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हरियाणा में युवा से लेकर बुजुर्गों तक में बढ़ा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, गोल्डन विंडो पीरियड में बच सकती है जान, ऐसे पहचाने शुरुआती लक्षण

हरियाणा में ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक के केसेज इन दिनों बढ़े हैं. आईए जानते हैं इसके शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय...

Brain Hemorrhage Haryana
ब्रेन स्ट्रोक का खतरा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 26, 2026 at 12:04 PM IST

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पंचकूला: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सलमान खान के पिता सलीम खान गत मंगलवार को ब्रेन हेमरेज होने से उपचाराधीन हैं. ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक के मामलों को लेकर कमोबेश देश भर में चिंताजनक स्थिति है. एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार बीते वर्षों में इन मामलों में वृद्धि देखी गई है.

युवा-बुजुर्गों तक में बढ़ा खतरा: बुजुर्गों समेत युवाओं में भी ब्रेन हेमरेज व स्ट्रोक के मामलों ने तेजी पकड़ी है. विशेषज्ञ डॉक्टर इसका कारण उच्च रक्त्चाप, तनाव और खराब जीवनशैली (सेकेंडरी लाइफस्टाइल) को मानते हैं. लेकिन इससे बचाव के उपाय क्या हैं? स्थायी खतरे से बचाव कैसे किया जाए? इस संबंध में ईटीवी भारत ने पंचकूला के जिला अस्पताल के मेडिसन के डॉ. गिरीश बंसल से बातचीत की.

हरियाणा में युवा से लेकर बुजुर्गों तक में बढ़ा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा (ETV Bharat)

आपात स्थिति में तुरंत उपचार कराएं: ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान डॉ. गिरीश बंसल ने कहा कि, "ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक, दोनों की आपातकालीन स्थितियां हैं. ऐसे में किसी प्रकार का कोई लक्षण महसूस होता है तो तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर उपचार लें, क्योंकि शुरूआती तीन घंटे अत्याधिक महत्वपूर्ण होते हैं." उन्होंने शुरूआती तीन घंटों को गोल्डन विंडो पीरियड बताते हुए कहा कि, "तुरंत इलाज मिलने पर स्थायी खतरे से बचाव (रिकवरी) के 90 प्रतिशत से भी अधिक चांस रहते हैं. मरीज के अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर तुरंत सीटी स्कैन या एमआरआई करके स्ट्रोक का प्रकार पता लगाते हैं."

जिला पंचकूला की स्थिति: डॉ. गिरीश बंसल की मानें तो जिला अस्पताल, पंचकूला के पीएमओ डॉ. आरएस चौहान ने बताया कि जिला पंचकूला में वर्ष 2025 में स्ट्रोक के कुल 148 मामले सामने आए थे. जबकि जनवरी 2026 में कुल 13 मामले सामने आ चुके हैं, जो सिलसिला जारी है.

सरकार से एक लाख रुपये का टीका मुफ्त: डॉक्टर गिरीश ने बताया कि, "सीटी स्कैन और एमआरआई में स्ट्रोक का प्रकार पता लगने के बाद तुरंत ईलाज दिया जाता है. यदि इस्केमिक स्ट्रोक यानि दिमाग की नस में खून का थक्का जम जाए तो ऐसी स्थिति में सरकार की ओर से मरीज को एक लाख रुपये की कीमत का टीका मुफ्त लगाया जाता है. साथ ही आईसीयू ड्यूरेशन भी निशुल्क रहती है. शुरूआती तीन घंटों के भीतर मरीज को उपचार दिलाने पर टीका और आईसीयू ड्यूरेशन सुविधा निशुल्क रहती है. इससे मरीज को बड़ी क्षति पहुंचने से बचाव होता है. हालांकि, ब्रेन हेमरेज होने पर दिमाग की नस फट जाती है और खून बहने लगता है."

ऐसे पहचानें लक्षण: डॉक्टर गिरीश ने बताया, "अर्धरंग की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है. इसके कई प्रकार के लक्षण हैं, जिनमें एक बाजू व एक हाथ का बेजान होना, कुछ मरीज बोल नहीं पाते. ऐसे में मरीजों को तुरंत अस्पताल लाया जाना चाहिए और एमआरआई स्कैन करवा कर कारण पता लगाएं. इससे पता लग सकेगा कि मरीज पर खतरा क्लॉट के कारण है या फिर ब्लिडिंग के कारण. यदि किसी मरीक को हाथ-पांव में कमजोरी लग रही है, बोलने में मुश्किल जान पड़ रही है तो तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचे और स्कैन करवाकर डॉक्टर से परामर्श लें."

सेकेंडरी लाइफस्टाइल छोड़ें: डॉ. गिरीश बंसल ने लोगों में ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक के मामलों में तेजी का कारण बिगड़ती जीवनशैली (सेकेंडरी लाइफस्टाइल) को बताया. उन्होंने कहा कि, "अधिक धूम्रपान, एल्कोहल का सेवन, गलत खान-पान से केलेस्ट्रोल का अनियंत्रित होना और सेहत के प्रति जागरूक न होने के कारण यह मामले बढ़ रहे हैं. यदि नियमित व्यायाम किया जाए और हर छह महीने में ब्लड टेस्ट कराया जाए तो रिपोर्ट के आधार पर सामने आई कमियों को दूर करने के प्रयास से शारीरक समस्याओं से राहत मिलेगी. चालीस से कम आयु के लोगों को सेकेंडरी लाइफ्स्टाइल (स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, तला हुआ खानपान) में सुधार करना जरूरी है. लेकिन यदि आयु चालीस वर्ष से अधिक है और उच्च रक्तचाव और शुगर से ग्रस्त हैं तो संबंधित दवाई समय से लेकर उसे नियंत्रित करना सुनिश्चित करें."

बुजर्ग सुबह खाली पेट सैर न करें: डॉ. गिरीश बंसल ने कहा कि, "चालीस-पचास वर्ष से अधिक आयु के लोग सुबह के समय खाली पेट सैर न करें. इनके लिए सुबह का खाना खाने के बाद ही सैर करना अधिक उचित है. यदि किन्हीं लोगों को पीठ में दर्द है तो केवल वॉक या जॉगिंग न कर योगा या प्राणायाम किया जा सकता है. ऑर्थोपेडिक सर्जन से परामर्श लेकर फिट रहें, क्योंकि सवाल फिट रहने का है. ऐसे में खानपान संतुलित रखें, रोजाना व्यायाम करें और सेकेंडरी लाइफस्टाइल को अपनाएं."

इन लक्षणों को तुरंत पहचानें:

  • चेहरा टेढ़ा होना.
  • एक हाथ या पैर में कमजोरी/सुन्न होना.
  • बोलने में दिक्कत, शब्द साफ नहीं सुनना.

यह सावधानी अपनाएं:

  • ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचे या एम्बुलैंस बुलाएं या स्थानीय हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें.
  • मरीज को सीधा लिटाएं, सिर थोड़ा ऊंचा रखें.
  • तंग कपड़ों को ढीला करें.
  • मरीज को कुछ भी खाने-पीने को न दें.
  • ब्रेन हेमरेज का शक होने पर खुद कोई दवाई न दें.
  • लक्षण शुरू होने का समय जरूर नोट करें, क्योंकि डॉक्टर के लिए समय जानना बहुत जरूरी रहता है.

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