खान सर से समझिए, कैसे बीपीएससी 70वीं इंटरव्यू में बैठें और जवाब दें
बीपीएससी 70वीं इंटरव्यू की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. खान सर ने सफलता के अहम मंत्र दिए. पढ़ें खबर

Published : January 9, 2026 at 2:19 PM IST
पटना : बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के तहत इंटरव्यू प्रक्रिया 21 जनवरी से शुरू होकर 28 फरवरी तक चलेगी. आयोग ने इंटरव्यू के लिए दो शिफ्ट तय की है. प्रत्येक शिफ्ट में 48 अभ्यर्थियों को बुलाया जाएगा, यानी एक दिन में कुल 96 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार आयोग कार्यालय में होगा. यह इंटरव्यू 120 अंकों का होगा, जो अंतिम मेरिट में निर्णायक भूमिका निभाएगा.
5401 अभ्यर्थी होंगे शामिल : बीपीएससी 70वीं की मेंस परीक्षा में सफल कुल 5401 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चयनित किया गया है. इन अभ्यर्थियों के बीच 2035 पदों पर नियुक्ति के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है. ऐसे में इंटरव्यू राउंड अभ्यर्थियों के लिए बेहद अहम हो गया है, क्योंकि लिखित परीक्षा के बाद यही अंतिम पड़ाव है, जहां से चयन या असफलता का फैसला होगा.
कम समय में बड़ी चुनौती : इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है. अधिकतर अभ्यर्थी मेंस परीक्षा के बाद मानसिक रूप से थोड़ा रिलैक्स करते हैं, लेकिन इस बार समय की कमी उन्हें अतिरिक्त दबाव में डाल रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरव्यू की तैयारी लिखित परीक्षा से बिल्कुल अलग होती है और इसमें रणनीति, सोच और व्यक्तित्व की भूमिका ज्यादा होती है.

खान सर की अहम सलाह : बीपीएससी समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले चर्चित शिक्षक खान सर ने इंटरव्यू की तैयारी को लेकर अभ्यर्थियों को महत्वपूर्ण टिप्स दिए हैं. उन्होंने कहा कि इंटरव्यू में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को 10 से 15 दिनों के इंटरव्यू राउंडअप कोर्स में जरूर शामिल होना चाहिए. ऐसे कोर्स उनके यहां भी चल रहे हैं, कई शिक्षक भी चला रहे हैं. इससे अभ्यर्थी को इंटरव्यू की वास्तविक स्थिति का अनुभव मिलेगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा.
इंटरव्यू हर अभ्यर्थी के लिए अलग : खान सर ने स्पष्ट किया कि इंटरव्यू प्रीलिम्स या मेंस परीक्षा की तरह नहीं होता, जहां एक ही पैटर्न सभी पर लागू हो. सिविल सर्विसेज और बीपीएससी जैसे इंटरव्यू में बोर्ड हर अभ्यर्थी से उसकी पृष्ठभूमि, सोच और व्यक्तित्व के अनुसार अलग सवाल करता है. हर व्यक्ति की सोच, विचारधारा और आदर्श अलग होते हैं, इसलिए उत्तर भी उसी अनुरूप होने चाहिए. इंटरव्यू में बोर्ड अभ्यर्थी के कार्य करने और निर्णय लेने की क्षमता का विशेष मूल्यांकन करता है.
''इंटरव्यू में कई बार अभ्यर्थी किसी सवाल में फंस जाते हैं और अपने उत्तर को जबरन सही साबित करने की कोशिश करते हैं. यह इंटरव्यू में सबसे बड़ी गलती मानी जाती है. अगर किसी विषय की जानकारी नहीं है, तो उसे विनम्रता से स्वीकार करना ज्यादा बेहतर होता है. बोर्ड को यह दिखता है कि अभ्यर्थी ईमानदार है और अपनी सीमाओं को समझता है.''- खान सर, शिक्षाविद्
बॉडी लैंग्वेज और कॉन्फिडेंस : खान सर ने अभ्यर्थियों को बॉडी लैंग्वेज पर खास ध्यान देने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इंटरव्यू में कॉन्फिडेंस दिखना चाहिए, लेकिन यह ओवर कॉन्फिडेंस में नहीं बदलना चाहिए. बैठने का तरीका, आंखों का संपर्क, जवाब देने की गति और चेहरे के हावभाव से बोर्ड अभ्यर्थी के व्यक्तित्व का आंकलन करता है.
