भ्रष्टाचार का अड्डा बने जेपीएससी को आखिर करना क्या चाहती है राज्य सरकार स्पष्ट करेः बीजेपी
सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए, BJP ने जेपीएससी में चेयरमैन और सदस्यों की तुरंत नियुक्ति की मांग की. भुवन किशोर झा की रिपोर्ट.

Published : August 31, 2026 at 4:20 PM IST
रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग इन दिनों सुर्खियों में है. परीक्षा में अनियमितता का मामला इस कदर बढ़ा कि जेपीएससी के अध्यक्ष से लेकर सदस्यों को इस्तीफा देना पड़ा. इतना ही नहीं आयोग के अध्यक्ष एल खियांग्ते के साथ-साथ परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता के अलावा कुछ कर्मियों को जेल तक जाना पड़ा. छात्रों के विरोध के बाद कई परीक्षाएं रद्द करने पर सरकार ने भले ही राहत की सांस ली हो, लेकिन अब JPSC जैसे अहम संस्थान के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
आयोग के अध्यक्ष ने 22 जुलाई को इस्तीफा दिया था
हालांकि सरकार ने सुधार लाने के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है, लेकिन फिलहाल कामकाज नहीं कर रहे इस आयोग के चेयरमैन या सदस्यों की नई नियुक्तियां अभी तक नहीं हुई हैं. गौरतलब है कि छात्रों के आंदोलन और 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत आने के बाद बीते 22 जुलाई को आयोग के अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया था और तीनों सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने 9 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.
भ्रष्टाचार का अड्डा बने जेपीएससी को आखिर सरकार करना क्या चाहती है-भाजपा
सरकार के रुख पर सवाल खड़़ा करते हुए बीजेपी ने आयोग में तत्काल अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्त करने की मांग की है. बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल वर्णवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार का अड्डा बने जेपीएससी को आखिर राज्य सरकार करना क्या चाहती है यह स्पष्ट होना चाहिए. उन्होंने कहा कि विगत डेढ़ महीने से ना तो कोई परीक्षा आयोजित हो रही है और नहीं आयोग में कोई काम चल रहा है ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द जेपीएससी को पुनर्जीवित करना चाहिए नहीं तो छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा.
सरकार अपनी हठधर्मिता पर अड़ी हैः दीनदयाल वर्णवाल
उन्होंने कहा कि आखिर सरकार चाहती क्या है, आयोग को बंद कर देना है या इसमें वाकई में बदलाव लाकर छात्रों के हित में कदम उठाना है, इसको स्पष्ट करे. उन्होंने कहा ऐसे में सीआईडी जांच की जो रफ्तार है उससे उम्मीद नहीं की जा सकती है कि जांच जल्दी पूरी होगी. ऐसे में छात्रों की मांग को पूरा करते हुए सीबीआई जांच होनी चाहिए, लेकिन सरकार अपनी हठधर्मिता पर उतर आई है.
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