'बिंदल खुद बोनाफाइड हिमाचली नहीं, हमें राम भक्ति का सर्टिफिकेट न दें भाजपा अध्यक्ष'
मंत्री ने राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ियों को गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : July 7, 2026 at 7:11 PM IST
शिमला: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है. मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ शिमला के ऐतिहासिक राम मंदिर पहुंचे लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के बयान पर जोरदार पलटवार किया. उन्होंने कहा कि उन्हें भगवान श्रीराम में आस्था साबित करने के लिए किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. बिंदल खुद "बोनाफाइड हिमाचली" नहीं हैं, इसलिए उन्हें राम भक्ति का सर्टिफिकेट देने का अधिकार नहीं है.
'हरियाणा से हिमाचल आए हैं बिंदल'
मीडिया से बातचीत में विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और उनकी श्रद्धा किसी राजनीतिक दल या नेता की मोहताज नहीं है. उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल हरियाणा से हिमाचल आए हैं और ऐसे में उन्हें हिमाचल के लोगों की आस्था पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा, "हमारी 122 पीढ़ियां हिमाचल में रही हैं. हमें कोई यह नहीं बताएगा कि राम भक्ति क्या होती है."
वीरभद्र सरकार के फैसले का किया जिक्र
विक्रमादित्य सिंह ने अपने पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने राजनीति से ऊपर उठकर धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया था. उन्होंने कहा कि उस समय ऐसा फैसला लेना आसान नहीं था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की भावनाओं का सम्मान करते हुए यह कदम उठाया. उन्होंने कहा कि भाजपा को दूसरों की आस्था पर सवाल उठाने से पहले अपना राजनीतिक आचरण देखना चाहिए.
SC के जज से हो मामले की जांच
लोक निर्माण मंत्री ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ियों को गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने मांग की कि मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके. उन्होंने कहा कि यदि भगवान श्रीराम के नाम पर किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
'जवाब देने से बच रही भाजपा'
विक्रमादित्य सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वर्षों तक भगवान श्रीराम के नाम पर राजनीति की और अब उन्हीं के नाम पर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना किसी कांग्रेस सरकार के दौरान सामने आती तो भाजपा देशभर में आंदोलन करती. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है, जबकि भाजपा इस मुद्दे पर जवाब देने से बच रही है.
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वह हिमाचल प्रदेश से इकलौते मंत्री थे जिन्हें अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिला था और उन्होंने स्वयं वहां जाकर दर्शन किए थे. उन्होंने कहा कि उनकी आस्था पर सवाल उठाना पूरी तरह अनुचित है. उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस भगवान श्रीराम का सम्मान करती है, लेकिन मंदिर के नाम पर किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी या भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को जनता के बीच भी रखा जाएगा.
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