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बृज विश्वविद्यालय में ‘भ्रष्टाचार का महिमामंडन’: दोषी कर्मचारी बना दिए अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य सलाहकार

विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव का कहना है कि संगोष्ठी की तैयारी पहले से चल रही थी, इसलिए इन अधिकारियों को मुख्य सलाहकार बनाया गया.

Brij University
बृज विश्वविद्यालय (ETV Bharat File Photo)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 6, 2026 at 5:08 PM IST

4 Min Read
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भरतपुर: महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की जगह उसका महिमामंडन होता दिख रहा है. संभागीय आयुक्त की जांच में भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए गए कर्मचारी, जिनके खिलाफ एफआईआर, निलंबन और वित्तीय वसूली के आदेश तक राजभवन से जारी हो चुके हैं, उन्हीं को विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य सलाहकार बना दिया. 20–21 जनवरी को आयोजित होने जा रही 'भारतीय ज्ञान परंपरा–विविध संदर्भ' विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक जवाबदेही, बल्कि विश्वविद्यालय की अकादमिक साख पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

इस संगोष्ठी में श्रीलंका, नीदरलैंड और लंदन जैसे देशों से अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के शामिल होने की तैयारी है. लेकिन इस अकादमिक आयोजन की गरिमा उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी माने गए उपकुलसचिव डॉ अरुण कुमार पाण्डेय, सहायक कुलसचिव प्रशांत कुमार और परीक्षा नियंत्रक फरवट सिंह को ही इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई.

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जांच में दोषी, फिर भी मुख्य सलाहकार: संभागीय आयुक्त की जांच रिपोर्ट में उपकुलसचिव डॉ अरुण कुमार पाण्डेय, सहायक कुलसचिव प्रशांत कुमार और परीक्षा नियंत्रक फरवट सिंह को भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी माना गया है. इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन्हें अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य सलाहकार नियुक्त कर दिया. राज्यपाल सचिव डॉ पृथ्वी ने 17 अक्टूबर, 2025 को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए, तत्काल निलंबन किया जाए और वित्तीय वसूली सुनिश्चित की जाए.

पढ़ें: बृज विवि 'ऑटो-पायलट' मोड में, चैंबर पर ताला, भ्रष्ट अब भी सुरक्षित

इतना ही नहीं बर्खास्त कुलपति प्रो रमेश चंद्रा से भी वसूली की अनुशंसा की गई थी. इसके बाद 3 नवंबर, 2025 को उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ मुकेश कुमार शर्मा ने भी वही आदेश दोहराते हुए शीघ्र कार्रवाई कर रिपोर्ट देने को कहा. लेकिन तीन माह बीतने के बाद भी न कोई एफआईआर दर्ज हुई, न कोई निलंबन हुआ और न ही एक रुपए की वसूली. भ्रष्टाचार में लिप्त इन कर्मचारियों के मामले में विश्वविद्यालय ने बोम बैठक में एक और कमेटी बना दी लेकिन उसकी रिपोर्ट भी डेढ़ माह बाद तक प्रस्तुत नहीं की गई है.

पढ़ें: बृज यूनिवर्सिटी : निलंबित कुलपति रमेश चंद्रा पद से हटाए गए, तीन भ्रष्ट कर्मचारियों पर कार्रवाई का इंतजार

'आरोप हैं, जांच चल रही है': मामले पर विश्वविद्यालय के वर्तमान उपकुलसचिव लक्ष्मीकांत गुप्ता का कहना है कि संगोष्ठी की तैयारी पहले से चल रही थी, इसलिए इन अधिकारियों को मुख्य सलाहकार बनाया गया. उन्होंने यह भी कहा कि इन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, लेकिन जांच अभी जारी है. हालांकि सवाल यह है कि जब संभागीय आयुक्त की जांच में दोष सिद्ध हो चुके हैं और राजभवन स्पष्ट कार्रवाई के आदेश दे चुका है, तो जांच जारी कैसे मानी जा रही है?

विश्वविद्यालय में घोटालों की लंबी फेहरिस्त:

  • 25 लाख रुपए कैश चोरी: विश्वविद्यालय से नकद राशि चोरी हो गई, न चोर पकड़ा गया, न रकम बरामद. विधायक बहादुर सिंह कोली ने एसीबी में शिकायत की थी.
  • वॉच टॉवर घोटाला: 2.5 लाख में बनने वाले चार वॉच टॉवरों पर 9.5 लाख का भुगतान, करीब 7 लाख का सीधा नुकसान.
  • फर्नीचर घोटाला: 9 करोड़ का फर्नीचर खरीदा गया, लेकिन अधिकांश का कोई अस्तित्व नहीं. 30 हजार के पर्दे, 25 हजार की कुर्सियां, 2.5 लाख की डाइनिंग टेबल जैसी खरीद.
  • केमिस्ट्री लैब घोटाला: 12 करोड़ का टेंडर एक पहले से पंजीकृत निजी संस्था के नाम पर, जांच में पूरा मामला फर्जी.
  • पुस्तक खरीद घोटाला: 1.5 करोड़ की पाठ्यक्रम से असंबंधित किताबें खरीदी गईं, 10 करोड़ की अन्य खरीद में भी अनियमितताएं.
  • उत्तर पुस्तिका घोटाला: घटिया गुणवत्ता की कॉपियों पर 1.5 करोड़ का भुगतान.
  • संविदा भर्ती में धांधली: योग्यता के विपरीत 14 बाहरी संविदा शिक्षकों की नियुक्ति.
  • पीएचडी प्रवेश घोटाला: 50 से अधिक छात्रों को बिना गाइड प्रवेश, फीस वसूली, कोर्स अब तक अधूरा.
  • 65 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों की नियुक्ति: नियमों के विरुद्ध पुनर्नियुक्तियां.
  • फर्जी बिल और भुगतान: फर्जी फर्मों के नाम पर करोड़ों के भुगतान.