ETV Bharat / state

MMDR अधिनियम पर झामुमो सहित विपक्षी पार्टियां भ्रम न फैलाएं- बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू

रांची में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2026 को लेकर झामुमो पर निशाना साधा है.

BJP state president Aditya Sahu targeted JMM over MMDR Act In Ranchi
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : August 20, 2026 at 8:39 PM IST

7 Min Read
Choose ETV Bharat

रांचीः MMDR संशोधन अधिनियम 2026 पर झामुमो सहित अन्य विपक्षी पार्टियों द्वारा आक्रामक रुख अपनाए जाने पर भाजपा ने पलटवार किया है.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने JMM सहित विपक्षी पार्टियों द्वारा खनिज संशोधन संशोधन अधिनियम के विरोध को केवल राजनीतिक ड्रामा करार दिया है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाये जा रहे MMDR संशोधन अधिनियम का उद्देश्य राज्य का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, समानता, निवेश और विकास को गति देना है यह अधिनियम देश के खनन क्षेत्र को अधिक कुशल, अनुकूल निवेश और महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत पूरी करने के उद्देश्य से लाया गया है. यह संशोधन केवल झारखंड के लिए नहीं है बल्कि पूरे देश के संदर्भ में किया गया है.

उन्होंने कहा कि झामुमो के आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी की धमकी देकर राज्य में विकास की रफ्तार रोकना चाहती है. केंद्र की जनहितकारी नीतियों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय जेएमएम को विकास, पारदर्शिता और रोजगार के मुद्दे पर जवाब देना चाहिए. झारखंड की जनता अब इस राजनीति को पूरी तरह समझ चुकी है. झारखंड सरकार और झामुमो जितनी ऊर्जा एवं ताकत इस अधिनियम पर राज्य वासियों को भ्रमित करने पर खपत कर रही है उतनी ऊर्जा खनिजों के अवैध खनन और इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने में लगाती तो राज्य का कायाकल्प हो जाता.

अधिनियम का उद्देश्य राज्यों का खनन राजस्व छीनना कतई नहीं- आदित्य साहू

आदित्य साहू ने कहा कि खनिज संशोधन अधिनियम को लेकर झामुमो सहित विपक्ष की सारी आशंका एवं आरोप, बेबुनियाद और निराधार हैं. अधिनियम का उद्देश्य राज्यों का खनन राजस्व छीनना कतई नहीं है. अधिनियम को लेकर झारखंड सरकार और विपक्ष का आरोप कि राज्यों का खनिज राजस्व छिन जाएगा, पूरी तरह निराधार है.

राज्यों को खनिज राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलता रहेगा लेकिन कोई भी राज्य मनमाने ढंग से लगातार बढ़ते उपकर के जरिए पूरे खनन उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता खत्म नहीं कर सकता. रॉयल्टी, डीएमएफ, नीलामी प्रीमियम, एनएमईटी और जीएसटी में राज्यों की हिस्सेदारी यथावत रहेगी तथा खनन क्षेत्र से होने वाले भुगतानों का लगभग 90 प्रतिशत राज्यों को प्राप्त होता रहेगा.

लघु खनिजों पर राज्यों का नियंत्रण पूर्ववत रहेगा. बालू, गिट्टी और साधारण मिट्टी जैसे लघु खनिजों पर राज्य की वर्तमान शक्तियों पर इस अधिनियम का कोई प्रभाव नहीं होगा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा आदिवासी, दलित और पिछड़ों पर इस अधिनियम का असर पड़ने वाला बयान भ्रामक है. खनिज संपदा का पूरा लाभ खनन प्रभावित क्षेत्रों और गरीबों तक पहुंचाना भाजपा और नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता है.

भाजपा का मानना है कि राज्य की खनिज संपदा का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और खनन प्रभावित क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास तेज हो. मुख्यमंत्री को इस पर राजनीति करने की बजाय, अपने कार्यकाल में उनके लिए किए गए विकास कार्यों का हिसाब देना चाहिए. भाजपा चाहती है कि खनन से मिलने वाले राजस्व का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग आदिवासी, दलित, गरीब, पिछड़े और विस्थापित परिवारों के विकास में हो परंतु राज्य सरकार इसमें फिसड्डी साबित हुई है. सारंडा का पिछड़ापन इसका बड़ा उदाहरण है

वहीं आदित्य साहू ने झारखंड के साथ भेदभाव को भी गलत बताया. उन्होंने कहा कि केंद्र अगर झारखंड के प्रति संवेदनशील नहीं है तो राज्य को लगातार केंद्रीय योजनाओं और संसाधनों का लाभ कैसे मिल रहा है, मुख्यमंत्री को बताना चाहिए. उन्होंने कहा कि आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते हैं.

