बयान पर बवाल : राठौड़ बोले-बेनीवाल जैसे नेता राजनीति के लिए कलंक, नशेड़ी जैसी बोल रहे भाषा
राजस्थान में भीषण गर्मी ही नहीं, सियासी पारा भी चढ़ा है. आरएलपी सांसद बेनीवाल पर भड़के भाजपा अध्यक्ष.

Published : May 30, 2026 at 5:03 PM IST
जयपुर : राजस्थान में भीषण गर्मी के साथ राजनीतिक पारा भी गरम है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) प्रमुख एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल और भाजपा नेताओं के बीच जुबानी एवं सोशल मीडिया पर जंग और तेज हो गई. सोशल मीडिया से सड़कों तक दोनों पक्षों के समर्थक सक्रिय हैं. इसी बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बेनीवाल पर तीखा हमला बोला और उन्हें राजनीति के लिए 'कलंक' करार दिया. शनिवार को जयपुर आवास पर ईटीवी भारत से विशेष बातचीत में मदन राठौड़ ने बेनीवाल की राजनीतिक शैली, भाषा और बयानों पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, राजनीति में विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध की एक मर्यादा और गरिमा होती है. इसका पालन किया जाना चाहिए. नशेड़ी की तरह बयान का राजनीति में कोई स्थान नहीं है.
बेनीवाल की भाषा नशेड़ी जैसी : भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि उन्होंने राजनीति में इस तरह की भाषा और शब्दों का प्रयोग पहले कभी नहीं देखा. बेनीवाल के इस्तेमाल शब्द लोकतांत्रिक राजनीति की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं. नाराजगी और विरोध अपनी जगह सही हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में नेताओं को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि बेनीवाल की भाषा ऐसी हो गई, जिसे समाज का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति स्वीकार नहीं कर सकता. बेनीवाल नशेड़ी जैसी भाषा बोल रहे हैं. राजनीतिक मतभेद होने चाहिए, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत दुश्मनी का रूप नहीं दिया जाना चाहिए. नेताओं के बीच इतना सम्मान अवश्य बना रहना चाहिए कि वे आमने-सामने मिलने पर सहज महसूस कर सकें. राठौड़ ने कहा, राजनीति में विरोध विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध की मर्यादा और गरिमा होती है. इसकी पालना की जानी चाहिए, लेकिन बेनीवाल जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, ऐसे राजनेता राजनीति के लिए कलंक है.
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युवा पीढ़ी को गलत दिशा में ले जा रहे : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बेनीवाल युवाओं को गलत संदेश दे रहे हैं. कोई जनप्रतिनिधि लोगों को बिजली-पानी के बिल नहीं भरने या कानून की अवहेलना को उकसाता है तो यह लोकतंत्र के लिए उचित नहीं माना जा सकता. सांसद और मंत्री संविधान की शपथ लेते हैं और उन्हें कानून तथा व्यवस्था के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए. जनता को नियमों की अवहेलना के लिए प्रोत्साहित करना किसी भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के लिए शोभा नहीं देता. उनका आरोप था कि इस प्रकार की राजनीति से युवाओं में गलत संदेश जाता है. सामाजिक व्यवस्था प्रभावित होती है. बेनीवाल युवा को बर्बाद कर रहे हैं. युवा पीढ़ी को भटका रहे है. प्रदेश की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी.
विवादित बयान पर मंत्री का बचाव : राठौड़ ने हाल में चर्चा में आए सहकारिता मंत्री गौतम दक के विवादित बयान को लेकर कहा, इस मामले में संबंधित मंत्री से फोन पर बात की थी. मंत्री ने बताया कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया है. संबंधित मंत्री का व्यक्तित्व और व्यवहार हमेशा गरिमापूर्ण रहा है. उन्हें नहीं लगता कि जानबूझकर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी की होगी. किसी की भावनाएं आहत हुई है तो मंत्री माफी मांगने को भी तैयार हैं. इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा नेतृत्व संवाद और समाधान के पक्ष में है.
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भाजपा में विरोध की भी मर्यादा है : राठौड़ ने कहा, भाजपा में राजनीतिक विरोध को हमेशा लोकतांत्रिक और मर्यादित तरीके से व्यक्त किया जाता है. विपक्ष का दायित्व सरकार की कमियां उजागर करना और जन मुद्दे उठाना है. भाजपा भी विपक्ष की आलोचनाओं को सुनती है, लेकिन आलोचना और कटुता में अंतर होना चाहिए. राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए. सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है.
विरोध प्रदर्शन नहीं, हमला था :बेनीवाल समर्थकों के विरोध प्रदर्शन पर राठौड़ बोले, एक कार्यक्रम में जाते समय कुछ लोगों ने उनका विरोध किया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी. जब वे कार्यक्रम स्थल के निकट पहुंचे तो पुलिसकर्मी अचानक सक्रिय हो गए. उन्हें स्थिति संदिग्ध लगी और बाद में पता चला कि कुछ लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारी डंडे लेकर आए थे. उनका व्यवहार आक्रामक प्रतीत हो रहा था. सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वाहन से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी. एहतियातन रोके रखा. ऐसा लग रहा था वो किसी हमले की फिराक में थे. पुलिस ने समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया. प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया. इसके बाद वे अपने निर्धारित कार्यक्रम में शामिल हुए.
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राजनीति में हिंसा और दुश्मनी की जगह नहीं: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन हर नागरिक और राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होना चाहिए. किसी प्रकार की हिंसा, धमकी या व्यक्तिगत हमले, लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं. राजनीति में विचारों की लड़ाई होनी चाहिए, व्यक्तियों की नहीं. राजनीति शब्दों के चयन और विरोध के अपने तरीके है, लेकिन हनुमान बेनीवाल जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, वो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है.
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