बिहार विजिलेंस कैडर समाप्त, अब सीधे CMO की रडार पर होंगे भ्रष्ट अधिकारी
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली 'विजिलेंस' को सम्राट ने किया समाप्त, क्या है आगे का प्लान?

Published : May 11, 2026 at 11:44 AM IST
पटना: बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है. नई व्यवस्था के लिए पहल करते हुए सरकार ने निगरानी कैडर को समाप्त करने का फैसला लिया है. अब तक अलग कैडर व्यवस्था के तहत काम कर रहे निगरानी विभाग के अधिकारी और कर्मी आगे बिहार पुलिस के ढांचे के भीतर काम करेंगे.
निगरानी के लिए अब तक की व्यवस्था: बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निगरानी विभाग स्थापित किया था. विभाग में अधिकारियों की तैनाती के लिए अलग कैडर भी बनाए गए थे. निगरानी विभाग में आधे अधिकारियों की नियुक्ति अलग परीक्षा के जरिए होती थी. आधे अधिकारी पुलिस विभाग से प्रतिनियुक्ति पर लिए जाते थे.
पुलिस नियमों के तहत होगी पदोन्नति: राज्य सरकार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से जुड़े पदों और कैडर संरचना को बिहार पुलिस सेवा में समाहित करने का निर्णय लिया है. नई व्यवस्था के तहत अब नियुक्ति, पदस्थापन, प्रोन्नति और सेवा शर्तों का संचालन बिहार पुलिस के नियमों के तहत किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे जांच एजेंसियों और पुलिस तंत्र के बीच तालमेल बेहतर होगा तथा भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी.
बेहतर समन्वय की उम्मीद: बिहार के अंदर अब तक निगरानी विभाग का अपना अलग कैडर होने के कारण प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कई स्तरों पर समन्वय की समस्या सामने आती थी. अधिकारियों की कमी, पदोन्नति में विलंब और संसाधनों के बंटवारे जैसी दिक्कतें भी लंबे समय से विमर्श का विषय बनी हुई थीं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकारियों की तैनाती और जांच कार्य में अधिक लचीलापन आने की उम्मीद जताई जा रही है.
विशेषज्ञों की राय: अवकाश प्राप्त पुलिस पदाधिकारी संतोष श्रीवास्तव कहते हैं कि यदि नई व्यवस्था में जांच की स्वायत्तता और पेशेवर क्षमता को बरकरार रखा गया, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूती मिलेगी. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और सरकार नियमों को किस तरीके से लागू करती है.
"विभाग खत्म नहीं हुआ है, बल्कि समायोजित किया गया है. इस बदलाव के बाद निगरानी विभाग में कार्यरत डीएसपी, इंस्पेक्टर और सब-इस्पेक्टर सभी बिहार पुलिस सेवा के अधीन होंगे. यह फैसला बिहार पुलिस अधिनियम 2007 के तहत पुलिस व्यवस्था में एकरूपता लाने के लिए किया गया. अब सरकार सीधे CMO से भ्रष्टाचार अधिकारियों पर नजर रखेगी." -संतोष श्रीवास्तव, अवकाश प्राप्त पुलिस पदाधिकारी
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