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2027 चुनाव से पहले अपनों से ही क्यों घिर रहे बीजेपी नेता? विरोध, नाराजगी और अंदरखाने उठ रही आवाज!

2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही बीजेपी की नेता ही उनकी टेंशन बढ़ा रहे हैं, जानते हैं कैसे. रिपोर्ट- किरणकांत शर्मा.

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अपने ही बढ़ा रहे बीजेपी की टेंशन. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : June 25, 2026 at 6:14 PM IST

8 Min Read
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देहरादून: उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सामने इन दिनों एक अलग तरह की राजनीतिक चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है. आमतौर पर जनता और विपक्षी दलों के हमलों का सामना करने वाली भाजपा अब कई मोर्चों पर अपनों से घिरती हुई नजर आ रही है. एक तरफ जहां विपक्ष और जनता इन दिनों विकास कार्यों, सड़क, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार के घेरने में लगी हुई है, तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने असंतोष के स्वर खुलकर सामने आने लगे हैं.

उत्तराखंड के 2027 के विधानसभा चुनावों में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है. यही कारण है कि राजनीति पार्टियों में चुनावी गतिविधियां भी तेज हो गई हैं, इसलिए प्रदेश में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं, जिससे बीजेपी में भी बेचैनी बढ़ी हुई हैं.

पोखरी में महेंद्र भट्ट का घेराव: चमोली जिले के पोखरी क्षेत्र में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को उस समय विरोध का सामना करना पड़ा था, जब उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के कार्यकर्ताओं ने भैरवधार थालाबैड में उनका काफिला रोक लिया. उक्रांद के केंद्रीय महामंत्री बीरू सजवाण के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर भाजपा नेतृत्व से जवाब मांगा.

प्रदर्शनकारियों ने एक वर्ष से अधूरी पड़ी पुलिया, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण की धीमी गति और आधारभूत सुविधाओं के अभाव को प्रमुख मुद्दा बनाया. उनका कहना था कि कई गांवों के लोग अपनी सड़कें खुद बनाने को मजबूर हैं. ऐसे में सरकार के विकास के दावों की हकीकत जनता के सामने स्पष्ट दिखाई देती है.

कर्णप्रयाग की घटना से उठे सवाल: कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग में निहंगों के विवाद की हालिया घटना को लेकर भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए और चारधाम यात्रा के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था व स्पष्ट एसओपी लागू करने की मांग की गई.

मतदान केंद्र विवाद में घिरे कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल: टिहरी जिले के नरेंद्र नगर नगर पालिका चुनाव के दौरान कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक सुबोध उनियाल एक बार फिर राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए थे. मतदान प्रक्रिया के दौरान उनके मतदान केंद्र के भीतर प्रवेश करने को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल और कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था.

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नरेंद्र नगर में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के साथ यूकेडी नेता की बहस हुई थी. (ETV Bharat)

यूकेडी की वरिष्ठ नेत्री प्रमिला रावत ने मौके पर ही मंत्री के खिलाफ आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. मामला इतना बढ़ गया कि इसी पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के दौरान सत्ता का प्रभाव दिखाना और निर्वाचन नियमों की अनदेखी करना गंभीर विषय है.

बेतालघाट में विधायक सरिता आर्या को सुननी पड़ी जनता की नाराजगी: कुमाऊं के बेतालघाट क्षेत्र में भी भाजपा को जनाक्रोश का सामना करना पड़ा. स्वास्थ्य सुविधाओं, सड़क संपर्क और मोटर मार्गों के सुधारीकरण की मांग को लेकर कई दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीणों के बीच जब नैनीताल विधायक सरिता आर्या पहुंचीं तो विरोध के स्वर और तेज हो गए.

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नैनीताल विधायक सरीता आर्य को भी जनता के आंक्रोश का सामना करना पड़ा था. (ETV Bharat)

आंदोलनकारियों ने गो बैक और विधायक हाय-हाय के नारे लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की. ग्रामीणों का आरोप था कि वर्षों से क्षेत्र की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं और जनप्रतिनिधियों ने केवल आश्वासन देने का काम किया है. विधायक ने आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें दुर्गम गांवों में जाकर वास्तविक स्थिति देखने की चुनौती दे डाली.

