उत्तराखंड में चुनावी मोड में बीजेपी, कांग्रेस का इंजन स्टार्ट लेकिन रफ्तार अभी भी धीमी
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बचा एक साल से भी कम का वक्त, बीजेपी और कांग्रेस में चुनावी हलचल तेज, ऐसी ही स्थिति

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : March 12, 2026 at 8:57 PM IST
|Updated : March 12, 2026 at 9:53 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में बीजेपी की सक्रियता ये बता रही है कि पार्टी पूरी तरह से चुनावी मोड में है. उधर, कांग्रेस अपने चुनावी इंजन को स्टार्ट तो कर चुकी है, लेकिन रफ्तार अभी भी काफी धीमी है. बड़े नेताओं की मौजूदगी से लेकर पार्टी संगठन के निर्णयों तक के हालात कुछ इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं.
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर चुनावी हलचल तेज होती दिखाई दे रही है. प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी जहां पूरी तरह चुनावी मोड में नजर आ रही है तो वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने चुनावी इंजन को स्टार्ट तो कर दिया है, लेकिन उसकी रफ्तार अभी भी काफी धीमी दिखाई देती है. बड़े नेताओं की मौजूदगी, संगठनात्मक गतिविधियों और राजनीतिक कार्यक्रमों को देखें तो दोनों दलों की सक्रियता में साफ अंतर दिखाई दे रहा है.
प्रदेश में बीजेपी अपनी मौजूदा सरकार के चार साल पूरे होने का जश्न मनाने की तैयारी में जुटी हुई है. दरअसल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार को 23 मार्च को चार साल पूरे होने जा रहे हैं. ऐसे में सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाने की तैयारी कर रही है. विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें सरकार के चार साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाया जा रहा है.
बीजेपी की सक्रियता बढ़ी: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार के चार साल पूरे होने का यह कार्यक्रम सिर्फ उपलब्धियों के प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए आगामी विधानसभा चुनावों के लिए माहौल तैयार करने की कोशिश भी की जा रही है. बीजेपी संगठन भी इसे चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा मानते हुए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में लगा हुआ है.
आज प्रदेश भाजपा मुख्यालय में प्रदेश महामंत्री (संगठन) श्री @ajaeybjp जी ने ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान’ के अंतर्गत प्रदेश प्रशिक्षण टोली के साथ बैठक कर प्रदेशभर में चल रहे मण्डल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की।
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बैठक में प्रदेश महामंत्री श्री कुन्दर… pic.twitter.com/XSt6lHxaGI
इसी कड़ी में बीजेपी के कई राष्ट्रीय स्तर के नेता भी लगातार उत्तराखंड का दौरा कर रहे हैं. हाल के महीनों में पार्टी के पूर्व बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उत्तराखंड पहुंच चुके हैं. उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन की स्थिति का जायजा लिया है. इन दौरों के दौरान पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करने और चुनावी रणनीति को लेकर भी चर्चा हुई है.
वहीं, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कृषि योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों के बहाने कई बार उत्तराखंड का दौरा कर चुके हैं. उनके लगातार दौरे इस बात का संकेत माने जा रहे हैं कि बीजेपी संगठन आगामी चुनावों के मद्देनजर प्रदेश में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है.
— BJP Uttarakhand (@BJP4UK) March 11, 2026
सिर्फ राष्ट्रीय स्तर के नेता ही नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर के नेताओं और मंत्रियों की सक्रियता भी इन दिनों काफी बढ़ गई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं और विभिन्न विकास योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ जनसभाओं के जरिए जनता से संवाद कर रहे हैं.
बीजेपी संगठन भी बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए लगातार बैठकें और कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. इन गतिविधियों से ये साफ संकेत मिल रहा है कि बीजेपी ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अभी से अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं.
बीजेपी की तुलना में काफी धीमी नजर आ रही कांग्रेस की रफ्तार: दूसरी ओर यदि कांग्रेस की स्थिति पर नजर डालें तो प्रदेश स्तर पर कुछ सक्रियता जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन पार्टी अभी पूरी तरह चुनावी मोड में नजर नहीं आती. कांग्रेस के कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों की रफ्तार बीजेपी की तुलना में काफी धीमी दिखाई देती है.
