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अंगूठे के आकार के 22 घड़ियाल शावकों का जन्म, इस बार शावकों को बचाने की खास तैयारी

इस बार एनक्लोजर को विशेष सुरक्षा मैट से ढक दिया है, ताकि चील, कौवे और अन्य पक्षी ​घड़ियाल शावकों तक नहीं पहुंच सकें.

Birth of a Gharial hatchling
घड़ियाल शावक का जन्म (ETV Bharat Udaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : July 2, 2026 at 1:41 PM IST

2 Min Read
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उदयपुर: सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण की उम्मीदों का केंद्र बन गया है. लगातार तीसरे वर्ष यहां घड़ियालों की सफल ब्रीडिंग हुई है और इस बार 22 नन्हे घड़ियाल अंडों से बाहर आए हैं. अंगूठे के आकार के ये नवजात घड़ियाल फिलहाल विशेष रूप से तैयार किए गए सुरक्षित एनक्लोजर में रखे गए हैं. मानसून शुरू होने से पहले हुई इस सफल ब्रीडिंग ने पार्क में उत्साह का माहौल बना दिया है. पर्यटक भी इन दुर्लभ शावकों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं.

24 घंटे निगरानी सुनिश्चित: दरअसल, पिछले दो वर्षों में जन्मे कई घड़ियाल शिकारी पक्षियों और अन्य कारणों से जीवित नहीं रह पाए थे. इस अनुभव के बाद वन विभाग ने इस बार एनक्लोजर को विशेष सुरक्षा मैट से ढक दिया है, ताकि चील, कौवे और अन्य पक्षी बच्चों तक न पहुंच सकें. इसके साथ ही कर्मचारियों की 24 घंटे निगरानी भी सुनिश्चित की गई है, जिससे किसी भी तरह का खतरा तुरंत टाला जा सके.

घड़ियालों की सफल ब्रीडिंग (ETV Bharat Udaipur)

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आहार में गंगूजा मछलियां: वन अधिकारियों के अनुसार, लगभग 15 दिन बाद सभी शावकों को अलग-अलग सुरक्षित टबों में स्थानांतरित किया जाएगा. इससे उनकी वृद्धि, स्वास्थ्य और खानपान पर व्यक्तिगत निगरानी रखी जा सकेगी. शुरुआती भोजन के रूप में उन्हें छोटी 'गंगूजा' मछलियां दी जाएंगी, जो उनके प्राकृतिक आहार का हिस्सा हैं. इसके अलावा इनके पालन-पोषण के लिए पार्क परिसर में एक अलग छोटा तालाब भी विकसित किया जा रहा है.

Gharial family group
घड़ियाल का कुनबा (ETV Bharat Udaipur)

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घड़ियालों के लिए अनुकूल वातावरण: सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में वर्तमान में दो मादा और एक नर घड़ियाल है, जो करीब एक दशक से यहां रह रहे हैं. लगातार तीसरे वर्ष सफल प्रजनन यह संकेत देता है कि यहां का वातावरण अब घड़ियालों के लिए अनुकूल बन चुका है. वन विभाग का मानना है कि यदि इस बार सभी 22 शावकों को सुरक्षित वयस्क अवस्था तक पहुंचाने में सफलता मिलती है, तो यह केवल उदयपुर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में घड़ियाल संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी.