गयाजी में 150 से 200 साल पुराने डाक टिकटों की प्रदर्शनी, यहां दिखी इतिहास-संस्कृति की झलक
गया में डाक टिकटों की लगी अनोखी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, देश ही नहीं विदेशों के भी डाक टिकटों का संग्रह, उमड़ी भीड़

Published : February 21, 2026 at 9:20 PM IST
गया: बिहार के गया जी में डाक टिकट प्रदर्शनी का 20 फरवरी को शुभारंभ हुआ. बोधिपेक्स 2026 नाम से शुरू हुआ यह कार्यक्रम दो दिनों तक चलेगा. डाक टिकट संग्रहण प्रदर्शनी (फिलेटली) के माध्यम से नई पीढ़ी में इतिहास, कला संस्कृति, राष्ट्र निर्माण के प्रति समझ और जागरूकता विकसित करना इसका मकसद है. शुभारंभ मुख्य डाक महाध्यक्ष बिहार परिमंडल एमयू अब्दाल्ली के द्वारा किया गया. अनोखे व दुर्लभ टिकट प्रदर्शनी को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है.
डाक टिकट प्रदर्शनी में दिखे सजीव दस्तावेज : डाक टिकट प्रदर्शनी में कई दुर्लभ और अनोखे टिकटों का संग्रह देखने को मिल रहा है. मुख्य डाक महाध्यक्ष एम यू अब्दाल्ली ने बताया कि, ''डाक टिकट केवल पत्र-प्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक उपलब्धियां महापुरुषों और महत्वपूर्ण घटनाओं का सजीव दस्तावेज है. डाक टिकट प्रदर्शनी में विभिन विषयों पर आधारित दुर्लभ एवं आकर्षक डाक टिकटों, विशेष आवरणों एवं थीमैटीक संग्रहों का प्रभावशाली प्रदर्शन है.''

भारतीय संस्कृति और इतिहास से जुड़े डाक टिकट आकर्षण का केंद्र : डाक टिकट प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय संस्कृति, वन्य जीवन विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा अध्यात्मिक धरोहर जैसे विषय विशेष आकर्षण का केंद्र रहे. ग्वालियर स्टेट का 1893 का ब्रिटिश कालीन डाक टिकट भी यहां प्रदर्शित किया गया. इसके अलावा, भारत के प्रमुख मेडिसिनल प्लांट के टिकट भी दिखे. वहीं, महात्मा गांधी को अश्वेत होने के कारण जब ट्रेन से उतार गया था, तो उसका भी डाक टिकट इस प्रदर्शनी में सजाया गया. जबकि भगवान कृष्ण अर्जुन समेत अन्य देवी-देवताओं के नाम पर जारी किए गए डाक टिकट आकर्षण का केंद्र रहे.

विदेशों के डाक टिकट यहां शोकेस किए गए : इसके अलावा अप्सरा का डाक टिकट, प्राचीन पोस्ट वाले डाक टिकट, विक्टोरिया का पोस्टकार्ड टिकट, जॉर्ज पंचम का टिकट, मधुबनी आर्ट का टिकट समेत मलेशिया, थाईलैंड के डाक टिकट भी यहां शोकेस किए गए.
फिलेटली को पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा : प्रदर्शनी में बेस्ट डाक टिकट संग्रह करने वाले फिलेटली को पुरस्कार भी दिया जाएगा. इस प्रदर्शनी में 20 से 22 फिलेटली का भी डाक टिकट संग्रह किया गया है. इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का संचालन गया मंडल के वरिष्ठ डाक अधीक्षक अंशुमान के मार्गदर्शन में किया गया.

1850 के बाद का डाक टिकट मौजूद : डाक विभाग के द्वारा बोधपेक्स' डाक टिकट प्रदर्शनी में न केवल स्थानीय बल्कि राज्य भर के संग्रहकर्ताओं ने अपने दुर्लभ डाक टिकटों का प्रदर्शन किया है, खासकर मगध के गया और जहानाबाद जिले के संग्रहीत कर्ताओं ने इसमें हिस्सा लिया. इस प्रदर्शनी में लगभग 150 से अधिक वर्ष पुरानी डाक टिकट को प्रदर्शित किया गया.

वहीं सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ पोस्ट के अधिकारी अंशुमन ने बताया कि इस प्रदर्शनी में भारतीय सिनेमा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, प्रेम और सुंदरता जैसे कई विषयों पर आधारित डाक टिकट लगाए गए हैं. इधर, डाक टिकट देखने आए लोगों ने बताया कि यहां आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा. साथ ही देश-विदेश के साथ अपने सांस्कृतिक संबंधों के बारे में जानने को मिला.
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