साल 2014-15 में कुल खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी महज 60 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 88 प्रतिशत प्लस हो गई. वहीं पिछले 10 साल यानि 2014-15 से 2024-25 के बीच राज्यों का खनिज राजस्व करीब 354 प्रतिशत बढ़कर 25,206 करोड़ रुपए से 1,14,549 करोड़ रुपया हुआ है. इन आंकड़ों से जनता खुद विचार करेगी कि केंद्र राज्यों का खनिज राजस्व छीन रहा है, यह आरोप विपक्षियों द्वारा बेवजह और झूठा नहीं तो क्या है.

झारखंड सरकार ने लौह अयस्क पर 600 रुपए प्रति टन का फ्लैट उपकर लगा दिया, जबकि छत्तीसगढ़ में यह 22.50 प्रति टन है. कोयले पर भी राज्य सरकार ने डेढ़ साल से भी कम समय में उपकर 100 रुपए से बढ़ाकर 450 रुपए प्रति टन कर दिया. इस दौरान बीसीसीएल का 2025-26 का उत्पादन 40.50 मिलियन टन से घटकर 35.52 मिलियन टन हो गया यानी उत्पादन में 12.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई.

ऐसा नहीं है कि अधिकतम कर लगाकर अधिकतम राजस्व हासिल किया जा सकता है. सेस के कारण झारखंड को नुकसान हुआ है. अधिकतम कर लगाने से राज्य के अवैध माफियाओं की चांदी है. बीसीसीएल में कोयला चोरी को राज्य सरकार नियंत्रित नहीं कर पाई, केंद्र सरकार को फोर्स भेजना पड़ा. उन्होंने कहा कि भाजपा स्पष्ट करना चाहती है कि झारखंड के खनिज संसाधनों पर पहला अधिकार झारखंड की जनता के विकास का है, लुटेरों और माफियाओं का नहीं, भाजपा हर मंच पर अधिनियम के तथ्यों को जनता के सामने रखेगी और जागरूकता अभियान चलाकर JMM के झूठ एवं भ्रम का जवाब देगी.

साथ ही इस अधिनियम की प्रतियां भी वितरित की जाएगी. झारखंड सरकार की नीयत साफ होती तो झूठा राग अलापने की बजाय वह खदानें चालू करती. मगर कितनी शर्मनाक बात है कि देश के करीब 40 प्रतिशत खनिज भंडार रखने वाला यह राज्य अपनी अकूत खनिज संपदा का अपेक्षित उपयोग तक नहीं कर पा रहा है. पिछले 6 वर्षों में यहां केवल 4 खदानों की नीलामी हुई. आश्चर्यजनक बात है कि इसमें एक भी संचालन में नहीं आ सकी वहीं. पड़ोसी राज्य ओडिशा ने 35 खदानें चालू कर करीब 87,000 करोड़ रुपए का नीलामी प्रीमियम प्राप्त किया जबकि झारखंड को नीलामी प्रीमियम से शून्य प्राप्त हुआ.

उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की बात करने वाली झामुमो की हेमंत सोरेन सरकार ने पिछले 7 साल में इनका ही दोहन किया है. खनिज संपदाओं को तो इस सरकार ने लूटकर और लुटवाकर राज्य को खोखला कर दिया है. इसलिए झामुमो का इसके खिलाफ आंदोलन केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कवायद है. झामुमो को झारखंड की जनता को गुमराह करने के बजाय यह बताना चाहिए कि राज्य में वर्षों से चल रहे अवैध खनन, खनिजों की लूट और राजस्व के नुकसान पर उसकी सरकार ने क्या कार्रवाई की?

आदित्य साहू ने कहा कि झारखंड सरकार आदिवासी कल्याण, मंईया सम्मान योजना, अबुआ आवास के नाम पर भ्रम फैलाने, केंद्र पर दोषारोपण करने की बजाय राज्य सरकार को अपने डीएमएफटी फंड के इस्तेमाल का हिसाब देना चाहिए. उन्होंने कहा कि DMFT फंड की बंदरबांट कैसे की गई है, यह किसी से छुपा नहीं है बालू और पत्थर खदानों के नीलामी न होने से राज्य को लगातार खनन राजस्व का नुकसान हो रहा है.

इसे भी पढ़ें- खनिज विधेयक पर जेएमएम के आंदोलन की घोषणा पर बिफरे नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, जानिए क्या कहा

इसे भी पढ़ें- MMDR संशोधन पर सत्ता के गलियारे में उबाल, अब JMM बनाएगा ‘उलगुलान’ की रणनीति, गुरुवार को होगा फैसला

इसे भी पढ़ें- MMDR संशोधन को लेकर केंद्र सरकार पर बरसे MLA प्रदीप यादव, नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले बताया स्वागत योग्य