22 वर्षों के संघर्ष की जीत: केशवरायपाटन शुगर मिल फिर से होगी गुलजार, मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद किसानों में जश्न का माहौल
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बजट घोषणा के बाद केशवरायपाटन में 22 साल से बंद शुगर मिल शुरू होने की उम्मीदें बढ़ गई है.

Published : February 28, 2026 at 9:25 PM IST
बूंदी: हाड़ौती अंचल के किसानों के लिए वर्षों से प्रतीक्षित वह क्षण आखिरकार आ ही गया, जब प्रदेश सरकार ने बूंदी जिले के केशवरायपाटन कस्बे में बंद पड़ी सहकारी शुगर मिल को पुनः शुरू करने की घोषणा कर दी. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से बजट सत्र में शुगर मिल को पीपीपी मोड पर संचालित किए जाने की घोषणा होते ही क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसानों के चेहरे खिल उठे. जैसे ही यह खबर फैली, मिल परिसर में किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा और आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया गया. किसानों का कहना है कि यह उनके 22 वर्षों तक चले किसान संघर्ष की ऐतिहासिक जीत है. उनकी एकजुटता, धैर्य और सतत आंदोलन का परिणाम है.
घोषणा के बाद केशवरायपाटन शुगर मिल संयुक्त किसान समन्वय समिति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान मिल परिसर में एकत्रित हुए. 'किसान एकता जिंदाबाद' और 'हमारा संघर्ष सफल हुआ' जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा. किसानों ने आतिशबाजी कर मुख्यमंत्री का आभार जताया. समिति के प्रतिनिधि नवीन श्रृंगी ने कहा कि क्षेत्र के किसानों ने बीते 22 वर्षों से मिल के संचालन को लेकर निरंतर संघर्ष किया है. उन्होंने बताया कि कई बार धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के बावजूद समाधान नहीं निकला, लेकिन किसानों ने हिम्मत नहीं हारी. आज बजट में की गई घोषणा ने उनके लंबे संघर्ष को सार्थक कर दिया है.
वरिष्ठ किसान नेता दशरथ कुमार के नेतृत्व में किसानों ने एक स्वर में सरकार के निर्णय का स्वागत किया. युवा किसान नेता गिर्राज गौतम ने कहा कि यह क्षेत्र के किसानों की तपस्या का परिणाम है. उन्होंने कहा कि एक पीढ़ी ने इस मिल को स्थापित किया, दूसरी पीढ़ी ने इसे बचाए रखने के लिए संघर्ष किया और अब युवाओं की जिम्मेदारी है कि मिल का संचालन निरंतर चलता रहे. गौतम ने संघर्ष में सहयोग करने वाले सभी जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलकर धन्यवाद ज्ञापित किया जाएगा और यह सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि प्रक्रिया जल्द शुरू हो ताकि किसान इसी सत्र में गन्ना बो सकें. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि इस आंदोलन के दौरान कई किसान साथी इस दुनिया को छोड़ गए, लेकिन आज उनकी आत्मा भी प्रसन्न होगी कि उनका संघर्ष रंग लाया.
लागत घटेगी, आय बढ़ेगी: हाड़ौती क्षेत्र में गन्ना उत्पादन की संभावनाएं लंबे समय से मौजूद हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर शुगर मिल बंद होने के कारण किसानों को अपनी फसल दूर-दराज की मिलों में भेजनी पड़ती थी. इससे परिवहन लागत बढ़ती थी और कई बार उचित मूल्य भी नहीं मिल पाता था. अब शुगर मिल शुरू होने से किसानों को अपनी उपज स्थानीय स्तर पर बेचने का अवसर मिलेगा. इससे न केवल परिवहन खर्च में कमी आएगी, बल्कि समय पर भुगतान और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. स्थानीय स्तर पर मिल संचालन शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.
यह भी पढ़ें: बूंदी : 21 वर्षों से बन्द पड़ी शुगर मिल को चलाने की मांग को लेकर किसानों का धरना जारी
दो दशक तक चला आंदोलन: केशवरायपाटन और आसपास के क्षेत्रों में शुगर मिल को पुनः शुरू करने की मांग लंबे समय से उठती रही है. शुगर मिल संयुक्त किसान समन्वय समिति दो दशकों से अधिक समय से आंदोलनरत रही. समिति का कहना था कि क्षेत्र के किसान गन्ना उत्पादन के लिए तैयार हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर मिल नहीं होने के कारण वे इस फसल को अपनाने से हिचकते थे. सरकार की घोषणा के बाद अब किसानों को विश्वास है कि क्षेत्र में गन्ना आधारित उद्योग को नई गति मिलेगी. कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसान आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होंगे.

