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खूंटी में भी बगैर लाइसेंस चल रहा ब्लड बैंक, रोजाना 10 यूनिट ब्लड की है खपत

खूंटी सदर अस्पताल के भी ब्लड बैंक का लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है. रोज लोगों को ब्लड की जरूरत होती है.

Khunti Blood Bank
ब्लड बैंक सदर अस्पताल, खूंटी (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : November 2, 2025 at 10:13 AM IST

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Updated : November 2, 2025 at 10:48 AM IST

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खूंटीः चाईबासा के सदर अस्पताल में एचआईवी संक्रमित खून थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को चढ़ाने के बाद पूरे राज्य के स्वास्थ्य सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. सरकार के निर्देश पर जांच की जा रही है. बावजूद इसके खूंटी जिले में भी सदर अस्पताल में बगैर लाइसेंस के ब्लड बैंक संचालित हो रहा है. हालांकि सिविल सर्जन ने रिन्युअल के लिए आवेदन करने का दावा किया है. उनका कहना है कि सरकार के स्तर से ही अबतक रिन्युअल नहीं हो सका है, लेकिन जल्द ही होने की संभावना है.

खूंटी में खून की कमी के मामले सबसे अधिक

आदिवासी बहुल खूंटी जिले में 65 से अधिक मरीज थैलेसीमिया और एनीमिया के चिन्हित किये गए हैं, जिसमें रोजाना 10 से अधिक यूनिट खून की खपत होती है. सबसे ज्यादा खून सिकलसेल, थैलेसीमिया और एनीमिया के मरीजों को दिया जाता है. उसके बाद गर्भवती महिलाएं एवं अन्य ऑपरेशन में खपत होता है. सिविल सर्जन के अनुसार, जिले में खून की कमी के मामले सबसे अधिक हैं और इस तरह के मरीज ज्यादातर अस्पताल पहुंचते हैं. इसके अलावा रोजाना 500 से अधिक मरीज मलेरिया, टाइफाइड, सर्दी-खांसी, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज सहित ब्रेनहैमरेज के शामिल हैं.

जानकारी देते सिविल सर्जन नागेश्वर मांझी (Etv Bharat)

ब्लड डोनेट करने वालों के खून की होती है जांच

सिविल सर्जन नागेश्वर मांझी ने बताया कि जिले के एकमात्र ब्लड बैंक में ब्लड रेफ्रिजरेटर में रखा जाता है. डोनेट करने वालों के ब्लड को टेस्टेड एवं अनटेस्टेड करके रख दिया जाता है, उसके बाद ही पूरी प्रक्रिया के तहत किसी मरीज को ब्लड दिया जाता है.

उन्होंने बताया कि ब्लड बैंक में किसी तरह के किट से नहीं बल्कि जो स्टैंडर्ड मशीन लगी हुई है उसमें ब्लड जांच की पूरी प्रक्रिया की जाती है. इस जांच के दौरान मलेरिया, एचआईवी, फाइलेरिया, हेपेटाइटिस A, B, तथा C, डायबिटीज सहित लगभग बीमारियों की जांच की जाती है. डोनेट करने वालों के ब्लड की जांच के साथ-साथ मरीजों के ब्लड की भी जांच होती है, जिनको ब्लड चढ़ाया जाना है. सिविल सर्जन ने बताया कि चाईबासा घटना के बाद जिले में स्वास्थ्य विभाग ने पूरी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है और मरीजों की जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया की जा रही है.

कुछ मरीजों में 5 ग्राम से लेकर 7 ग्राम ही खून रहता है

खूंटी में हर रोज मलेरिया, टाइफाइड, सर्दी खांसी और ब्लडप्रेशर, डायबिटीज सहित ब्रेन हेमरेज के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं. रोजाना 500 से अधिक मरीज सदर अस्पताल इलाज करने पहुंच रहे हैं जिसमें हाइपरटेंशन के मरीज भी शामिल हैं. जिले में खून की सबसे ज्यादा खपत ऑपरेशन, सिकलसेल एनीमिया, थैलेसीमिया के मरीजों को होती है. साथ ही एनिमिक मरीजों एवं गर्भवती महिलाओं को खून दिया जाता है. सिविल सर्जन ने खुलासा किया है कि जिले में खून की कमी के मरीजों की संख्या अधिक है. ज्यादातर मरीज ऐसे पाए जाते हैं जिनमें 5 ग्राम से लेकर सात ग्राम ही खून रहता है.

बगैर लाइसेंस के ही ब्लड बैंक संचालित हो रहा है

सदर अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस एक्सपायर है, लेकिन हर दिन जरूरतमंद लोगों को ब्लड सप्लाई किया जाता है. मामले पर सिविल सर्जन ने बताया कि लाइसेंस फरवरी से रिन्यूअल प्रोसेस में है. चालान काटकर ऑनलाइन सबमिट किया गया है और सरकार ने आश्वस्त किया है कि एक सप्ताह में लाइसेंस रिन्यूअल कर दिया जाएगा, फिलहाल बगैर लाइसेंस के ही ब्लड बैंक संचालित हो रहा है.

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Last Updated : November 2, 2025 at 10:48 AM IST