करणी औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरण नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, रीको के खिलाफ कोर्ट में परिवाद
औद्योगिक क्षेत्र को 11 अप्रैल 2017 को SEIAA से पर्यावरण स्वीकृति मिली थी, जिसमें संचालन से पहले कई शर्तें पूरी करना अनिवार्य था.

Published : September 2, 2026 at 2:07 PM IST
बीकानेर: करणी औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरण नियमों की अनदेखी रीको को भारी पड़ गई है. बिना वैध अनुमति और सीईटीपी संचालन के आरोप में प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने रीको और इकाई प्रभारी के खिलाफ कोर्ट में परिवाद पेश किया है. तीन नोटिस के बाद भी पालना नहीं होने पर मामला अदालत पहुंच गया है. सरकारी औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरणीय नियमों की पालना नहीं होने को लेकर बीकानेर में ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सरकार के ही दूसरे उपक्रम रीको लिमिटेड के खिलाफ अदालत का रुख किया है. करणी औद्योगिक क्षेत्र (विस्तार) में बिना वैध कंसेंट टू एस्टेब्लिश (CTE) और कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) तथा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) संचालन को लेकर मंडल के बीकानेर क्षेत्रीय कार्यालय ने विशिष्ट पीसीपीएनडीटी न्यायालय में परिवाद पेश किया है. परिवाद में रीको बीकानेर और इकाई प्रभारी सुरेंद्र प्रसाद शर्मा को पक्षकार बनाया गया है. कार्रवाई जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 25-26 और संशोधित अधिनियम 2024 की धारा 45(ई) के तहत की गई है.
तीन नोटिस के बाद भी नहीं हुई पालना: मामले की शुरुआत एनजीटी के निर्देशों के बाद हुई कार्रवाई से बताई जा रही है. मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय ने रीको को 12 नवंबर 2025, 31 दिसंबर 2025 और 14 मार्च 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किए. मंडल के अनुसार इनके बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे पालना सुनिश्चित मानी जा सके. लगातार नोटिस के बाद क्षेत्रीय अधिकारी ने 30 मार्च 2026 को मुख्यालय जयपुर को अभियोजन की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा. सदस्य सचिव कपिल चंद्रावल ने 30 जून 2026 को धारा 45(ई) के तहत परिवाद दाखिल करने की मंजूरी दी, इसी के आधार पर बीकानेर न्यायालय में परिवाद दर्ज कराया गया. क्षेत्रीय अधिकारी राजकुमार मीणा के अनुसार मुख्यालय के आदेश की पालना में परिवाद पेश किया गया है, आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुसार होगी.
2012 में मिली थी स्थापना अनुमति, 2014 में खत्म हो गई वैधता: अहम यह है कि करणी औद्योगिक क्षेत्र (विस्तार) के लिए रीको ने 2012 में मंडल से स्थापना सम्मति CTE प्राप्त की थी, जो 17 जनवरी 2012 को जारी हुई और वैधता 30 दिसंबर 2014 को समाप्त हो गई. मीणा के अनुसार वैधता समाप्त होने के बाद नवीनीकरण के लिए आज तक आवेदन नहीं किया गया, ऐसे में लंबे समय से संचालन वैध अनुमति के बिना होने का आरोप है.
पर्यावरण स्वीकृति में तय थीं कई शर्तें: क्षेत्र को 11 अप्रैल 2017 को SEIAA से पर्यावरण स्वीकृति मिली थी, जिसमें संचालन से पहले कई शर्तें पूरी करना अनिवार्य था. प्रमुख शर्त CETP स्थापित करना थी, ताकि इकाइयों के अपशिष्ट का उपचार हो सके. इसके अलावा 33 प्रतिशत ग्रीन कवर विकसित करना और CGWA से भूजल दोहन की एनओसी लेना भी आवश्यक था. मंडल का आरोप है कि इन शर्तों की अपेक्षित पालना नहीं हुई.
एनजीटी ने भी दिए थे व्यवस्था के निर्देश: ताहिर हुसैन बनाम जिला कलेक्टर व अन्य मामले में NGT भोपाल सेंट्रल बेंच ने 6 नवंबर 2025 को रीको को छह महीने में CETP शुरू करने और CTO प्राप्त करने के निर्देश दिए थे. बताई जा रही समय सीमा पूरी हो चुकी है, फिर भी व्यवस्थाएं और वैध अनुमति नहीं होने से मंडल ने अभियोजन शुरू किया है.
सरकारी एजेंसियों के बीच पालना का मामला: यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नियमों की पालना कराने वाला मंडल सरकार के ही उपक्रम रीको के खिलाफ अदालत पहुंचा है. सामान्यतः सरकारी विभागों-उपक्रमों के बीच इस तरह की कानूनी कार्रवाई कम ही दिखती है. रीको अधिकारियों ने पूरे मामले में चुप्पी साध ली है.