भराड़ीसैण, गैरसैंण में चल रहे सत्र की अवधि को बढ़ाने के लिए कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के बाहर किया प्रदर्शन। सवाल ये है कि सरकार क्यों नहीं सत्र को कम से कम 21 दिन का कर रही है? pic.twitter.com/gwGZHvieqW
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हालांकि, इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं. वे लगातार विभिन्न मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरते हुए दिखाई देते हैं. सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रमों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. उनकी सक्रियता से कांग्रेस को कुछ हद तक राजनीतिक माहौल बनाने का मौका जरूर मिल रहा है.
यदि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सक्रियता को देखा जाए तो कांग्रेस के बड़े नेता फिलहाल उत्तराखंड से दूरी बनाए हुए दिखाई देते हैं. बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के प्रदेश दौरे बेहद कम देखने को मिल रहे हैं. इससे ये संदेश भी जाता है कि कांग्रेस की चुनावी तैयारियां अभी शुरुआती चरण में ही हैं.
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती: संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की भी है. पार्टी अभी तक अपनी प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं कर पाई है. लंबे समय से कार्यकारिणी के गठन को लेकर चर्चा चल रही है और कई बार प्रदेश स्तर के नेताओं से बातचीत कर नाम भी मांगे जा चुके हैं. इसके बावजूद अब तक कार्यकारिणी की घोषणा नहीं हो पाई है.
प्रदेश कार्यकारिणी के लिए सूची कई बार तैयार हो चुकी है और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद नाम भी लगभग तय हो चुके हैं, लेकिन संगठन के भीतर विभिन्न समीकरणों और संतुलन को साधने की चुनौती के चलते अंतिम फैसला नहीं लिया जा पा रहा है.
आज पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat जी व उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष श्री Madan Lal जी के नेतृत्व में भाजपा के अनुसूचित मोर्चा की श्रीमती निशा ढींगिया जी, श्रीमती कल्पना ढींगिया जी और श्री निखिल जी ने अपने साथी मुकेश ढींगिया, नितिन गोदियाल,… pic.twitter.com/mShvE7XHsI
— Uttarakhand Congress (@INCUttarakhand) March 1, 2026
इतना ही नहीं कांग्रेस जिला और ब्लॉक स्तर पर भी संगठन में बदलाव करने की योजना बना रही है. इसके लिए भी नाम सुझाए जा चुके हैं और सूची तैयार बताई जा रही है. बावजूद इसके अब तक इस स्तर पर भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है.
"बीजेपी हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहती है और यही कारण है कि पार्टी को चुनावों में लगातार सफलता मिलती है. बीजेपी का संगठन बूथ स्तर तक मजबूत है और कार्यकर्ता लगातार जनता के बीच सक्रिय रहते हैं."- सुरेश जोशी, वरिष्ठ नेता, बीजेपी
वहीं, कांग्रेस अपनी तैयारियों को लेकर सफाई देते हुए कहती है कि प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर नामों की सूची लगभग तैयार हो चुकी है. कभी भी इस पर अंतिम मुहर लगाकर इसकी घोषणा की जा सकती है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया जारी है.
"राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की लगातार नजर उत्तराखंड की गतिविधियों पर बनी हुई है और पार्टी प्रदेश में विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रही है. कांग्रेस जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार की नीतियों का विरोध कर रही है."- शीशपाल बिष्ट, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस
उत्तराखंड की राजनीति में चुनावी सरगर्मी धीरे-धीरे बढ़ती दिखाई दे रही है. बीजेपी जहां संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतर चुकी है तो वहीं कांग्रेस भी अपनी तैयारियों को गति देने की कोशिश में लगी है. आने वाले महीनों में ये देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपनी संगठनात्मक चुनौतियों को किस तरह दूर करती है और बीजेपी की चुनावी रणनीति के सामने किस तरह मुकाबला खड़ा करती है.
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