बुरहानपुर का फेमस कोहिनूर नान साल में सिर्फ एक महीने मिलता, रोजेदारों की है पहली पसंद
मध्य प्रदेश के सबसे ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर में नान का क्रेज सातवें आसमान पर, शाम ढलते ही बाजारों में ब्रेड खरीदारों की उमड़ती है भीड़.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 4, 2026 at 5:04 PM IST
रिपोर्ट: सोनू सोहले
बुरहानपुर: मुसलमानों का सबसे पाक महीना रमजान चल रहा है. इस पूरे महीने में रोजेदार अलग-अलग तरह के लजीज पकवान सेहरी और इफ्तार में खाना पसंद करते हैं. मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर में आज भी मुगलकालीन रिवायत डबल ब्रेड (नान) खाने का क्रेज सातवें आसमान पर है. यहां शाम ढलते ही बाजारों में नान खरीदारों का हुजूम उमड़ पड़ता है.
रोजेदारों की पहली पसंद नान
बुरहानपुर जिला जितना ऐतिहासिक है. उतने ही रोचक यहां के बाजार और उनमें सजाये गए लजीज पकवान हैं. यहां पहले रोजे से लेकर आखिरी रोजे तक डबल ब्रेड (नान) का क्रेज सातवें आसमान पर रहता है. लगभग हर परिवार की सेहरी में पहली पसंद नान होती है.
मैदा, शक्कर, ड्रायफ्रूट्स और दूध से होता है तैयार
बेकरी के संचालक शब्बीर हुसैन बताते हैं कि "उनकी दुकान तीन पीढ़ी पुरानी है. यहां का बना हुआ ब्रेड पूरे रमजान रोजेदारों की पहली पसंद रहता है. इसको बनाने में मैदा, शक्कर, ड्रायफ्रूट्स और दूध के मिश्रण का उपयोग किया जाता है. जिससे यह स्वादिष्ट और पौष्टिक बनता है. इसकी कीमत 10 से लेकर 80 रुपए तक होती है. जिसके चलते इसे हर वर्ग के लोग आसानी से खरीद लेते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसको कम से कम समय में दूध में डुबाकर आसानी से सेहरी में खाया जाता है."

महाराष्ट्र सहित कई जिलों में सप्लाई
शब्बीर हुसैन आगे बताते हैं कि "रमजान में सेहरी के वक्त नान खाने की परंपरा मुगलकाल से चली आ रही है. जबकि कुछ लोग इसे यूनान से जुड़ी परंपरा भी बताते हैं. अब यह नान बुरहानपुर की पहचान बन चुका है. इसकी डिमांड पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र सहित प्रदेश के कई जिलों से आती है. प्रतिदिन महाराष्ट्र और प्रदेश के विभिन्न जिलों में 2000 से ज्यादा ब्रेड भेजा जाता है."

दो दर्जन से अधिक बेकरियों में होता है तैयार
बुहानपुर शहर में लगभग दो दर्जन से अधिक बेकरियां मौजूद हैं. जिसमें से औसतन 7 हजार नान की बिक्री होती है. महाराष्ट्र के जलगांव, औरंगाबाद, अमरावती, बुलढाणा सहित खंडवा, खरगोन और इंदौर तक इसकी सप्लाई की जाती है. रोजाना इन जिलों में 2 हजार से ज्यादा नान पहुंचाई जाती है. जबकि बुरानपुर में करीब 5 हजार नान की खपत होती है.

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स्थानीय निवासी शेख लुकमान ने बताया, "सेहरी में नान खाने की रिवायत हमारे पूर्वजों से चली आ रही है, रमजान में विशेष नान बिकती है, जिसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक आसानी से खाते हैं. इसकी दूर-दूर तक डिमांड है. मैं खुद पुणे तक नान पहुंचाता हूं. इसका स्वाद बेहद निराला और जायकेदार होता है, जो न सिर्फ सस्ता है, बल्कि पोष्टिक भी है."

