बिहार में मुखिया से लेकर मजिस्ट्रेट तक.. 8 भ्रष्ट अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई, जब्त होगी 4.14 करोड़ की संपत्ति
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है. आठ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की 4.14 करोड़ की संपत्ति होगी जब्त.

Published : January 6, 2026 at 11:41 AM IST
पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है. साल 2012 से 2019 के बीच दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों के आधार पर राज्य के आठ भ्रष्ट लोकसेवकों और जनप्रतिनिधियों की अवैध रूप से अर्जित करीब 4 करोड़ 14 लाख रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.
जब्त होगी 4.14 करोड़ की संपत्ति: निगरानी ब्यूरो ने 4.14 करोड़ की संपत्ति को जब्त करने के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकार और अदालतों को प्रस्ताव भेज दिया है. स्वीकृति मिलते ही इन संपत्तियों पर सरकार के अधिग्रहण की औपचारिक कार्रवाई शुरू की जाएगी.
मुखिया से लेकर मजिस्ट्रेट तक: निगरानी ब्यूरो के अनुसार जिन आठ लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें दो तत्कालीन मुखिया, एक न्यायिक दंडाधिकारी, एक अधीक्षण अभियंता, एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एक अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), एक टैक्स दारोगा और एक महिला एवं बाल विकास विभाग की सीडीपीओ शामिल हैं. इन सभी के खिलाफ अलग-अलग जिलों में आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले दर्ज किए गए थे.
" भ्रष्टाचारियों की अवैध संपत्तियों को राज्यसात करने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है।"
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- श्री जीतेन्द्र सिंह गंगवार
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फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर पर आरोप: जानकारी के मुताबिक, लखीसराय जिले के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर दिलीप कुमार के खिलाफ वर्ष 2012 में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था. जांच में उनके पास 88.25 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति पाए जाने के बाद उसे जब्त करने की अनुशंसा की गई है.
एसडीओ पर तीन मामले दर्ज: गोपालगंज के हथुआ अनुमंडल में एसडीओ रहे विजय प्रताप सिंह के खिलाफ वर्ष 2015 में भ्रष्टाचार के तीन मामले दर्ज हुए थे. उनके नाम 62.35 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त किए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है. वे अपर समाहर्ता और दरभंगा प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में आयुक्त के सचिव पद पर भी कार्यरत रह चुके हैं.
इनके पास लाखों की अवैध संपत्ति: इसके अलावा पटना ग्रामीण की तत्कालीन सीडीपीओ फूलपरी देवी, मोतिहारी नगर परिषद के तत्कालीन टैक्स दारोगा अजय कुमार गुप्ता तथा समस्तीपुर जिले के जितवारिया ग्राम पंचायत के तत्कालीन मुखिया प्रमोद कुमार राय की संपत्तियों पर भी कार्रवाई प्रस्तावित है. इन तीनों के खिलाफ जांच में कुल मिलाकर 61 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति सामने आई है.
मुखिया मैनेजर यादव के खिलाफ कार्रवाई: ग्रामीण कार्य विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश मांझी के खिलाफ वर्ष 2016 में मामला दर्ज हुआ था. जांच के बाद उनकी 90.75 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने की अनुशंसा की गई है. ओमप्रकाश मांझी को पहले ही सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है. वहीं पश्चिम चंपारण जिले के लौरिया प्रखंड अंतर्गत राजमारहिया पकड़ी पंचायत के तत्कालीन मुखिया मैनेजर यादव के खिलाफ भी कार्रवाई प्रस्तावित है. उनके नाम 80.04 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव भेजा गया है.
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तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी भी फंसे: निगरानी ब्यूरो ने जुलाई 2019 में दरभंगा के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार राय के खिलाफ भी भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था. जांच में 41.12 लाख रुपये की अवैध संपत्ति पाए जाने के बाद उसे राज्यसात करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है.
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई: अब तक की स्थिति पर नजर डालें तो निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कुल 119 मामलों में 96 करोड़ 76 लाख रुपये की संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव भेजा है. इनमें से 66 मामले, जिनकी संपत्ति करीब 57 करोड़ रुपये है, सक्षम प्राधिकार की अदालतों में लंबित हैं. वहीं 32 मामले, जिनकी संपत्ति 20 करोड़ 80 लाख रुपये की है, उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं. दो मामले सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के रूप में दर्ज हैं, जबकि दो मामलों में विपक्षी पक्ष की अपील के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है.
क्या कहते हैं निगरानी ब्यूरो के महानिदेशक: निगरानी ब्यूरो के अनुसार अब तक 11 मामलों में 6 करोड़ 3 लाख रुपये की संपत्तियां अंतिम रूप से राज्यसात की जा चुकी हैं. इस संबंध में निगरानी ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है और उनकी अवैध संपत्तियों को जब्त कर राज्यसात करने की प्रक्रिया को और तेज किया जा रहा है. वर्ष 2025 में भेजे गए इन आठ प्रस्तावों पर जल्द ही अंतिम निर्णय आने की उम्मीद है.
"हम आम जनता के लिए साफ प्रशासन और सुविधा पक्का करने के लिए जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी के तहत भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं. अब तक, हमने कुल 122 केस रजिस्टर किए हैं, जो 25 साल के औसत 72.668 से कई गुना ज्यादा है. हमने 101 ट्रैप केस रजिस्टर किए हैं, जो पिछले साल के औसत 50 से भी बहुत ज़्यादा है."-जितेंद्र सिंह गंगवार, महानिदेशक, निगरानी ब्यूरो
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