घोड़ी पर चढ़, हाथ में ली तलवार और सिर पर साफा, रानी लक्ष्मीबाई बन निकली दुल्हन
बुरहानपुर में पिता ने बेटी को रानी लक्ष्मीबाई की तरह सजा-संवार कर निकाली बारात, दुल्हन ने घोड़ी चढ़ लहराई तलवार.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 4, 2026 at 6:18 PM IST
बुरहानपुर: खामनी गांव की गलियों में अनोखी बारात देखने को मिली. इस बारात में घोड़ी पर दूल्हा नहीं बल्कि दुल्हन सवार थी. बौद्ध समाज के सुमेश तायड़े ने अपनी दुल्हन बेटी नेहा तायड़े को रानी लक्ष्मीबाई की तरह सजा-संवार कर घोड़ी पर बारात निकाली. सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को देखने के बाद इसे नारी सशक्तिकरण की मिसाल बता रहे हैं. यह वीडियो 29 दिसंबर का है, जो इंटरनेट पर काफी सर्कुलेट किया जा रहा है.
मां की इच्छा थी, बेटे-बेटियों को मिले समान दर्जा
खामनी गांव निवासी सुमेश तायड़े की 2 बेटियां और 1 बेटा है. कुछ वर्ष पहले उनकी पत्नी का निधन हो चुका है. उनकी पत्नी की इच्छा थी कि बेटियों को भी बेटों के समान दर्जा दिया जाए, ताकि बेटा-बेटियों के बीच फैले फासले को मिटाया जा सके. सुमेश तायड़े ने अपनी पत्नी की ख्वाहिश का मान रखा. उन्होंने तीनों बच्चों की परवरिश बड़े ही लाड़-दुलार से की. उन्हें स्नातक तक पढ़ाया. उनकी पहली बड़ी बेटी और बेटे की शादी हो चुकी है.
पत्नी की ख्वाहिश पति ने की पूरी
उन्होंने दूसरी बेटी को पढ़ा लिखा कर फैशन डिजाइनर बनाया. फैशन डिजाइनर नेहा की शादी महाराष्ट्र में तय की गई. पिता सुमेश अपनी छोटी बेटी नेहा की घोड़ी पर बारात निकाल कर दिवंगत पत्नी की इच्छा पूरी की. यह दृश्य देख लोगों ने सुमेश की इस अनोखी पहल की खूब सराहना की है. उनका कहना है कि "ऐसे प्रयास बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान को गति दे सकते हैं."

सुमेश ने निभाया पत्नी का वचन
स्थानीय निवासी सुभाष मोतेकर ने बताया "सुमेश ने अपनी दिवंगत पत्नी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की, क्योंकि उन्होंने पत्नी की ख्वाहिश को पूरा किया. अक्सर लोगों के दुनिया से चले जाने के बाद उनके वचन और यादें भुला देते हैं, लेकिन सुमेश तायड़े ने अपना वचन निभाकर मिसाल कायम की है."

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लक्ष्मीबाई की तरह घोड़ी पर सवार हो निकली दुल्हन
नेहा के पिता सुमेश तायड़े ने बताया कि "मेरी पत्नी की इच्छा थी कि बेटी नेहा की घोड़ी पर बारात निकाले. इससे पहले पत्नी का देहांत हो गया. मेरी पत्नी के जाने के बाद भी मैंने उसकी इच्छा पूरी की. जब बेटी नेहा की शादी तय हुई, तो रानी लक्ष्मीबाई की तरह सजा-संवार कर दुल्हन बनाया. घोड़ी पर बैठाकर बारात निकाली. इससे बेटा-बेटी के बीच के भेदभाव को खत्म किया."

