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जाबिर को विरासत में मिली अनोखी परंपरा, सालों से रोजेदारों की पूरी शिद्दत से कर रहे खिदमत

बुरहानपुर में जाबिर शाह नाम के शख्स रमजान के महीने में रोजेदारों को जगाने के लिए घर-घर दस्तक देते हैं.

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10 सालों से रोजेदारों को जगा रहे जाबिर शाह (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : March 2, 2026 at 5:32 PM IST

3 Min Read
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बुरहानपुर: रमजान के महीने में अलसुबह सेहरी के लिए समाज के लोगों को जगाने की परंपरा सदियों पुरानी है. हालांकि, समय के साथ लोग लाउडस्पीकर, डिजिटल अलार्म और मोबाइल ऐप पर निर्भर हो चुके हैं. इसके बावजूद मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में आज भी घर-घर जाकर लोगों को जगाने की परंपरा जारी है.

शहर में दिखी अनोखी परंपरा

बुरहानपुर में आज भी सैकड़ों साल पुरानी परंपरा जारी है. जहां जाबिर शाह नामक व्यक्ति रमजान के महीने में रोजेदारों को जगाने के लिए घर-घर जाते हैं. वह तीन पीढ़ियों से रोजेदारों को जगाने का काम कर रहे हैं. लोगों को जगाने वाले जाबिर शाह ने बताया, "हमें यह नेक काम अपने पूर्वजों से विरासत में मिला है, इससे पहले इस नेक काम को मेरे दादा और पापा करते थे. उसके बाद मैंने इस काम को संभाल लिया है. इस काम को हम करीब 10 साल से कर रहे हैं."

जाबिर को विरात में मिली अनोखी परंपरा (ETV Bharat)

तीन पीढ़ियों से निभा रहे ये परंपरा

जाबिर शाह आगे बताते हैं कि रमजान के महीने में रोज रात में शहर के करीब 11 वार्डों में घर-घर जाकर डंडा बजाकर, नात शरीफ गाकर और नाम लेकर पुकारते हैं कि उठो सहरी का समय हो गया है. घरों के दरवाजों को लाठी से ठोंकने के साथ हम सभी लोगों का नाम लेकर बुलाते हैं.

जाबिर के भरोसे निश्चिंत होकर सोते हैं रोजेदार

जाबिर शाह द्वारा रमजान के महीने में रोजेदारों को जगाए जाने के सवाल पर स्थानीय निवासी मसूद खान ने कहा, "बुरहानपुर शहर में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक रहते हैं, यहां पवित्र रमजान महीने में अधिकांश लोग रोजा रखते हैं. इससे पहले सेहरी के लिए उठना पड़ता है. अलार्म होने के बावजूद हम जाबिर शाह के भरोसे निश्चिंत होकर सो जाते हैं. क्योंकि जब तक हम उठ नहीं जाते वो तब तक जगाते रहते हैं."

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सालों से रोजेदारों की पूरी शिद्दत से कर रहे खिदमत (ETV Bharat)

अंधेरी रात में रोजेदारों की खिदमत

वहीं, एक अन्य रोजेदार अब्दुल वसीम ने बताया, "रोजाना हमारे गेट पर सेहरी जाबिर दस्तक देते हैं, वह पुकारा देकर रोजेदारों को नींद से जागते हैं, ताकि सही समय पर सेहरी की जा सके. अगर वह नहीं आएं तो हो सकता है कि हमें बिना सेहरी के रोजा रखना पड़े, लेकिन वह अंधेरी रात में गली-गली जाकर रोजेदारों की खिदमत में जुट गए हैं."

बुरहानपुर अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र है, यहां रमजान की रौनक अलग ही दिखाई देती है. सुबह से लेकर रात तक बाजार गुलजार रहते हैं. इन दिनों रोजा रखने वाले खासा उत्साहित नजर आ रहे हैं. महिला, पुरुष सहित बुजुर्गों और बच्चों ने रोजा रखा है.