निकाय चुनाव: भाजपा का टिकट पर मंथन का तीसरा दिन, बगावत रोकने को बनाया डैमेज कंट्रोल प्लान, बिना सूची सीधे सिंबल देने की तैयारी
प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के तिकटों को लेकर भाजपा में तीसरे दिन भी मंथन जारी है.

Published : August 29, 2026 at 2:09 PM IST
जयपुर : नगरीय निकाय चुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा में मंथन तीसरे दिन भी जारी रहा. भाजपा मुख्यालय में संभागवार बैठकों के दौर चल रहे हैं. जोधपुर संभाग की बैठक शुक्रवार देर रात तक चली एवं शनिवार को फिर इस संभाग के नामों पर चर्चा की जा रही है. इसके बाद भरतपुर और जयपुर संभाग के संभावित प्रत्याशियों पर मंथन होगा. पार्टी के सामने टिकट तय करने के साथ सबसे बड़ी चुनौती टिकट कटने के बाद संभावित बगावत को रोकने की है. ऐसे में डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा बिना सूची प्रत्याशियों को सीधे सिंबल देने की रणनीति पर भी काम कर सकती है.
नाराजगी सामान्य प्रक्रिया :जयपुर संभाग के प्रभारी और पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी ने संभावित बगावत को लेकर कहा, चुनाव में नाराजगी और बाद में घर वापसी सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा, यह उनका आखिरी चुनाव नहीं है. पार्टी ने ही कार्यकर्ताओं को खड़ा किया और टिकट मांगने योग्य बनाया है. जिसने पार्टी छोड़ी है, वह सफलता की ओर आगे नहीं बढ़ सकता. सैनी ने स्पष्ट किया, पार्टी ने बगावत की स्थिति से निपटने के लिए डैमेज कंट्रोल टीम बनाई है. अनुशासनहीनता करने वालों पर कार्रवाई भी करेंगे. भाजपा टिकट वितरण के साथ ही नाराज दावेदारों की निगरानी और उन्हें मनाने की रणनीति पर भी काम कर रही है.
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बिना सूची जारी किए सीधे सिंबल देने का फॉर्मूला: भाजपा में बगावत रोकने के नए फॉर्मूले पर विचार किया जा रहा है. पार्टी प्रत्याशियों की पूरी सूची सार्वजनिक किए बिना सीधे चयनित उम्मीदवारों को पार्टी का सिंबल देकर नामांकन दाखिल कराने की रणनीति अपना सकती है. इसका मकसद टिकट कटने वाले दावेदारों को बगावत के लिए पर्याप्त समय नहीं देना माना जा रहा है. हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व को करना है. भाजपा मुख्यालय पर चल रहे संभागवार मंथन के दौरान देवली, टोंक और नागौर के टिकटों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर खींचतान की स्थिति आंतरिक रूप से सामने आने आई थी. ऐसे में पार्टी अब नाम तय करने के साथ संभावित असंतोष को भी मैनेज करने की रणनीति पर काम कर रही है.
150 अधिवक्ताओं को नामांकन की जिम्मेदारी :भाजपा ने नामांकन प्रक्रिया के लिए तैयारी पूरी कर ली. पार्टी के विधि प्रकोष्ठ को नामांकन की जिम्मेदारी सौंपी है. करीब 150 अधिवक्ताओं को उम्मीदवारों के नामांकन में सहयोग को लगाया है. नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी. गुरुवार के बाद रक्षाबंधन के अवकाश के चलते शुक्रवार को नामांकन नहीं हो सके. शनिवार को प्रक्रिया जारी रहेगी, जबकि रविवार को अवकाश के कारण नामांकन नहीं होंगे. ऐसे में सोमवार अंतिम दिन होगा.
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कांग्रेस के पास संगठन नहीं: इधर, राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा, पार्टी में मंथन का मतलब किसी तरह की अंदरूनी कलह नहीं, बल्कि सभी की राय सुनकर निर्णय लेने की प्रक्रिया है. एक-एक व्यक्ति और एक-एक विषय पर चर्चा की जा रही है, ताकि सभी पक्षों को सुनने के बाद सर्वसम्मति से बेहतर निर्णय लिया जा सके. कांग्रेस के यह कहने पर कि बीजेपी में अंदरूनी राजनीतिक खींचतान के चलते मंथन चल रहा है. कांग्रेस के पास मंथन करने के लिए कोई विषय नहीं है, इसलिए वह बीजेपी की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है. बीजेपी अपने प्रत्येक कार्यकर्ता को अधिकार और जिम्मेदारी देकर संगठन को मजबूत करने में विश्वास रखती है. निकाय चुनाव में टिकट वितरण को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी अभी उम्मीदवारों की सूची जारी करने की स्थिति में नहीं है. पार्टी स्तर पर लगातार विचार-विमर्श चल रहा है. बीजेपी टिकट वितरण में जल्दबाजी के बजाय व्यापक मंथन और संगठनात्मक सहमति को प्राथमिकता दे रही है.

