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ठाकुरजी के साथ सास-बहू की होली, रिश्ते होते हैं मजबूत, हजारों साल पुरानी है परंपरा

बुरहानपुर के श्री गोकुल चंद्रमाजी मंदिर में बरसाना की तर्ज पर फाग उत्सव, सास-बहू होली और ब्रज की लट्ठमार होली भी होती है आयोजित.

BURHANPUR GOKUL TEMPLE HOLI
बुरहानपुर में बरसाना की तर्ज पर फाग उत्सव (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : March 1, 2026 at 5:56 PM IST

3 Min Read
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रिपोर्ट:- सोनू सोहले

बुरहानपुर: श्री गोकुल चंद्रमाजी मंदिर में बरसाना की तर्ज पर फाग उत्सव की शुरुआत हो चुकी है. जिसमें सास-बहू की होली, लट्ठमार होली सहित फूलों और लड्डूओं की होली खेली जाती है. होली त्योहार से पहले इस मंदिर में सास-बहू एक दूसरे को जमकर खुशियों का रंग और गुलाल लगाती हैं. ठाकुरजी को साक्षी मानकर पूरे साल में हुए मन मुटाव को वे दूर करती हैं. इसके बाद सालभर सास-बहू सहेलियों की तरह रहती हैं. इस होली में सैकड़ों सास-बहुएं शामिल होती हैं और पूरे उमंग और उत्साह से एक दूसरे के साथ फुगड़ी भी खेलती हैं.

ठाकुर जी के साथ सब ने खेली होली

गोकुल चंद्रमाजी मंदिर में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चों सहित बुजुर्ग भक्त ठाकुरजी के दर्शन के लिए पहुंचे. सभी ने दरबार में मत्था टेका और ठाकुरजी को गुलाल लगाया. यहां गोपियों ने बालक रूपी भगवान श्री कृष्ण पर जमकर लट्ठ बरसाए, साथ ही फूलों की होली खेली. इस मौके पर भजन कीर्तन भी आयोजित किए गए. जिसमें होली के गीत गाए गए. मौके पर महिलाओं ने होली के गीतों पर नृत्य भी किया.

ठाकुरजी के साथ सास-बहू की होली (ETV Bharat)

'सास-बहू के रिश्ते को करता है मजबूत'

श्रद्धालु अर्चना गोविंदजीवाला ने बताया कि "यहां हर साल सास-बहू की होली का आयोजन किया जाता है. इस होली में सास-बहू होली खेलती है और एक दूसरे को प्रेम का रंग लगाती हैं. इससे सालभर सास-बहू के रिश्ते में मधुरता बरकरार रहती है. होली के रंग में रंगी सास-बहू मन मुटाव भूलकर एक दूसरे को सीने से लगाती हैं."

Mothe daughter in law Holi
बुरहानपुर के श्री गोकुल चंद्रमाजी मंदिर में सास-बहू की होली (ETV Bharat)

श्रद्धालु सुरेखा मुंशी ने बताया कि "बरसाना की तर्ज पर लट्ठमार और सास-बहू की होली खेली गई, इस पावन दिन का सबको बेसब्री से इंतजार रहता है. आज के दिन लोग पूरे उत्साह और उमंग के साथ प्रेम के रंग में रंग जाते हैं. इससे माहौल खुशनुमा और भक्तिमय हो जाता है."

हजारों साल पुरानी है परंपरा

श्री गोकुल चंद्रमाजी मंदिर के पुजारी आदित्य शर्मा ने बताया, "फाग उत्सव की शुरूआत हो चुकी है. होलिका दहन से सास-बहू होली, मसाल रार होली, फूलों की होली, ब्रज की लट्ठमार होली सहित अनेकों आयोजन किए जाते हैं. इस पूरे आयोजन के दौरान भक्तों को ठाकुरजी के दुर्लभ दर्शन होते हैं. हर साल बड़ी संख्या में भक्त इस अलौकिक दर्शन के साक्षी बनते हैं, यह परंपरा हजारों साल पुरानी है, जो आज भी जीवित है."

Burhanpur Gokul Temple Holi
ठाकुर जी के साथ सब ने खेली होली (ETV Bharat)