बीजेपी सांसद ने बनाए गोबर के कंडे, बुरहानपुर में लकड़ी नहीं उपलों से होगा होलिका दहन
देशभर में 2 मार्च यानि सोमवार को किया जाएगा होलिका दहन, बुरहानपुर में लकड़ी की जगह गोबर के उपलों कंडों की जलाई जाएगी होली.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 4:43 PM IST
रिपोर्ट : सोनू सोहले
बुरहानपुर: देशभर सहित बुरहानपुर में भी रंगों के त्योहार होली की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. इस साल 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, ऐसे में राजपुरा स्थित ज्ञानवर्धनी क्षेत्र में स्वामी विवेकानंद गणेश उत्सव समिति ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जरूरी कदम उठाया है. उन्होंने 12 साल पहले गोबर के कंडो यानि उपले की होलिका दहन की नींव रखी है. हर साल बच्चियां और महिलाएं गाय के गोबर से कंडे बनाने में जुट जाती हैं. वह पूरी लगन और उत्साह से इस काम को बखूबी निभाती है. इस साल भी महिलाओं ने बड़ी संख्या में कंडे तैयार किए हैं.
बुरहानपुर में बने गोबर के उपले
बुरहानपुर में सैकड़ों स्थानों पर होलिका दहन होता है. इसके बाद बच्चों, युवाओं सहित बुजुर्ग रंगों का त्योहार मनाकर एक दूसरे को अबीर-गुलाल और रंग लगाते हैं. इससे पहले बाजारों में रंग और गुलाल की जमकर खरीदी-बिक्री चल रही है. इस पर्व को लेकर बच्चों से लेकर युवाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है. वहीं दूसरी ओर स्वामी विवेकानंद गणेश उत्सव समिति ने अनूठी पहल की शुरुआत की है. ज्ञानवर्धनी भवन में महिलाओं, बालिकाओं ने कंडों बनाए हैं.
हालिका दहन के लिए हजारों की संख्या में बने कंडे
खास बात यह है कि होलिका दहन के लिए अब तक हजारों की तादाद में कंडे बनाए गए हैं. इस दौरान आयोजक अमोल भगत और बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने स्थानीय लोगों को जागरूकता का संदेश दिया है. उन्होंने आम नागरिकों से भी कंडों की होली जलाने की अपील की है, जिससे पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके. साथ ही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर अंकुश लगाया जाए.

सांसद ने भी बनाए गोबर के कंडे
सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि "होली खुशियों का त्योहार है. इस दिन एक दूसरे को प्रेम का रंग लगाते हैं, लेकिन हर साल होलिका दहन के नाम हरियाली को नुकसान हो रहा है. बड़ी संख्या में पेड़ काट लिए जाते हैं. ऐसे में स्वामी विवेकानंद गणेश उत्सव समिति ने 12 सालों से अनूठी होली दहन की शुरुआत की थी. समिति का यह कदम काफी सराहनीय है. मैंने खुद भी अपने हाथों से गोबर के कंडे तैयार किए. आम नागरिकों से आग्रह है कि होलिका दहन में लकड़ियों की जगह कंडों का उपयोग करें, ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो सके."

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स्वामी विवेकानंद गणेश उत्सव समिति अध्यक्ष व आयोजक अमोल भगत ने बताया कि "पिछले 12 सालों से कंडों की होली जलाते आ रहे हैं. यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शुरू की थी, ताकि आम नागरिक इससे प्रेरित होकर कंडों की होली को अपनाएं, इससे पर्यावरण प्रदूषण रोकने में मदद मिलेगी.

