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बंगाल चुनाव में बिहार का इफेक्ट, सीमावर्ती सीटों पर BJP का प्रदर्शन शानदार

बंगाल चुनाव में बिहार का असर देखने को मिला, क्योंकि सीमा से सटे विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है. पढ़ें..

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बंगाल चुनाव में बिहार का इफेक्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : May 4, 2026 at 8:49 PM IST

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पटना: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती थी. बंगाल को साधने के लिए बिहार की भूमिका पहले से तय कर दी गई थी. बिहार से सटे विधानसभा क्षेत्र के लिए खास प्लान बनाए गए थे. इसके अलावे बड़ी संख्या में बिहार कार्यकर्ता और नेताओं की तनाती की गई थी. बिहार से सटे जिलों को बिहार बीजेपी ने टारगेट किया था.

बिहार बीजेपी के जिम्मे थी 56 सीटें: बंगाल फतह के लिए बिहार बीजेपी की भूमिका भी तय की गई थी. पार्टी में कुल 56 विधानसभा सीट को टारगेट किया था, जो बिहार की सीमा से या तो सटे थे फिर लगते थे. 56 विधानसभा सीट को फतह करने के लिए खास रणनीति बनाई गई थी.

बंगाल में जीत से बीजेपी उत्साहित (ETV Bharat)

42 विधानसभा सीट पर प्रभारी थे विधायक: सिलीगुड़ी इलाके में बिहार भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं को लगाया गया था. कुल 56 विधानसभा सीट पर कार्यकर्ताओं की तैनाती की गई थी. 56 में से 42 विधानसभा सीट के प्रभारी विधायक थे और बाकी के 14 विधानसभा सीट पर अनुभवी कार्यकर्ताओं को प्रभारी बनाया गया था.

शानदार रहा प्रदर्शन: भारतीय जनता पार्टी ने बिहार यूनिट के कार्यकर्ताओं को मुख्य रूप से सीमावर्ती और रणनीतिक जिलों में तैनात किया था. इनमें खास तौर पर उत्तर दिनाजपुर, मालदा और दार्जिलिंग शामिल थे.इसके अलावा नॉर्थ बंगाल के कूच बिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में भी बिहार के कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका दी गई, क्योंकि 2021 में यहां BJP का प्रदर्शन मजबूत रहा था. भाजपा को लगभग 22 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. 2026 में भाजपा ने सीमावर्ती इलाकों में क्लीन शुरू कर दिया और 50 से अधिक सीटों पर जीत हासिल हुई.

बूथ मैनेजमेंट में दक्ष है भाजपा कार्यकर्ता: बिहार के कार्यकर्ताओं पर पार्टी को इसलिए भी भरोसा है कि वह समर्पित भाव से काम करते हैं. बिहार में बीजेपी का संगठनात्मक ढांचा मजबूत और एक्टिव है. यहां के कार्यकर्ता 'बूथ मैनेजमेंट' में प्रशिक्षित माने जाते हैं. राज्य का नहीं होने के कारण स्थानीय राजनीति के दबाव से मुक्त रहते हैं. भाषाओं और सांस्कृतिक मेलजोल का फायदा भी उन इलाकों में पार्टी को मिलता है.

कैसे मिली बीजेपी को जीत?: फालाकाटा विधानसभा सीट पर भाजपा ने शशि रंजन को प्रभारी बनाया गया था. इस सीट को भाजपा ने 40000 से अधिक वोटों से जीती है. शशि रंजन कहते हैं, 'बिहार के कार्यकर्ताओं को सिलीगुड़ी जोन में लगाया गया था. वहीं हम लोग लगातार कैंप कर रहे थे. 2021 विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2026 में हमने सिलीगुड़ी जोन में शानदार प्रदर्शन किया है.

ममता बनर्जी से त्रस्त थी जनता: विधान पार्षद और भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेश कुमार भी बंगाल में काम कर रहे थे और कोलकाता स्थित पार्टी दफ्तर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे. ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान देवेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी के गुंडाराज से त्रस्त थी. वहां की जनता मुक्ति चाहती थी और हमारे कार्यकर्ताओं ने अथक प्रयास से ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया.

"बंगाल में कट मनी का सिंडिकेट कम कर रहा था और मवेशियों की तस्करी धड़ल्ले से चल रही थी. इसके अलावे तुष्टीकरण ने ममता बनर्जी की पोल खोल कर रख दी थी. बिहार से सटे इलाकों में इस बार हम शत प्रतिशत सीट जीतने में कामयाब रहे हैं."- देवेश कुमार, विधान पार्षद, बीजेपी

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