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चंडीगढ़ में ब्लड कलेक्शन 56 फीसदी बढ़ा और बर्बादी 188%, जानिए पीजीआई के डॉक्टर ने क्या कहा ?

चंडीगढ़ में ब्लड डोनेशन और कलेक्शन का आंकड़ा पिछले तीन साल में बढ़ा है, लेकिन ब्लड कंपोनेंट्स की बर्बादी भी बढ़ रही है.

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चंडीगढ़ में ब्लड कलेक्शन 56 फीसदी बढ़ा और बर्बादी 188% (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 12, 2026 at 6:16 PM IST

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Updated : August 12, 2026 at 6:36 PM IST

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चंडीगढ़: राज्यसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2023 से 2025 के बीच चंडीगढ़ में ब्लड कलेक्शन 56.29 फीसदी बढ़ा, जबकि बर्बाद हुए ब्लड कंपोनेंट्स की संख्या करीब 188 फीसदी बढ़ गई. चंडीगढ़ में ब्लड डोनेशन और कलेक्शन का आंकड़ा पिछले तीन साल में जरूर बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ब्लड कंपोनेंट्स की बर्बादी भी चिंता बढ़ाने वाली रफ्तार से बढ़ी है.

चंडीगढ़ में ब्लड डोनेशन और कलेक्शन का आंकड़ा बढ़ा: मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 2023 में चंडीगढ़ में 65,742 यूनिट ब्लड कलेक्ट हुआ था, जबकि उस साल 1,570 यूनिट ब्लड कंपोनेंट्स डिस्कार्ड किए गए. 2024 में कलेक्शन बढ़कर 1,04,428 यूनिट पहुंच गया और 3,852 यूनिट ब्लड कंपोनेंट्स बर्बाद हुए. वहीं 2025 में कलेक्शन 1,02,746 यूनिट रहा, लेकिन डिस्कार्ड होने वाले कंपोनेंट्स की संख्या बढ़कर 4,530 यूनिट पहुंच गई.

चंडीगढ़ में ब्लड कलेक्शन 56 फीसदी बढ़ा और बर्बादी 188% (ETV Bharat)

ब्लड कंपोनेंट्स के डिस्कार्ड की संख्या भी बढ़ी: तीन साल में ब्लड डोनेशन बढ़ने के बावजूद उसे पूरी तरह इस्तेमाल करने की चुनौती भी सामने आई है. मंत्रालय की ओर से ब्लड कंपोनेंट्स के डिस्कार्ड होने के पीछे तकनीकी और अन्य कारणों का उल्लेख किया गया है. आंकड़ों से ये भी सामने आया है कि ब्लड की बर्बादी सिर्फ एक्सपायरी की वजह से नहीं हो रही. 2023 में 1,570 यूनिट कंपोनेंट्स डिस्कार्ड हुए. 2024 में 477 यूनिट एक्सपायर हुए, जबकि 3,375 यूनिट अन्य तकनीकी कारणों से डिस्कार्ड किए गए. 2025 में एक्सपायरी के कारण 367 यूनिट और अन्य तकनीकी कारणों से 4,163 यूनिट ब्लड कंपोनेंट्स बर्बाद हुए.

चंडीगढ़ ब्लड बैंक में आधुनिक फ्रीजर की सुविधा मौजूद: चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टर रतीराम शर्मा ने बताया कि "ब्लड बैंक में आने वाला काफी हिस्सा स्वैच्छिक रक्तदान के जरिए मिलता है. रक्तदान के बाद ब्लड की जरूरी जांच की जाती है. अगर जांच में किसी तरह का संक्रमण या ऐसी समस्या सामने आती है, जिससे ब्लड सुरक्षित इस्तेमाल के लायक नहीं रहता, तो उसे अलग कर दिया जाता है. इसी प्रक्रिया में कुछ मात्रा में ब्लड खराब होने के बाद नष्ट करना पड़ता है. चंडीगढ़ के ब्लड बैंक से रोजाना करीब 300 यूनिट ब्लड पीजीआई और दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के इस्तेमाल के लिए भेजा जाता है. इसके अलावा अकेले मैटरनिटी ब्लॉक के लिए रोजाना करीब 50 यूनिट ब्लड की जरूरत होती है. ब्लड बैंक में आधुनिक फ्रीजर की सुविधा मौजूद है, जहां ब्लड, प्लाज्मा और सेल्स को तय मानकों और तापमान के अनुसार रखा जाता है. स्टोरेज की प्रक्रिया में भी निर्धारित मानकों का पालन किया जाता है."

मंत्रालय के आंकड़ों पर दी सफाई: हालांकि, राज्यसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से सामने आए आंकड़ों में चंडीगढ़ में ब्लड कंपोनेंट्स के डिस्कार्ड होने की संख्या में बढ़ोतरी दिखाई गई है. इस पर डॉक्टर रतीराम शर्मा ने कहा कि "मंत्रालय तक पहुंचने वाली रिपोर्ट ब्लड बैंक से सीधे नहीं जाती, बल्कि पूरी जानकारी तैयार कर स्टेट ब्लड बैंक डिपार्टमेंट को भेजी जाती है और वहां से आगे रिपोर्ट मंत्रालय तक पहुंचती है. ब्लड का खराब होने पर डिस्कार्ड किया जाना असामान्य बात नहीं है, लेकिन इसके पीछे अलग-अलग कारणों को समझना जरूरी है. ब्लड बैंक में आने वाले हर यूनिट की सुरक्षा जांच की जाती है और मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता. जो रिपोर्ट सामने आई है, वो सही नहीं है, क्योंकि अनफिट के बहुत से कारण हैं. ब्लड कलेक्शन के बाद टेस्ट किया जाता है. जो खराब मिलते हैं उन्हें डिस्कार्ड करना पड़ता है. इसमें केलकुलेशन गलत की गई है. ये ऑवरऑल ब्लड क्लेशन से होनी चाहिए थी. ना कि उन यूनिट से जो डिस्कार्ड या अनफिट हुई हैं."

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Last Updated : August 12, 2026 at 6:36 PM IST