समसामयिक विषयों की जानकारी अनिवार्य : इंटरव्यू की तैयारी में करंट अफेयर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. खान सर ने कहा कि अभ्यर्थियों को देश और दुनिया में चल रहे समकालीन विषयों की जानकारी जरूर होनी चाहिए. चाहे वेनेजुएला में चल रही राजनीतिक स्थिति हो या बिहार सरकार की वर्तमान योजनाएं, इन पर स्पष्ट और संतुलित राय होनी चाहिए.
आदर्शों पर सवाल और जवाब : खान सर ने कहा कि इंटरव्यू बोर्ड अक्सर अभ्यर्थियों से उनके आदर्शों के बारे में सवाल करता है. ऐसे में अभ्यर्थी को सिर्फ नाम बताने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्हें यह भी स्पष्ट करना होता है कि वह आदर्श उनके जीवन में क्यों महत्वपूर्ण है और समाज को उससे क्या लाभ हो सकता है. बिना जानकारी के किसी बड़े नाम का उल्लेख करना नुकसानदायक साबित हो सकता है.
''अभ्यर्थी को अपने राज्य और क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक संरचना की जानकारी होनी चाहिए. बीपीएससी जैसे राज्य स्तरीय इंटरव्यू में बोर्ड यह देखना चाहता है कि अभ्यर्थी जमीनी स्तर पर समाज को कितना समझता है और प्रशासनिक भूमिका में वह स्थानीय जरूरतों को कैसे संभालेगा.''- खान सर, शिक्षाविद्
10 से 15 मिनट में खुद को साबित करना : 120 अंकों के इंटरव्यू में बोर्ड प्रत्येक अभ्यर्थी को लगभग 10 से 15 मिनट का समय देता है. इतने कम समय में अभ्यर्थी को अपने ज्ञान, सोच और संतुलन का परिचय देना होता है. खान सर ने कहा कि जिन सवालों के जवाब आते हैं, उन्हें सरल और सीधे शब्दों में देना चाहिए और जिनका उत्तर नहीं आता, उन्हें विनम्रता से छोड़ देना चाहिए.
विचारधारा में लचीलापन जरूरी : खान सर के अनुसार, इंटरव्यू में अभ्यर्थी की विचारधारा रूढ़िवादी नहीं होनी चाहिए. बोर्ड ऐसे अभ्यर्थी को प्राथमिकता देता है जो नई सोच को स्वीकार करने वाला हो और बदलते समय के अनुसार निर्णय ले सके.
''अभ्यर्थी को यह भी दिखाना होता है कि वह अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं से ऊपर उठकर निष्पक्ष और व्यावहारिक फैसले ले सकता है. कई बार बोर्ड यह भी जानने की कोशिश करता है कि सरकार कोई निर्णय लेती है जिससे अभ्यर्थी की व्यक्तिगत सहमति नहीं है, लेकिन फिर भी उसे कैसे जमीन पर लागू करता है.''- खान सर, शिक्षाविद्
मौलिक अधिकार और कर्तव्य की समझ : उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में जाने वाले अभ्यर्थी को संविधान के मौलिक अधिकार और कर्तव्यों की बुनियादी जानकारी जरूर होनी चाहिए. इंटरव्यू में कई बार ऐसे सवाल पूछे जाते हैं, जिनसे यह परखा जाता है कि अभ्यर्थी कानून, नैतिकता और सामाजिक संतुलन को कैसे देखता है. कुल मिलाकर इंटरव्यू में सफलता के लिए ज्ञान के साथ संतुलन, विनम्रता और आत्मविश्वास जरूरी है.
खान सर का मानना है कि जो अभ्यर्थी खुद को स्वाभाविक रूप में बोर्ड के सामने प्रस्तुत करता है, वही इस अंतिम चरण में बेहतर प्रदर्शन कर पाता है.
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