद भी इसकी परीक्षा में चार साल का समय लग गया. विभाग द्वारा दिव्यांगजन कोट की गणना को लेकर बार-बार संशोधन जारी किया जाता रहा. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आरक्षण नीति के अनुसार खाली पदों की जानकारी लेने के संबंध में कोई स्पष्ट आंतरिक व्यवस्था को नहीं अपनाया गया. इसके चलते नियुक्तियां आरक्षण विवादों में उलझती रहीं.
यह भी पढ़ें-
- दमकता भोपाल ताल बन रहा काला बदबूदार! मास्टर प्लान बचाएगा बड़े तालाब का नैचुरल पानी
- चीन से लगता है पीएम को डर, नरवणे की किताब और चीनी घुसपैठ पर संसद में बोलने से रोका : राहुल
- राहुल-खरगे के भाषण में केंद्रीय मंत्री का जिक्र, बोले- मोदी के सामने झुक गए शिवराज सिंह
सीएजी ने कहा-केरल मॉडल किया जाए लागू
सीएजी ने राज्य शासन को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए केरल लोक सेवा आयोग के मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया है. केरल में एक माह का समय सीमा निर्धारित है. उधर सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि इसमें सुधार के लिए एक पोर्टल विकसित किया जा रहा है. इस पोर्टल पर खाली पदों को विभाग द्वारा ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा. इससे आयोग को विज्ञापन के प्रकाशन में लगने वाले समय को बचाया जा सकेगा.

