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Waste to Art : प्रशांत पांडे ने कचरे को बनाया जीवित सामाजिक दस्तावेज, 3.5 लाख सिगरेट बट्स से रची Biography

जयपुर के एक कलाकार ने 3.5 लाख सिगरेट बट्स के जरिए कलाकृतियां बनाकर कई संदेश देने की कोशिश की है.

Biography Art by Prashant Pandey
प्रशांत पांडे ने कचरे को बनाया जीवित सामाजिक दस्तावेज (Source : Prashant Pandey)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 6, 2026 at 4:50 PM IST

6 Min Read
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जयपुर: राजधानी की सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर बिखरे सिगरेट के टुकड़ों (सिगरेट बट्स) को एक नई पहचान देते हुए जयपुर के मूर्तिकार प्रशांत पांडे ने अपनी एकल प्रदर्शनी Biography में उन्हें एक जीवित सामाजिक दस्तावेज के रूप में पेश किया है. पांच सालों से ज्यादा वक्त की लगातार मेहनत से तैयार इस प्रोजेक्ट में उन्होंने 3.5 लाख से ज्यादा सिगरेट बट्स को जमा कर, साफ कर, उपचारित कर और फिर से बुनकर विशाल कलात्मक रचनाओं का रूप दिया है.

इस कला के अपने हुनर से पिरोने वाले प्रशांत पांडे का कहना है कि इस कलाकृति के जरिए न सिर्फ पर्यावरण, बल्कि समाज के अदृश्य व्यवहार पर भी सवाल खड़े होते हैं. वे कहते हैं कि मेरा निजी अनुभव कहता है कि लव, हेट एंड अगेन लव, उनकी बायोग्राफी भी इस तर्ज पर समाज को संदेश देगी.

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रीसाइक्लिंग के साथ कलात्मक संदेश : अपनी इस Biography को लेकर प्रशांत पांडे ने कहा कि वे कचरे को सिर्फ पर्यावरणीय समस्या के रूप में नहीं, बल्कि कथात्मक सामग्री के रूप में फिर से परिभाषित कर रहे हैं. हर सिगरेट बट किसी एक क्षण, बातचीत के बीच के ठहराव, समय काटने की आदत या एक सांस के निशान को अपने भीतर समेटे हुए है. अकेले में ये तुच्छ लगने वाले टुकड़े, जब एक साथ आते हैं तो वे त्वचा, पत्तियों, आंतरिक अंगों और ब्रह्मांडीय भू-आकृतियों जैसी संरचनाओं में बदल जाते हैं.

उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट में सिर्फ वक्त मुद्दा नहीं है, बल्कि इसे तैयार करने की प्रक्रिया का भी अहम रोल रहा है. प्रशांत के मुताबिक, एक-एक पत्ती जैसी आकृति को तैयार करने में करीब एक महीना लगता है, जबकि प्रदर्शनी में शामिल कृतियों को विकसित होने में पूरे पांच साल का वक्त लगा है. वे कहते हैं कि इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि यह मेहनत रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों में छिपे इशारों की परतों जैसी है, जो क्षणिक होते हुए भी लंबे अरसे तक यादों के रूप में दर्ज हो जाते हैं.

Art Gallery in Mumbai
बायोग्राफी सोलो एग्जिबिशन की विशेषता (ETV Bharat GFX)

पर्यावरण प्रेम का पैगाम : प्रशांत ने बताया कि सिगरेट बट्स जुटाने में उनको करीब पांच साल से ज्यादा वक्त लगा. इस काम में जयपुर के कैफे, सड़कों और स्मोकिंग जोन्स से भी मदद ली गई. इस प्रदर्शनी के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया है कि सिगरेट बट्स केवल कचरा नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए सबसे खतरनाक प्लास्टिक प्रदूषकों में से एक हैं. इन्हें सड़ने में सालों लग जाते हैं और ये मिट्टी व पानी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं. अगर कोई मवेशी इसे खा लेता है, तो उसे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है. प्रशांत कहते हैं कि उन्होंने कला के जरिए इस समस्या को सामने लाकर, कलाकार ने जागरूकता और संवेदनशीलता दोनों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की है.