भाजपा विधायक अनिल नौटियाल को जनता की सुनी पड़ी: गढ़वाल मंडल के कर्णप्रयाग में भी भाजपा विधायक अनिल नौटियाल को सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान असहज स्थिति का सामना करना पड़ा. दरअसल, एक महिला ने मंच से ही विधायक के सामने क्षेत्रीय समस्याओं और अधूरे विकास कार्यों को लेकर तीखी नाराजगी जाहिर की. जनता की बढ़ती अपेक्षाओं और जनप्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेही की मांग से जोड़कर देखें तो पहाड़ों में ये छोटा सा विरोध भी बड़ा हो जाता है. वैसे भी जब जनता सार्वजनिक मंचों पर सीधे सवाल पूछने लगे तो उसे सामान्य विरोध नहीं माना जा सकता.

कुल मिलाकर कहा जाए तो प्रदेश में कई जगहों पर बीजेपी नेताओं को इसी तरह के विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा, लेकिन बीजेपी के लिए असली चुनौती यह नहीं, बल्कि यह है कि इन विरोध प्रदर्शनों के बाद पार्टी के नेता भी सरकार और संगठन की पोल खोलने लगे हैं. इसलिए कहा जा रहा है कि बीजेपी को विपक्ष से पहले अपनों से ही लड़ना होगा.

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ अपने ही नेता: भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती शायद विपक्ष या जनता नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर से उठ रही आवाजें बनती जा रही हैं. दरअसल, देहरादून के पूर्व मेयर और बीजेपी नेता सुनील उनियाल गामा इन दिनों लगातार कैबिनेट मंत्री और मसूरी विधायक गणेश जोशी के खिलाफ मुखर दिखाई दे रहे हैं.

गामा विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विकास कार्यों विशेषकर आपदा पुनर्निर्माण से जुड़े अधूरे कामों को मुद्दा बना रहे हैं. उन्होंने यहां तक कहा है कि वह इस विषय को मुख्यमंत्री धामी के समक्ष भी उठाएंगे.

राजनीतिक जानकार आदेश त्यागी कहते हैं,

जब किसी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी का ही प्रभावशाली नेता मौजूदा विधायक की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे तो उसके पीछे केवल जनहित ही नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक संभावनाएं भी जुड़ी होती हैं. बीजेपी के लिए ये अच्छे संकेत नहीं माने जा सकते हैं.

हरिद्वार में भी बढ़ रही टिकट की दावेदारों की संख्या: हरिद्वार विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा के भीतर राजनीतिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है. एक ऐसा दौरा था, जब मदन कौशिक के प्रभाव के चलते अन्य नेता चुनावी दावेदारी करने से भी बचते थे, लेकिन अब स्थिति बदलती नजर आ रही है.

हरिद्वार से भाजपा नेता विशाल गर्ग और उज्ज्वल पंडित जैसे चेहरे खुलकर मैदान में उतर चुके हैं और क्षेत्र की समस्याओं को लेकर लगातार सक्रियता दिखा रहे हैं. हरिद्वार में बढ़ती नशाखोरी, शहरी अव्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर दोनों नेता लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी चुनाव से पहले टिकट की मजबूत दावेदारी के रूप में देखा जा रहा है, जिसने स्थानीय भाजपा खेमों के बीच नई प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है.

भाजपा संगठन ने दी संयम और मर्यादा की नसीहत: लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संयम बरतने की सलाह दी है. उनका कहना है कि लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है, लेकिन विरोध का एक तरीका और मर्यादा होती है.

यदि किसी विधायक मंत्री या संगठन के पदाधिकारी के कामकाज को लेकर कोई शिकायत है तो उसे पार्टी मंचों पर उठाया जाना चाहिए. सार्वजनिक रूप से अपने ही नेताओं के खिलाफ माहौल बनाना संगठन और कार्यकर्ताओं के लिए उचित संदेश नहीं देता. पार्टी हर स्तर पर संवाद और समन्वय की प्रक्रिया को मजबूत बनाए हुए है.
- महेंद्र भट्ट, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष -

छोटे राज्य में बड़ा असर डालते हैं छोटे मुद्दे: राजनीतिक जानकार आदेश त्यागी मानते हैं कि चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक सक्रियता बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन जब जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं दोनों की नाराजगी सामने आने लगे तो किसी भी दल को गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए.

उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में स्थानीय मुद्दे और जनभावनाएं बहुत तेजी से राजनीतिक रूप ले लेती हैं. पहाड़ के किसी छोटे गांव से उठी आवाज कई बार पूरे प्रदेश के चुनावी माहौल को प्रभावित कर देती है. भाजपा के भीतर यदि अभी से मौजूदा विधायकों के खिलाफ आवाज उठ रही है और टिकट बदलने की मांग सामने आने लगी है तो इसे केवल सामान्य राजनीतिक गतिविधि मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
- आदेश त्यागी, राजनीतिक जानकार -

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