50 हजार घरों तक नहीं पहुंच रहा पेयजल, 200 मीटर लंबी कतारों में खड़े होकर पानी भरने को लोग मजबूर
भूजल 300 फीट से नीचे, 'हर घर गंगाजल' योजना के बावजूद लाखों लोग प्यासे हैं. एक बोरिंग पर 200 परिवारों की निर्भरता है. स्पेशल रिपोर्ट..

Published : March 17, 2026 at 5:14 PM IST
- रिपोर्ट: सरताज़ अहमद
गया: बिहार के गया शहर में जल संकट हर साल की तरह इस बार भी भयावह रूप लेता जा रहा है. नगर निगम क्षेत्र के कई इलाके पिछले कुछ सालों से ड्राई जोन घोषित हैं, क्योंकि यहां भूजल स्तर 300 फीट से भी नीचे पहुंच चुका है. जैसे ही गर्मी की शुरुआत होती है, घरों के जलस्रोत सूखने लगते हैं और पूरे इलाके में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है.
करोड़ों रुपये खर्च, नहीं मिल रहा पानी : स्थिति की गंभीरता को देखते हुए साल 2022 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 'हर घर गंगाजल' योजना की शुरुआत की थी, ताकि जलस्रोत सूखने की स्थिति में भी लोगों को पीने का पानी उपलब्ध हो सके लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी गया शहर के करीब 50 हजार से अधिक घरों में पानी की नियमित सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है. मार्च महीने से ही जल संकट के हालात चिंताजनक हो गए हैं और आने वाले मई-जून में स्थिति और भयावह होने की आशंका जताई जा रही है.
50 हजार घर, 3 लाख से अधिक आबादी प्रभावित : नगर निगम के रजिस्ट्रेशन डेटा के अनुसार करीब 50 हजार घर जलापूर्ति से वंचित हैं. हालांकि इसमें वे घर और कॉलोनियां शामिल नहीं हैं, जो अभी तक नगर निगम में पंजीकृत नहीं हैं. अगर उन्हें भी जोड़ दिया जाए तो यह संख्या एक लाख से अधिक घरों तक पहुंच सकती है.

गया के कई इलाकों में पानी के लिए संघर्ष : शहर के वार्ड 34 के गेवाल बीघा, हिंदी स्कूल क्षेत्र, पहाड़ी तल, इसके अलावा बनिया पोखर और इकबाल नगर जैसे इलाके जल संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. यहां के लोगों को रोजाना पानी के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ता है और कई बार दूर-दराज से पानी ढोकर लाना पड़ता है.
200 मीटर लंबी लगती है कतार : वार्ड नंबर 34 के हिंदी स्कूल इलाके में हालात इतने बदतर हैं कि सुबह और शाम पानी भरने के लिए करीब 200 मीटर लंबी कतार लग जाती है. इस कतार में सबसे अधिक संख्या महिलाओं की होती है, जो घंटों इंतजार करने के बाद भी जरूरत भर पानी नहीं जुटा पातीं.

पाइपलाइन बिछने के बाद भी नल में पानी नहीं : पानी को लेकर कई बार इलाके में हंगामा भी हो चुका है. स्थानीय वार्ड पार्षद प्रतिनिधि ओम यादव के अनुसार इलाके में पाइपलाइन तो बिछाई गई है, लेकिन करीब एक साल से जल आपूर्ति बंद है. वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइन बिछने के बाद से अब तक उसके नल से पानी आते उन्होंने देखा ही नहीं. इसी कारण मोहल्ले के लोग करीब 500 मीटर दूर स्थित एक बोरिंग से पानी लाने को मजबूर हैं, जिस पर लगभग 200 घरों की प्यास बुझाने का दबाव है.

