साधारण परिवार से आने वाली समरीन फातिमा ने BPSC में लहराया परचम, SDM के लिए हुई चयनित
70वीं बीपीएससी में कई अभ्यर्थियों ने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है. समरीन फातिमा भी उनमें से एक हैं. पढ़ें खबर

Published : June 24, 2026 at 3:20 PM IST
अररिया : अररिया जिले के डेहटी गांव की बेटी समरीन फातिमा ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) पद पर चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया है. उनकी इस उपलब्धि से परिवार, गांव और पूरे जिले में खुशी एवं गर्व का माहौल है. उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार का सपना पूरा किया बल्कि पूरे जिले का मान भी बढ़ाया है. समरीन की सफलता आज अररिया जिले की बेटियों के लिए प्रेरणा की कहानी बन चुकी है.
ग्रामीण परिवेश से निकलकर अपनी जगह बनायी : साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाली समरीन ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह मुकाम हासिल किया है. उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश से आने वाली बेटियां भी बड़े सपनों को साकार कर सकती हैं. कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अध्ययन के बल पर समरीन ने बीपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल कर SDM का पद प्राप्त किया.
'लक्ष्य तय रखें और मेहनत करते रहें' : बीपीएससी में सफलता हासिल करने वाली समरीन फातिमा ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए कहा कि छोटे से गांव से निकलकर प्रशासनिक सेवा में जाना आसान नहीं होता. हालांकि अगर लक्ष्य तय हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो सफलता जरूर मिलती है. उन्होंने बताया कि सिमुलतला विद्यालय से ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था.

''तैयारी के दौरान एक रूटीन बनाकर नियमित रूप से अध्ययन किया. इस पूरे सफर में परिवार का भरपूर सहयोग मिला. खासकर माता-पिता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया. सामान्य दिनों में वह 6 से 7 घंटे तक पढ़ाई करती थीं, जबकि परीक्षा के समय 13 घंटे तक मेहनत की.''- समरीन फातिमा, बीपीएससी में उत्तीर्ण अभ्यर्थी
असफल होने पर भी नहीं मानी हार : समरीन फातिमा ने प्रशासनिक सेवा में जाने की इच्छा रखने वाली लड़कियों को संदेश देते हुए कहा कि मेहनत के साथ धैर्य रखना बहुत जरूरी है. सफलता पाने में समय लगा. 69वीं बीपीएससी में उन्होंने इंटरव्यू दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद भी उन्होंने प्रयास जारी रखा और 70वीं बीपीएससी में उन्हें सफलता हासिल हुई.
बेटी की सफलता पर पिता गर्वान्वित : समरीन फातिमा की सफलता पर उनके पिता मो. इम्तियाज आलम ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी बेटी काफी लगन और मेहनत के साथ तैयारी कर रही थी. उन्हें पूरा विश्वास था कि उसकी मेहनत एक दिन जरूर रंग लाएगी. बेटी की पढ़ाई के प्रति गंभीरता, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें भरोसा था कि वह सफलता हासिल करेगी.
'बच्चों को समय और साथ देना बहुत जरूरी' : समरीन फातिमा की सफलता पर उनकी मां नौशवा खातून ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बच्चों को समय देना और उनका साथ देना बहुत जरूरी होता है. माता-पिता का सहयोग और बच्चों की मेहनत मिलकर सफलता की राह आसान बनाती है. समरीन की लगन और मेहनत काफी थी, इसी का नतीजा है कि आज उसने प्रशासनिक सेवा में सफलता हासिल की है.
''मुझे अपने बच्चों से हमेशा बहुत उम्मीद थी. मैं अपने बच्चों को समय देती थी. उनकी भावनाओं को समझती थीं और जरूरत के अनुसार उन्हें सही दिशा देने का प्रयास करती थीं.''- नौशवा खातून, समरीन फातिमा की मां
गांव से लेकर PU तक में पढ़ाई : समरीन की प्रारंभिक शिक्षा उनके पैतृक गांव डेहटी में ही हुई. इसके बाद उनका चयन बिहार के प्रतिष्ठित सिमतुल्लाह आवासीय विद्यालय में हुआ, जहां उन्होंने छठी कक्षा से लेकर इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. विद्यालय में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री प्राप्त की और इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी.
बधाई देने वालों का लगा तांता : परिणाम घोषित होते ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. परिजनों, रिश्तेदारों, शिक्षकों और शुभचिंतकों ने मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया. क्षेत्र के लोगों का कहना है कि समरीन की सफलता उन छात्राओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल करने का सपना देखती हैं.
उज्ज्वल भविष्य की कामना : स्थानीय लोगों के अनुसार समरीन हमेशा से पढ़ाई के प्रति गंभीर और लक्ष्य के प्रति समर्पित रही हैं. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि मेहनत ईमानदारी से की जाए और लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जाए तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती. समरीन फातिमा की इस उपलब्धि पर जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है.
ये भी पढ़ें :-
3 प्रयास, 6 UPSC असफलताएं, फिर भी श्वेता ने हार नहीं मानी.. BPSC 70वीं में हासिल किया 85वां रैंक
मधुबाला ने BPSC किया क्रैक, लोगों ने स्टेशन पहुंचकर ढोल-नगाड़ों से किया स्वागत
बिहार के ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंकित और रिचा ने पास की बीपीएससी परीक्षा, बने राजस्व अधिकारी
SAIL में सीनियर मैनेजर.. अब बने SDM, अभिषेक कुमार को BPSC में मिली कामयाबी
भाई बना RDO और बहन बनी ADTO..आटा चक्की चलाकर पिता ने बदली परिवार की किस्मत
गंभीर बीमारी से लड़ते हुए प्रत्युष बने SDM, फादर्स-डे पर पिता को दिया BPSC में सफलता का तोहफा
सेल्फ स्टडी के दम पर सानिया कलीम ने BPSC में लहराया परचम, पहले ही प्रयास में बनीं DSP
दरभंगा की बेटी प्रिया यादव ने BPSC में मारी बाजी, 10वीं रैंक के साथ बनी SDM

