'जेब में पैसे होते हैं तभी...' एक ताने ने शौक को बनाया जुनून, पढ़िए मोतीलाल मोहता की कहानी
बीकानेर के मोतीलाल मोहता का एक ऐसा ही शौक कब जुनून बन गया खुद उन्हें भी पता नहीं चला.

Published : November 13, 2025 at 7:11 AM IST
बीकानेर : कहते हैं शौक बड़ी चीज होती है. कभी-कभी यही शौक एक व्यक्ति के लिए जुनून बन जाता है. कुछ ऐसी ही कहानी है बीकानेर के मोतीलाल मोहता की. मोतीलाल संगीत प्रेमी हैं. पिछले 60 साल से उनका ये प्रेम और गहरा होता गया है. उनके पास 5000 से ज्यादा कैसेट हैं, जिसे चलाकर वो हर रोज 6-8 घंटे तक गीत सुनते हैं.
बीकानेर के मावा पट्टी क्षेत्र से गुजरने वाली एक सड़क पर एक घर से आती संगीत की धुन वहां से गुजरने वाले हर किसी को सुनाई देती है. पिछले कई सालों से यह आवाज वहां से गुजरने वाले हर एक शख्स की दिनचर्या का हिस्सा बन गई है. बीकानेर के मोतीलाल मोहता अपने घर के एक कमरे में दिन में करीब 6 से 8 घंटे तक तेज आवाज में संगीत सुनते हैं. यह क्रम पिछले 60 सालों से लगातार चल रहा है. वे कहते हैं कि जब तक संगीत सुनता नहीं हूं मन बेचैन रहता है. अब ये उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है और दवाई की तरह काम करता है.
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एक ताने पर लगा शौक : मोतीलाल बताते हैं कि उन्हें पहले से संगीत का शौक था, लेकिन वो सामान्य शौक था. 15 साल की उम्र में उनकी एक चाय की स्टॉल थी. एक दिन कोई टेप रिकॉर्डर उन्हें पसंद आया. वहां जाकर जब उसके बारे में बात करनी चाही तो एक व्यक्ति ने ताना दिया कि 'जेब में पैसे होते हैं तो ऐसा टेप रिकॉर्डर मिलता है'. उसी दिन उन्होंने टेप रिकॉर्डर खरीदा और ये शौक जुनून बन गया. मोतीलाल के पास कलेक्शन में आज 5000 से ज्यादा कैसेट्स हैं, जो सारी पुरानी फिल्मों की हैं. कई बार डेक यानी कि टेप रिकॉर्डर खराब हुआ है, लेकिन वो फिर नया ले आए ताकि संगीत का क्रम नहीं टूटे.

इस जैसी बात किसी में नहीं : वह कहते हैं कि अब टेक्नोलॉजी का जमाना है और संगीत के नए-नए साधन आ गए हैं, लेकिन आज भी टेप रिकॉर्डर में कैसेट में संगीत सुनने का मजा कुछ अलग ही है. उन्हें कई गाने कंठस्थ हो गए हैं. दिन में एक ही गाने को कई बार सुनते हुए भी वो बोर नहीं होते हैं. मोतीलाल बताते हैं कि उनके पूर्वजों के पास काफी संपत्ति थी, लेकिन पिताजी के समय कारोबार में उतार चढ़ाव होने के बाद संपत्ति चली गई. उन्होंने कक्षा 6 तक पढ़ाई की है. उस वक्त आर्थिक तंगी के कारण ज्यादा नहीं पढ़ पाए और जैसे-तैसे अपना गुजारा किया. अब अकेले रहते हैं और संगीत के सहारे ही जीवन जी रहे हैं. मोतीलाल कहते हैं कि संगीत उनके लिए मेडिटेशन का काम करता है. जब भी मन उदास होता है तो संगीत सुनने से मन को राहत मिलती है.



