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बदरीनाथ कथित चढ़ावा चोरी मामला, BJP MP त्रिवेंद्र ने दिया बड़ा बयान, देवस्थानम बोर्ड पर भी अडिग

बदरीनाथ धाम मंदिर कथित चढ़ावा चोरी मामले में बीजेपी सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान पर कांग्रेस ने चुटकी भी ली हैं.

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बीजेपी सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : July 6, 2026 at 3:52 PM IST

4 Min Read
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देहरादून: बदरीनाथ धाम मंदिर कथित चढ़ावा चोरी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से बीजेपी सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बड़ा बयान दिया हैं. त्रिवेंद्र सिंह रावत ने न सिर्फ इस पूरे प्रकरण को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है, बल्कि मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग भी कर दी है.

दरअसल, प्रदेश में इन दिनों बदरीनाथ धाम में हुई दान चोरी को लेकर जबरदस्त चर्चाएं चल रही है. इस मामले में लगे आरोपों को लेकर जांच की भी बात कही जा रही है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग हो रही है. इन सभी मांगों और चर्चाओं के बीच भाजपा के ही सांसद और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक ऐसा बयान दिया है जो सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाला है.

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दान चोरी मामले को लेकर निष्पक्ष जांच करने की मांग उठा दी है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से बदरीनाथ में दान चोरी होने की बातें सामने आई है, वह बेहद ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है. इस दौरान त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मामले में ऐसी जांच करने की बात कही है, जिस पर सभी को भरोसा हो. उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसे पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.

खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बार फिर अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में लाए गए देवस्थानम बोर्ड पर फिर स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि भले ही इस बोर्ड को स्थापित ना किया गया हो, लेकिन वह आज भी यही मानते हैं कि प्रदेश में मंदिरों के प्रबंधन के लिए देवस्थानम बोर्ड होना ही चाहिए. त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान सामने आने के बाद कांग्रेस ने भी चुटकी ली है.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भी उठाए सवाल: वहीं इस मामले पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि जिन लोगों पर दान में अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं, उन्हीं से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को जांच समिति का हिस्सा बनाया गया है, जो न्याय और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है. उन्होंने इस स्थिति को बिल्कुल वैसी बताया जैसे बिल्ली को ही दूध की रखवाली सौंप दी गई हो.

गोदियाल ने कहा कि इस प्रकार गठित जांच समिति से निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की उम्मीद बिल्कुल नहीं की जा सकती है. उन्होंने मांग उठाई कि इस पूरे प्रकरण की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति से कराई जाए, जिसकी अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष करें ताकि जनता और करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास कायम हो सके, अगर राज्य सरकार को इस पर कोई आपत्ति है तो जांच प्रक्रिया के निगरानी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कराई जाए.

पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के पास इस मामले में निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई करने का मौका था लेकिन जिस तरह पहले भी केदारनाथ स्वर्ण मामले में जरूरी कदम नहीं उठाए गए, उसी तरह इस प्रकरण में भी सरकार की मंशा संदिग्ध दिखाई पड़ रही है.

जब बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष के निजी सहायकों पर ही गंभीर आरोप लग रहे है. ऐसे में इस तंत्र से जुड़े लोगों को जांच समिति में शामिल किया गया है , जिस कारण जांच की पारदर्शिता खुद ही समाप्त हो जाती है. कांग्रेस पार्टी ऐसी समिति की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेगी, कांग्रेस पार्टी इस प्रकरण में पारदर्शी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करती है.

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