बिहार में रहें सावधान, पटना में भी बर्ड फ्लू की पुष्टि, 6000 मुर्गियों को किया गया नष्ट
बिहार में बर्ड फ्लू अपना पांव पसारता जा रहा है. इसकी पहुंच अब राजधानी पटना तक हो गई है. आगे पढ़ें खबर

Published : February 27, 2026 at 2:27 PM IST
पटना : पटना के चितकोहरा स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू संक्रमण की पुष्टि होने के बाद पूरे जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है. बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत के बाद जांच कराई गई थी, जिसमें एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस की पुष्टि हुई है.
6000 मुर्गियों को किया गया नष्ट : रिपोर्ट मिलते ही प्रशासन ने तुरंत एहतियाती कदम उठाते हुए फार्म परिसर में मौजूद करीब 6000 मुर्गियों को नष्ट करा दिया और पूरे क्षेत्र को सैनिटाइज कराया गया. इन मुर्गियों को गहरा गड्ढा खोदकर दफनाया गया. इसके साथ ही संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पोल्ट्री उत्पादों की आवाजाही पर सख्ती बढ़ा दी गई है.
मुर्गियों के मौत के बाद हुई जांच : बताया जा रहा है कि बीते कुछ दिनों से सरकारी पोल्ट्री फार्म में लगातार मुर्गियों की मौत हो रही थी. पहले इसे सामान्य बीमारी माना गया, लेकिन जब मृत मुर्गियों की संख्या तेजी से बढ़ी तो पशुपालन विभाग ने इसे गंभीरता से लिया. फार्म से नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए.
जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची. फार्म परिसर को पूरी तरह सील कर दिया गया और सभी संक्रमित तथा संपर्क में आई मुर्गियों को वैज्ञानिक तरीके से गड्ढे में दफन किया गया. इसके बाद पूरे इलाके में दवा और चूने का छिड़काव कराया गया.
पशुपालन विभाग की टीम कर रही जांच : प्रशासन ने सरकारी पोल्ट्री फार्म के आसपास के 9 किलोमीटर के क्षेत्र को निगरानी जोन घोषित कर दिया है. इस क्षेत्र में अभी अगले 2 महीने तक मुर्गियों, अंडों और पोल्ट्री चारे की खरीद-बिक्री और आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही अन्य पोल्ट्री फार्मों की भी जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संक्रमण कहीं और न फैला हो. पशुपालन विभाग की टीमें लगातार सर्वे कर रही हैं और आसपास के इलाकों में पक्षियों की मौत की सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है.
सतर्क रहने की अपील : स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. विभाग का कहना है कि फिलहाल इंसानों में संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है. लोगों को सलाह दी गई है कि वे मृत या बीमार पक्षियों को हाथ न लगाएं और ऐसी किसी भी स्थिति की सूचना तुरंत प्रशासन को दें. साथ ही अधपका मांस या अंडा खाने से बचने की हिदायत दी गई है. बाजारों में बिकने वाले चिकन और अंडों की भी जांच की जा रही है ताकि संक्रमित उत्पाद लोगों तक न पहुंचें.

पटना से बाहर मुर्गी भेजने पर प्रतिबंध : बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन ने पटना में बाहर से मुर्गी लाने और बाहर भेजने पर भी नियंत्रण लगाया गया है. प्रमुख रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और पशुपालन विभाग की टीम वाहनों की जांच कर रही है. प्रशासन का कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है ताकि वायरस जिले की सीमा से बाहर न जाए और दूसरे इलाकों में फैलने से रोका जा सके. बर्ड फ्लू मुख्य रूप से पक्षियों में फैलने वाला वायरस है, लेकिन लापरवाही बरती गई तो यह इंसानों के लिए भी खतरा बन सकता है. इसी कारण प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहा है.
पोल्ट्री फार्म में साफ सफाई के निर्देश : जिला प्रशासन का कहना है कि पोल्ट्री फार्म संचालकों को साफ-सफाई और जैव सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं. फार्म में काम करने वाले कर्मचारियों को मास्क, दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं. फिलहाल प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील की है.
पटना जू हुआ सतर्क : इधर फार्म से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. चिड़ियाघर में पक्षियों के बाड़ों को सैनिटाइज कराया जा रहा है और बाहरी पक्षियों के संपर्क को रोकने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल चिड़ियाघर में किसी प्रकार के संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू मिलने के बाद एहतियाती कदम उठाना जरूरी था, इसलिए जैविक उद्यान को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है. दर्शकों को मोर और अन्य पक्षियों के बारे को 10 फीट की दूरी से ही देखने होंगे. पक्षियों के बारे के आसपास कीटनाशक का भी छिड़काव किया गया है.

बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) के संबंध में आवश्यक जानकारी:-
- यह वायरस पक्षियों की बीमारी है जो मुख्यतः जंगली जलीय पक्षियों में स्वाभाविक रूप से होते हैं.
- बर्ड फ्लू मुख्यतः मुर्गियों का बड़ा ही संक्रामक रोग है. संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने से यह संक्रमण मनुष्यों में फैल सकता है.
- मनुष्य खासकर बच्चे, अगर बीमार पक्षी की (म्यूकस) बीट और पंखों के सम्पर्क में आ जायें तो उनमें संक्रमण फैल सकता है.
- मनुष्यों में बर्ड फ्लू के लक्षण साधारण फ्लू से मिलते-जुलते हैं. जैसे कि सॉस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, जुकाम और नाक बहना, ऐसी शिकायत होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र को तुरंत इसकी सूचना दें.
- सामान्यतः बर्ड फ्लू का वायरस 70 डिग्री C तापमान पर नष्ट हो जाता है. किसी स्थान पर बर्ड फ्लू रोग की पुष्टि होने पर भी अण्डे व चिकन 70 डिग्री C तापमान पर पकाकर खाने में कोई नुकसान नहीं है.
- डरें नहीं, सावधानियां बरतें : बीमार मुर्गियों के सीधे सम्पर्क में न आएं. दस्ताने या किसी भी अन्य सुरक्षा साधन का इस्तेमाल करें. बीमार पक्षियों के पंख, श्लेष्मा (म्यूकस) और बीट को न छुये. छुये जाने की स्थित्ति में साबुन से तुरंत अच्छे तरीके से हाथ धोयें. मुर्गियों को बाड़े में रखें. संक्रमित पक्षियों को मार कर उनका सुरक्षित निपटान करें. बीमार अथवा मरे हुए पक्षी की सूचना निकटतम पशु चिकित्सालय को तुरंत दें. ऐसा करना जन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है.
संक्रामक रोगों से बचाव के उपाय
- पक्षियों को रानीखेत गम्बोरो और बर्ड फ्लू जैसी कई बीमारियां हो सकती है. ये बीमारियां एक पक्षी से दुसरी पक्षी में व दूषित पानी से अथवा प्रभावित पक्षी के मल मूत्र, पंखों आदि के जरिये पूरे झुंड को तेजी से प्रभावित कर सकती है. मुर्गी
- पालन से जुड़े होने के नाते आप अच्छी तरह जानते हैं कि अपने पक्षियों को इन बीमारियों से बचाना कितना महत्वपूर्ण है.
बचाव के लिए कौन से तरीके अपनाएं?
1. पक्षियों को बाड़े में रखिये, केवल आपकी पौल्ट्री फार्म की देखभाल करने वालों को ही पक्षियों के पास जाना चाहिए.
2. साफ-सफाई रखें: पक्षियों के बाड़े में और उसके आसपास साफ-सफाई बहुत जरूरी है. इस प्रकार जीवाणु और विषाणुओं से बचा जा सकता है. पौल्ट्री फार्म को नियमित रूप से कीटाणुनाशक दवाओं को छिड़काव कर संक्रमण मुक्त करते रहें.
3. आहार एवं पेयजल व्यवस्थाः पक्षियों को स्वच्छ एवं शीतल पेयजल और संतुलित आहार दें.
4. अपने आपको और बाजार या अन्य फार्मों में अन्य पक्षियों के संपर्क में आने वाली हर चीज की साफ-सफाई रखें.
5. लक्षणों को पहचानेंः अपने पक्षियों पर नजर रखें, यदि पक्षियों की आंख, गर्दन और सिर के आस-पास सूजन है और आंखों से रिसाव हो रहा है. कलनी और टांगों में नीलापन आ रहा है.
7. बीमार पक्षी की सूचनाः अपने पक्षियों की हर असामान्य बीमारी अथवा मौत की सूचना निकटतम पशु चिकित्सालय को तत्काल दें.
बर्ड फ्लू के लक्षण क्या हैं?@SurendramBJP@Kapil_IAS@IPRDBihar@Dept_of_AHD@HorticultureBih@Agribih#comfed#dairy#pashupalak#fish#fisheries #BiharAnimalAndFisheriesResourcesDept pic.twitter.com/MpacvZ7SXp
— Dairy, Fisheries and Animal Resources Dept., Bihar (@BiharAFRD) February 24, 2026
चिकेन-अंडा खाना कितना सुरक्षित? : अब आइये जानते हैं कि बर्ड फ्लू के दौरान अंडा और चिकन खाना कितना सुरक्षित है. बर्ड फ्लू को लेकर पशुपालन पदाधिकारी डॉक्टर विनय कुमार ने बताया कि बर्ड फ्लू के वायरस 70 डिग्री या उससे ऊपर के तापमान पर पूरी तरह नष्ट हो जाते है. ऐसे में पकाया हुआ चिकेन या अंडा पूरी तरफ सुरक्षित है.
बर्ड फ्लू क्या है ?: पटना के वेटरनरी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर और सीमेन बैंक के साइंटिस्ट डॉ. दुष्यंत यादव ने बताया कि बर्ड फ्लू जिसे एवियन इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है. पक्षियों में फैलने वाला एक संक्रामक वायरल रोग है. यह बीमारी मुख्य रूप से मुर्गी, बतख, कौवा, टर्की और जंगली पक्षियों को प्रभावित करती है.

''बर्ड फ्लू वायरस संक्रमित पक्षियों के मल, लार और नाक से निकलने वाले स्राव के जरिए तेजी से फैलता है. इसके लक्षणों में अचानक बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत, सांस लेने में दिक्कत, सुस्ती, पंख फुलाना और अंडा देने की क्षमता कम होना शामिल है. आमतौर पर यह बीमारी इंसानों में कम फैलती है, लेकिन संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आने पर खतरा बढ़ सकता है. इसलिए बीमारी की पुष्टि होते ही पक्षियों को नष्ट करना, क्षेत्र को सैनिटाइज करना और पोल्ट्री उत्पादों की आवाजाही पर रोक लगाना जरूरी माना जाता है.''- डॉ. दुष्यंत यादव, एसोसिएट प्रोफेसर, पटना वेटरनरी कॉलेज
ये भी पढ़ें :-
सावधान! बिहार में बर्ड फ्लू की पुष्टि, एक साथ 10 हजार कौआ की मौत
चिकन खाने वाले हो जाएं सावधान! बिहार के इस पोल्ट्री फार्म में हजारों मुर्गियों की रहस्यमयी मौत

