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IT-AI Technique: पंचायत-निकाय चुनाव से पहले भाजपा का माइक्रो प्लान, जानिए क्या है खास...

भारतीय जनता पार्टी ने आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए केंद्र स्तर तक तकनीकी प्रशिक्षण अभियान चलाने की रणनीति बनाई है.

पंचायत और निकाय चुनाव से पहले बीजेपी का मास्टर प्लान
पंचायत और निकाय चुनाव से पहले बीजेपी का मास्टर प्लान (ETV Bharat (File))
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : March 2, 2026 at 4:04 PM IST

6 Min Read
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जयपुर: भारतीय जनता पार्टी ने पंचायत और निकाय चुनावों से पहले संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त बनाने के लिए व्यापक माइक्रो प्लान तैयार किया है. पार्टी आईटी, एआई और आधुनिक तकनीक के जरिए चुनावी रणनीति को मजबूत करने जा रही है. इसके तहत 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान' शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से प्रदेश के 1150 मंडलों तक तकनीकी प्रशिक्षण पहुंचाया जाएगा.

7 मार्च से मंडल स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जबकि बाद में जिला और प्रदेश स्तर पर विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे. कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया प्रबंधन, मतदाता डेटा विश्लेषण, डिजिटल संवाद और एआई आधारित कंटेंट निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा. पार्टी का उद्देश्य संगठन को डेटा आधारित, त्वरित और प्रभावी चुनावी प्रबंधन के लिए तैयार करना है, ताकि पंचायत और निकाय चुनावों में बूथ स्तर तक पकड़ मजबूत की जा सके.

आईटी, एआई और आधुनिक तकनीक की दिशा में बड़ा कदम : भारतीय जनता पार्टी अब संगठनात्मक ढांचे में आईटी, एआई और आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. पार्टी ने आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए केंद्र स्तर तक तकनीकी प्रशिक्षण अभियान चलाने की रणनीति बनाई है.

अभियान के सह संयोजक मनीष पारीक ने बताया कि 7 मार्च से 14 अप्रैल तक मंडल स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जबकि 15 अप्रैल से 20 अप्रैल तक जिला स्तर पर प्रशिक्षण सत्र होंगे. इसके बाद प्रदेश स्तर पर विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें उन्नत डिजिटल टूल्स और डेटा प्रबंधन की बारीकियां सिखाई जाएंगी. भाजपा के इस अभियान का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि बूथ से लेकर जिला स्तर तक संगठन को डेटा-आधारित और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाला बनाना है.

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कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया प्रबंधन, मतदाता डेटा विश्लेषण, डिजिटल संवाद, व्हाट्सएप समूहों के प्रभावी संचालन और एआई आधारित कंटेंट निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इससे स्थानीय मुद्दों की पहचान कर लक्षित वर्ग तक संदेश पहुंचाने में आसानी होगी. प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पार्टी का इतिहास, रीति-नीति, संगठन की कार्य पद्धति और 'विकसित भारत' के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पर भी विशेष सत्र होंगे. केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं को घर-घर संपर्क अभियान चलाने का आह्वान किया गया है. डिजिटल माध्यमों से लाभार्थियों की सूची तैयार कर उन्हें योजनाओं की जानकारी देने और फीडबैक लेने की व्यवस्था भी सिखाई जाएगी.

पार्टी की रणनीति के अनुसार:

  1. 7 मार्च से शुरू होगा प्रशिक्षण अभियान.
  2. 7 मार्च से 14 अप्रैल तक मंडल स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएगी.
  3. 15 अप्रैल से 20 अप्रैल तक जिला स्तर पर प्रशिक्षण सत्र होंगे.
  4. इसके बाद प्रदेश स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जिनमें उन्नत डिजिटल टूल्स और डेटा प्रबंधन की बारीकियां सिखाई जाएंगी.
  5. बूथ से जिला स्तर तक डेटा आधारित संगठन.
  6. भाजपा का लक्ष्य केवल तकनीकी दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि संगठन को डेटा-आधारित और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाला बनाना है.
  7. प्रशिक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया प्रबंधन, मतदाता डेटा विश्लेषण, डिजिटल संवाद कौशल, व्हाट्सएप समूहों का प्रभावी संचालन, एआई आधारित कंटेंट निर्माण, जैसे विषयों पर विशेष जानकारी दी जाएगी.

पंचायत-निकाय चुनाव पर फोकस : आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. स्थानीय मुद्दों की पहचान कर लक्षित वर्ग तक संदेश पहुंचाने की रणनीति तैयार की जा रही है. राजस्थान में यह अभियान संगठनात्मक ढांचे को तकनीकी रूप से सशक्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. पार्टी का मानना है कि आईटी और एआई आधारित यह पहल चुनावी प्रबंधन को अधिक प्रभावी और परिणामकारी बनाएगी. पंचायत और निकाय चुनावों में स्थानीय समीकरण महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन तकनीक के प्रभावी उपयोग से भाजपा सूक्ष्म स्तर पर मतदाताओं तक पहुंच बना सकती है.

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एआई आधारित विश्लेषण से क्षेत्रवार मुद्दों, जातीय और सामाजिक समीकरणों, युवा और महिला मतदाताओं की प्राथमिकताओं को समझकर रणनीति बनाई जा सकेगी. इससे प्रत्याशी चयन से लेकर प्रचार अभियान तक में सटीकता आएगी. भाजपा की रणनीति यह भी है कि प्रशिक्षित कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में डिजिटल 'वार रूम' की तरह काम करें. बूथ स्तर पर मतदाता सूची का अपडेट, नए मतदाताओं का पंजीकरण, लाभार्थियों से संपर्क और विरोधी दलों के आरोपों का त्वरित जवाब- इन सभी कार्यों में तकनीक का सहारा लिया जाएगा. इससे संगठन की पकड़ मजबूत होगी और चुनावी प्रबंधन अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगा.

सात प्रमुख विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा :

  1. वैचारिक अधिष्ठान : पार्टी की मूल विचारधारा, सिद्धांत और संगठनात्मक मूल्यों की समझ.
  2. इतिहास एवं विकास : जनसंघ से लेकर वर्तमान तक संगठन की यात्रा और विस्तार.
  3. भारतीय राजनीति और चुनौतियां : वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य, सामाजिक समीकरण और राष्ट्रीय चुनौतियों का विश्लेषण.
  4. कार्यसमिति और कार्यप्रणाली : संगठनात्मक संरचना, जिम्मेदारियां और निर्णय प्रक्रिया.
  5. अंत्योदय का महत्व : पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धांत और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की अवधारणा.
  6. भारत सरकार की उपलब्धियां : केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाएं, नीतियां और विकास कार्य.
  7. राज्य सरकार की उपलब्धियां : राज्य स्तर पर लागू योजनाएं और जनहितकारी पहले.

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डिजिटल रूप से सक्षम निर्णायक भूमिका : पार्टी नेतृत्व का मानना है कि डिजिटल रूप से सक्षम कार्यकर्ता पंचायत और निकाय चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच बढ़ी है. ऐसे में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संदेश तेजी से चलाया जा सकता है.

भाजपा इस बढ़ती डिजिटल पहुंच को राजनीतिक लाभ में बदलने की तैयारी में है. इसके अलावा, प्रशिक्षण शिविरों में कार्यकर्ताओं को सकारात्मक नैरेटिव निर्माण, फेक न्यूज की पहचान और उसका खंडन करने के तरीके भी सिखाए जाएंगे. चुनाव के दौरान गलत सूचनाओं से निपटने और पार्टी की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए यह जरूरी माना जा रहा है.