Biography Art by Prashant Pandey
मुंबई आर्ट गैलरी में अपनी कलाकृति के साथ प्रशांत पांडे (Source : Prashant Pandey)

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मुंबई आर्ट गैलरी में होगी प्रदर्शनी : प्रशांत पांडे ने ईटीवी भारत को बातचीत करते हुए बताया कि मुंबई आर्ट गैलरी में उनकी इन कलाकृतियों को आठ से 11 जनवरी तक प्रदर्शित किया जाएगा. वे Biography को गैलरी मस्कारा की एकल प्रदर्शनी में प्रस्तुत कर रहे हैं. प्रदर्शनी स्थल पर दाखिल होते ही दर्शकों को यह खास तजुर्बा देगी, जहां हवा में झूलती कलाकृतियों में पेड़ से गिरने वाले सूखे पत्तों का एहसास होगा. उन्होंने कहा कि हवा में लटकी, बहती, गिरती और जमा होती आकृतियां किसी स्मारक की तरह नहीं, बल्कि एक-एक सांस लेती जीवनी की तरह महसूस होगी. यह जीवनी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन अनगिनत अनाम लोगों की है, जिनकी अनरिकॉर्डेड जिदंगियों के निशान इन सिगरेट बट्स में समाहित हैं.

प्रशांत का कहना है कि हम यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि जो हम कचरा समझ कर फेंक देते हैं, वह भी बोलता है. सिगरेट बट्स को इकट्ठा करने, साफ करने, बांधने और बुनने की प्रक्रिया के ज़रिये वे इन अवशेषों को साक्ष्य में बदल देते हैं. इस तरह Biography वस्तुओं का नहीं, बल्कि अदृश्य सामाजिक शरीर और उसके वक्त का अभिलेख बन जाती है.

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बायोग्राफी सोलो एग्जिबिशन की तैयारी करते हुए प्रशांत पांडे (Source : Prashant Pandey)

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चार पीढ़ियों का है कला से जुड़ाव : जयपुर में जन्मे प्रशांत पांडे राजस्थान के पारंपरिक संगमरमर शिल्पकार परिवार की चौथी पीढ़ी से आते हैं. उनके पिता ने अयोध्या के राम मंदिर में राम परिवार समेत कई अहम कलाकृतियां तैयार की है. इस काम में बचपन से जुटे प्रशांत ने मंदिरों के निर्माण और मूर्ति-निर्माण से जुड़ी भक्ति-प्रधान मेहनत और उससे उपजने वाले अपशिष्ट को बहुत करीब से देखा. यहीं से उनके दिमाग में लीक से हटकर काम करने की सोच ने जन्म लिया. प्रशांत पांडे ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से मूर्तिकला में बीएफए और एमएस यूनिवर्सिटी, बड़ौदा से एमएफए किया है. इसके बाद वे साल 2011 में वे पेरिस के इकोल दे बो-आर्ट्स में कलाकार रेजिडेंसी के लिए चयनित हुए, जहां उन्होंने प्रसिद्ध आर्टे पोवेरा कलाकार ज्यूसेपे पेनोने के साथ काम किया. इस अनुभव ने उनमें मटिरियल, प्रोसेस और आर्ट क्रिएशन की सोच को और गहरा किया.

Waste to Art
जयपुर के कलाकार प्रशांत पांडे (Source : Prashant Pandey)

प्रशांत पांडे अपने काम में संगमरमर के अपशिष्ट, ब्लास्ट स्टोन, सिगरेट बट्स, ब्लड स्लाइड्स, इंडस्ट्रियल स्क्रैप और जैविक अवशेषों जैसी सामग्री का उपयोग भी किया है. उनकी मूर्तियों में श्रम, उपयोग और क्षरण के निशान साफ दिखाई देते हैं. इसके पहले साल 2010 में उन्होंने Shelf-Life नाम से अपनी पहली एकल प्रदर्शनी की थी. बाद में साल 2012 में उन्होंने Shelf Life II पेश की. प्रशांत पांडे को ललित कला अकादमी पुरस्कार (2009, 2010) और भूपेन बर्मन अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है.