धरसीवां बनेगा पक्षी प्रेमियों का नया ठिकाना, 5 ग्राम पंचायतों में बनेंगे 'बर्ड वॉचिंग सेंटर', संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
धरसीवां बनेगा पक्षी प्रेमियों का नया ठिकाना, 5 ग्राम पंचायतों में बनेंगे 'बर्ड वॉचिंग सेंटर', संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : March 2, 2026 at 4:09 PM IST
रायपुर: धरसीवां विकासखंड में अब पक्षियों चहचहाहट गूंजने वाली है. पक्षियों के कलरव के साथ-साथ यहां पर पर्यावरण संरक्षण को सुरक्षित करने का भी काम किया जाएगा. कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की पहल पर प्रशासन ने क्षेत्र की 5 प्रमुख वैटलैंड्स को संरक्षित कर उन्हें 'बर्ड वॉचिंग सेंटर' के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है. जिला पंचायत सीईओ बिश्वरंजन के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने इन स्थलों का जायजा लेकर भविष्य की कार्य योजना पर मुहर लगा दी है. जिसके बाद इलाके की तस्वीर जल्द ही आपको बदली हुई नजर आएगी.
धरसीवां बनेगा पक्षी प्रेमियों का नया ठिकाना
इस पहल का उद्देश्य केवल जलभराव वाले क्षेत्रों का संरक्षण करना नहीं होगा बल्कि उन्हें पक्षियों के सुरक्षित आवास के रूप में विकसित करना भी होगा. अधिकारियों और विशेषज्ञों ने आर्द्रभूमि संरक्षण के महत्व पर बातचीत करते हुए स्थानीय जैव विविधता को बचाने और बढ़ाने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया. इन जगहों को पर्यावरणीय की दृष्टि से संवेदनशील बनाए रखते हुए पर्यटन की संभावनाओं को भी जोड़ा जाएगा.

बर्ड वॉचिंग सेंटर के रूप में होगी क्षेत्र की पहचान
योजना के तहत चयनित आर्द्रभूमियों को ‘पक्षी अवलोकन केंद्र’ के रूप में विकसित किया जाएगा. यहां पक्षियों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के साथ आगंतुकों के लिए देखने की व्यवस्था, सूचना पट्ट और आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इससे नेचर और बर्ड लवर को स्थानीय स्तर पर एक नया आकर्षक केंद्र मिलेगा.
ग्राम स्तर पर सहभागिता को मिलेगा बढ़ावा
निरीक्षण के दौरान संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच, स्व-सहायता समूहों के सदस्य, पंचायत सचिव और तकनीकी सहायक भी मौजूद रहे. इस परियोजना में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि संरक्षण के साथ ग्रामीणों को रोजगार और पर्यटन से जुड़ी संभावनाओं का लाभ मिल सके.

आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा
आने वाले चरणों मेंं सीईओ धरसीवां आशीष केश्वरवानी और पक्षी विशेषज्ञों की बैठक आयोजित की जाएगी. इसमें संरक्षण और विकास से संबंधित विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी. इसके साथ ही आर्द्रभूमि (वेटलैंड) संरक्षण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और नियम निर्धारित किए जाएंगे.

पर्यावरण जागरूकता की दिशा में एक और कदम
पर्यावरण और वन्यजीवों के क्षेत्र में यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्र में जैव विविधता के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी. भविष्य में धरसीवां की ये आर्द्रभूमियां प्रकृति प्रेमियों, शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बन सकती है.
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