हिमाचल में कैंसर से डरने की नहीं जरूरत, दो साल में स्थिर हुई मरीजों की संख्या, इन उपायों का दिखने लगा असर
पहाड़ी राज्य में दो साल की अवधि में कैंसर रोगियों की संख्या लगभग स्थिर हुई है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 24, 2026 at 5:36 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में भयावह कैंसर रोग को लेकर एक राहत भरी खबर है. पहाड़ी राज्य में दो साल की अवधि में कैंसर रोगियों की संख्या लगभग स्थिर हुई है. हिमाचल में स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को समय पर उपचार मिलने और स्क्रीनिंग सुविधा के कारण ये संभव हो रहा है. हालांकि, प्रदेश में वर्ष 2023 से 2026 की अवधि में सभी स्वास्थ्य संस्थानों में 84162 कैंसर रोगी इलाज के लिए पहुंचे.
ये जानकारी हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन में सोमवार को सदन में सामने आई. एक दिन की ब्रेक के बाद सोमवार को हालांकि मानसून सेशन में प्रश्नकाल में कम ही सवाल लगे, लेकिन लिखित जवाब सामने आए हैं. इसी कड़ी में नाचन के भाजपा विधायक विनोद कुमार ने प्रदेश में कैंसर मरीजों को लेकर सवाल किया था. भाजपा सदस्य मुख्यमंत्री से जानना चाहते थे कि राज्य में कैंसर मरीजों की संख्या कितनी है और इनके इलाज की क्या सुविधाएं हैं. साथ ही वे कैंसर मरीजों की संख्या में हर साल हो रही बढ़ोतरी के बारे में जानना चाहते थे.
लिखित जवाब में सरकार की तरफ से बताया गया कि राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों के आंकड़ों के अनुसार दो साल में कैंसर मरीजों की संख्या लगभग स्थिर रही है. विधानसभा में लिखित जवाब में दिए गए आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश मेवर्ष 2023 में कैंसर के 2,380 मरीज इलाज के लिए रजिस्टर्ड हुए. वर्ष 2024 में कैंसर के रोगियों की यह संख्या बढक़र 2,443 हो गई. फिर वर्ष 2025 में 744 मरीज इलाज के लिए रजिस्टर्ड हुए. वहीं, इस साल 10 अगस्त माह तक प्रदेश के राजकीय एवं निजी आयुर्विज्ञान कॉलेज अस्पतालों में वर्ष 2023 से अब तक 84,162 कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचे. लिखित जवाब में बताया गया कि राज्य सरकार ने कैंसर की बीमारी को गंभीरता से लेते हुए इसके उपचार, समय पर पहचान और जागरूकता के लिए कई प्रयास किए हैं.
हिमाचल सरकार ने इसके लिए राज्य सलाहकार बोर्ड का गठन किया है. राज्य में कैंसर रोगियों के मामलों की रिपोर्टिंग को 8 फरवरी 2024 से जरूरी किया गया है. इससे राज्य में कैंसर रोगियों को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आती है. इसके अलाव प्रदेश में कैंसर रजिस्ट्री व एटलस की स्थापना भी की गई है. जवाब में बताया गया कि महिलाओं में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ब्रेस्ट एवं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. इसमें 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में स्तन, गर्भाशय ग्रीवा और मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग की जा रही है. इसके अलावा 14-15 वर्ष की किशोरियों को एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) का टीका लगवाने के लिए टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है.
सरकार ने कहा कि उसका मकसद राज्य में कैंसर का उपचार सुलभ बनाने के साथ-साथ इस रोग की पहचान कर एक्शन लेना है. राज्य में सरकार ने कैंसर की रोकथाम व बेहतर उपचार के लिए राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों एवं अस्पतालों के अंतर्गत कैंसर अस्पतालों में विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं. इनमें एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, बायोप्सी, इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री, एफएनएसी, मैमोग्राफी और पीईटी-सीटी जैसी जांच एवं उपचार संबंधी सुविधाएं शामिल हैं. जवाब में कहा गया कि सरकार का फोकस न केवल उपचार बल्कि इस रोग से होने वाली मृत्यु दर को कम करना है.
राज्य में आईजीएमसी शिमला, नेरचौक मेडिकल कॉलेज अस्पतालमें कैंसर के लिए टर्शरी कैंसर केयर सेंटर काम कर रहे हैं. यहां मेडिकल आंकोलॉजी, व पैलिएटिव केयर यानी दर्द निवारक देखभाल के लिए खास वार्ड बनाए गए हैं. टांडा मेडिकल कॉलेज व नेरचौक मेडिकल कॉलेज में रेडियोथैरेपी व न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग काम कर रहे हैं. हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट बनाया गया है और यहां साठ पद भरे जाने को मंजूरी दी गई है.

