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बुरहानपुर में झोपड़ी में गूंज रहा A फॉर एप्पल, 9वीं की छात्रा गढ़ रही नौनिहालों का भविष्य

बुरहानपुर में स्कूल के लिए सरकार से पक्के भवन और टीचर्स की उठी मांग, सुविधा के अभाव में झोपड़ी में पढ़ने मजबूर बच्चे.

BURHANPUR CHILDREN STUDYING IN HUT
ग्रामीणों के जनसहयोग से झोपड़ी में चल रहा स्कूल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 24, 2026 at 10:53 PM IST

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Updated : February 26, 2026 at 11:33 AM IST

3 Min Read
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बुरहानपुर: नेपानगर के ग्राम पंचायत मांडवा के अंतर्गत आने वाली बोमल्यापाट फालिया में नौनिहाल झोपड़ी में पढ़ने को विवश हैं. यहां कोई स्कूल नहीं है. सरकार की ओर से भी बच्चों की शिक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. इसलिए ग्रामीणों के जनसहयोग से एक स्कूल चलाया जाता है. यह स्कूल एक झोपड़ी में संचालित होती है, जहां 9वीं की छात्रा शिक्षक बनकर नौनिहालों का भविष्य गढ़ रही है. इसके लिए उसे कोई वेतन भी फिलहाल नहीं मिल रहा है.

न पक्का भवन, न नियमित शिक्षक

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र नेपानगर के बोमल्यापाट फालिया में बच्चों के लिए कोई स्कूल नहीं है. जिससे पढ़ेगा 'इंडिया, तो बढ़ेगा इंडिया' जैसे स्लोगन इस गांव में पहुंचते-पहुंचते शायद अर्थहीन हो जाते हैं. ग्रामीणों ने बच्चों की चिंता करते हुए जनसहयोग से एक स्कूल शुरू किया है, जिसके लिए पक्का भवन भी नहीं है और झोपड़ी में बच्चे पढ़ाई करते है. इस स्कूल में 60 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन कोई नियमति शिक्षक भी नहीं हैं.

सरकार से पक्के भवन और टीचर्स की मांग (ETV Bharat)

बच्चों को पढ़ाती है 9वीं की छात्रा

झोपड़ी में पढ़ाने वाली सीमा बडोले कहती हैं, "बहुत सारे बच्चे पढ़ना चाहते हैं, लेकिन इस झोपड़ी में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण सभी बच्चे नहीं आ पाते हैं. यहां नियमित शिक्षक भी नहीं हैं. मैं भी खुद अभी 9वीं कक्षा की छात्रा हूं और बच्चों को पढ़ा रही हूं. इसके लिए मुझे कोई वेतन नहीं मिलता है, लेकिन वन विभाग के जागरूक नाकेदार कमलेश रघुवंशी ने अपनी ओर से कुछ पैसे देने का आश्वासन दिया है."

Burhanpur 9th grade student teaching
9वीं की छात्रा गढ़ रही नौनिहालों की भविष्य (ETV Bharat)

अगले सत्र से कक्षाएं शुरू करने का आश्वासन

इस पूरे मामले में नेपानगर एसडीएम भागीरथ वाखला ने कहा "यदि धरती आभा योजना के तहत गांव में विकास नहीं हुआ है, तो सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे." वहीं, आदिम जाति कल्याण विभाग के उपसंचालक भारत जांचपुरे ने भी आश्वासन देते हुए कहा "बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होने देंगे. एक प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा जाएगा. आगामी वर्ष में स्कूल भवन उपलब्ध कराएंगे, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके."

Burhanpur Children studying in hut
झोपड़ी में चल रहा है स्कूल (ETV Bharat)

गांव के बच्चों का भविष्य गढ़ रहीं सीमा ने बताया

ग्राम पंचायत मांडवा के बोमल्यापाट फालिया तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क भी नहीं है. बच्चों को पढ़ा रही सीमा ने कहा, "यहां के ग्रामीणों को बच्चों के भविष्य की चिंता है. इसलिए वे अपनी ओर से बच्चों को शिक्षित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इन बच्चों के लिए बेहतर स्कूल, पर्याप्त संसाधन और सरकारी मदद की जरूरत है, जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके और वे पढ़-लिख अपना भविष्य संवार सके."

Burhanpur school building demand
झोपड़ी में बच्चे पढ़ने को हैं मजबूर (ETV Bharat)

स्थानीय लोगों ने भी सरकार से तत्काल स्कूल भवन मुहैया कराने की मांग की है. इसके साथ ही जबतक स्कूल भवन मुहैया नहीं हो जाती तब तक वर्तमान में जनसहयोग से चल रहे स्कूल में नियमित शिक्षकों की ड्यूटी लगाने की मांग की है.

Last Updated : February 26, 2026 at 11:33 AM IST