एक बोरिंग पर 200 परिवारों की निर्भरता : स्थानीय निवासी अजित कुमार गुप्ता बताते हैं कि पाइपलाइन से पानी की सप्लाई नाम मात्र की है. कुछ इलाकों तक पानी पहुंचता भी है तो उसका दबाव इतना कम होता है कि अधिकांश घरों तक पानी नहीं पहुंच पाता. अगर वह बोरिंग खराब हो जाए तो लोगों को पानी खरीदने तक की नौबत आ जाती है. वह पानी सिर्फ पीने के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि बाकी जरूरतों के लिए दूर से पानी ढोना पड़ता है.
''गली में करीब 200 परिवार ऐसे हैं जिनके घरों में पाइपलाइन से पानी की एक बूंद भी नहीं आती. ऐसे में सभी हम आधा किलोमीटर दूर स्थित एक बोरिंग से पानी लाने को मजबूर हैं. कई बार शिकायत के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है.'' - अजित कुमार गुप्ता, स्थानीय निवासी

बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव : स्थानीय युवक मो. अशफाक का कहना है कि गेवाल बीघा के वार्ड 33, 34 और 35 लंबे समय से ड्राई जोन के नाम से जाने जाते हैं. यहां 20 हजार से अधिक आबादी पानी के लिए तरस रही है. उनका आरोप है कि नगर निगम और बुडको के बीच जिम्मेदारी को लेकर टालमटोल चलता रहता है और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है.

दो एजेंसियों के बीच उलझी जलापूर्ति : गया नगर निगम के 53 वार्डों में जलापूर्ति की जिम्मेदारी बुडको के पास है. गंगाजल लाने से लेकर मोहल्लों में पाइपलाइन बिछाने तक का काम इसी एजेंसी को करना है. वहीं पुराने सिस्टम के तहत कुछ क्षेत्रों में जलापूर्ति की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है. जहां पाइपलाइन से पानी नहीं पहुंच पाता, वहां टैंकर के जरिए पानी भेजा जाता है. दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण अक्सर अधिकारी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहते हैं, जिससे समस्या का समाधान नहीं हो पाता.
मार्च में ये हाल, तो मई-जून में क्या होगा? : इलाके की महिलाएं कहती हैं कि जब मार्च में ही यह हाल है तो मई-जून की भीषण गर्मी में स्थिति कितनी विकराल होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.
''करीब 15 हजार आबादी ऐसी है जो रोजाना इधर-उधर से पानी लाकर किसी तरह काम चला रही है. पाइपलाइन होने के बावजूद पानी नहीं आना लोगों की परेशानी और बढ़ा रहा है.''- अकीला खातून, स्थानीय महिला

रोजा रखकर भी ढोना पड़ रहा पानी : स्थानीय निवासी अमीना खातून बताती हैं कि पवित्र रमजान के महीने में भी उन्हें पानी के संकट से जूझना पड़ रहा है. रोजा रखने के बावजूद उन्हें बच्चों के साथ 500 मीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि पीने का पानी तो खरीद लेते हैं, लेकिन बाकी जरूरतों के लिए दूर से पानी ढोना पड़ता है. कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ.
क्या कहते हैं अधिकारी : नगर निगम आयुक्त अभिषेक पलासिया का कहना है कि जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर नगर निगम और बुडको दोनों काम कर रहे हैं. नगर निगम ने हैंडपंप, बोरिंग और प्याऊ का सर्वे कराया है और जिनकी मरम्मत की जरूरत है, उसके लिए आदेश जारी किए गए हैं ताकि गर्मी में व्यवस्था फेल न हो.

''शहर के करीब 1 लाख 5 हजार घरों में पानी की सप्लाई का लक्ष्य था, लेकिन अभी तक करीब 71 हजार घरों तक ही जलापूर्ति हो पा रही है. शेष करीब 40 हजार घरों को तीसरे चरण में जोड़ने की योजना है. शहर में प्रतिदिन 105 एमएलडी पानी की सप्लाई की जा रही है. पानी के कम दबाव की समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने पांच नए टैंक बनाने का प्रस्ताव भी भेजा है.''- नील कुमार, SDO, बुडको
मार्च महीने में ही अगर हालात इतने खराब हैं तो मई-जून की भीषण गर्मी में स्थिति और भी भयावह होने की आशंका है। ऐसे में सवाल उठता है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद 'हर घर गंगाजल' योजना का लाभ आखिर लोगों तक कब पहुंचेगा?
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