टिकटों को लेकर माथापच्ची : टकराव से बढ़ी भाजपा की चिंता, बीकानेर से फिर शुरू होगी बैठक
भाजपा का महामंथन दूसरे दिन भी जारी है. समय कम और दावेदार ज्यादा होने से भाजपा की माथापच्ची बढ़ी हुई है.

Published : August 28, 2026 at 2:50 PM IST
जयपुर : राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में टिकट वितरण को लेकर भाजपा में चल रहा महामंथन पहले दिन तय समय से आगे खिंच गया. तीन संभागों पर चर्चा के एजेंडे के बावजूद पहले दिन अजमेर और उदयपुर संभाग के टिकटों पर ही मंथन पूरा हो सका, जबकि बीकानेर संभाग बाकी रह गया. दोनों संभागों के टिकटों पर अंतिम मुहर लगाने की कवायद देर रात करीब ढाई बजे तक चली. अब दूसरे दिन की बैठक की शुरुआत बीकानेर संभाग से होगी, इसके बाद भरतपुर और कोटा संभाग के निकायों के प्रत्याशियों को लेकर चर्चा होगी.
भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में चल रही इन बैठकों में टिकट के लिए आए नामों, स्थानीय राजनीतिक समीकरण, संगठनात्मक पकड़ और प्रत्याशी की जीतने की क्षमता पर चर्चा की जा रही है. पार्टी के लिए चुनौती यह है कि बड़ी संख्या में दावेदारों के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसे चेहरे चुने जाएं, जिन्हें चुनाव मैदान में उतारने के बाद संगठन एकजुट रह सके. शुक्रवार की बैठक में प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास भी शामिल होंगे.
आधी रात तक चला भाजपा का महामंथन : नगरीय निकाय चुनावों में टिकट वितरण को लेकर गुरुवार देर रात तक जारी रहे महामंथन में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार, चुनाव प्रभारी, सह प्रभारी, संभाग प्रभारी, संबंधित विधायक और जिलाध्यक्ष बैठक में मौजूद रहे. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी देर रात तक भाजपा मुख्यालय में मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्याशियों के चयन को लेकर बारीकियों से मंथन किया जा रहा है और भाजपा को निकाय चुनाव में जीत का पूरा विश्वास है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव में पटकनी दी जाएगी और संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं को ही चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा. मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि युवाओं, रोजगार और परीक्षा शुचिता पर विशेष फोकस किया गया है. सरकार ने ढाई वर्षों में 1.89 लाख पदों पर नियुक्तियां दी हैं, जबकि 1.45 लाख भर्तियां प्रक्रियाधीन हैं. वर्ष 2026 के लिए 1.25 लाख पदों का भर्ती कैलेंडर भी जारी किया गया है.
टोंक में पेच, मुख्यमंत्री को करना पड़ा हस्तक्षेप : पहले दिन टिकटों को लेकर गंभीरता के साथ चर्चा हुई. भाजपा जीताऊ उम्मीदवार पर फोकस करते हुए एक एक टिकट पर बारीकी से चर्चा के साथ अंतिम मुहर लगा रही है. हालांकि, टिकटों को लेकर बीच बीच में विवाद भी उठा. ज्यादा विवाद टोंक जिले के टिकटों को लेकर हुआ. विधायक और जिलाध्यक्ष के बीच मतभेद सामने आने से मंथन के दौरान स्थिति गरमा गई. स्थानीय स्तर पर सहमति नहीं बनने पर मामला मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक पहुंचा. मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाई गई. यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि टिकट वितरण केवल संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रभाव और राजनीतिक समीकरणों का भी बड़ा परीक्षण है.
रक्षाबंधन के बीच भी टिकटों पर मंथन : रक्षा बंधन के पर्व के बावजूद भाजपा में टिकट वितरण की कवायद रुकी नहीं है. समय की कमी को देखते हुए पार्टी नेतृत्व लगातार बैठकों के जरिए नामों को अंतिम रूप देने में जुटा है. आज बीकानेर संभाग के बाद भरतपुर और कोटा संभाग पर चर्चा होगी. इसके बाद शेष संभागों की बैठकों में भी तेजी लाने की तैयारी है. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से 309 नगरीय निकायों के चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ गुरुवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
रक्षाबंधन के राजकीय अवकाश के कारण आज नामांकन नहीं होंगे. शनिवार, 29 अगस्त को नामांकन प्रक्रिया फिर शुरू होगी. रविवार को अवकाश के बाद 31 अगस्त नामांकन का अंतिम दिन रहेगा. ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के सामने रविवार देर रात तक अधिकतर टिकटों को अंतिम रूप देने की चुनौती है. माना जा रहा है कि दोनों प्रमुख दलों के ज्यादातर प्रत्याशी अंतिम दिन ही नामांकन दाखिल करेंगे. इससे अंतिम दो दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है.
अंदर का विवाद बाहर न आए, इसीलिए मीडिया से दूरी : टिकटों को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान और संभावित विवादों को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए भाजपा ने मीडिया की एंट्री पर भी सख्ती बरती है. पहले दिन प्रदेश मुख्यालय में चल रही संभागवार बैठक से मीडिया को दूर रखा गया. पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि टिकट चयन के दौरान सामने आने वाले मतभेद, दावेदारों की नाराजगी या स्थानीय स्तर के विवाद बाहर आएं.

