बृज यूनिवर्सिटी : निलंबित कुलपति रमेश चंद्रा पद से हटाए गए, तीन भ्रष्ट कर्मचारियों पर कार्रवाई का इंतजार
महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय भरतपुर के निलंबित कुलपति के खिलाफ राज्यपाल की बड़ी कार्रवाई. जानिए पूरा मामला...

Published : November 11, 2025 at 9:46 PM IST
भरतपुर: बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर में लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक विवाद और भ्रष्टाचार के आरोपों पर आखिरकार निर्णायक कार्रवाई हुई है. राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने निलंबित कुलपति प्रो. रमेश चंद्रा को पद से हटा दिया है. वहीं, जांच में संलिप्त पाए गए तीन भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई अब तक लंबित है.
निधियों के दुरुपयोग के प्रमाण : राज्यपाल सचिवालय से जारी आदेशों में कहा गया है कि प्रो. रमेश चंद्रा के विरुद्ध विश्वविद्यालय अधिनियम एवं परिनियमों की पालना न करने, विश्वविद्यालय संसाधनों एवं निधियों का दुरुपयोग करने, नियमों के विपरीत अनियमित भुगतान करने और वित्तीय प्रावधानों का उल्लंघन कर विश्वविद्यालय को आर्थिक हानि पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप प्रमाणित पाए गए हैं.
पढ़ें : बृज यूनिवर्सिटी : निलंबित पूर्व कुलपति व उप कुलसचिव, एआर, परीक्षा नियंत्रक दोषी, FIR व वसूली के आदेश
राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि प्रो. चंद्रा को युक्तियुक्त व्यक्तिशः सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत प्रत्युत्तर और दस्तावेजों के परीक्षण में यह पाया गया कि उन्होंने विश्वविद्यालय अधिनियम के उपबंधों को जानबूझकर नजरअंदाज करते हुए अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किया है. इसके आधार पर राज्यपाल ने कुलाधिपति शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रो. रमेश चंद्रा को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने के आदेश दिए.
तीन भ्रष्ट कर्मचारियों पर कार्रवाई का इंतजार : इसी मामले में 3 नवंबर 2025 को उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने आदेश जारी कर विश्वविद्यालय के भ्रष्ट उपकुलसचिव डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय, सहायक कुलसचिव प्रशांत कुमार और परीक्षा नियंत्रक एवं तत्कालीन एडीओ फरवट सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, निलंबित करने और वित्तीय वसूली करने की अनुशंसा की थी.
पढे़ं : 25 लाख कैश चोरी से लेकर 12 करोड़ की लैब तक, बृज विश्वविद्यालय में फर्जीवाड़े का साम्राज्य
आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि इन चारों प्रो. रमेश चंद्रा, डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय, प्रशांत कुमार, और फरवट सिंह से अनियमित भुगतान और वित्तीय गड़बड़ियों से हुई राशि की वसूली की जाए और कार्रवाई कर उच्च शिक्षा विभाग को शीघ्र अवगत कराया जाए. जिसमें अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

