'राम का नाम जुड़ते ही कांग्रेस को होने लगती है परेशानी' G RAM G के विरोध पर बिहार पर्यटन मंत्री का निशाना
G RAM G के विरोध पर बिहार पर्यटन मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा. कहा राम नाम जुड़ते ही कांग्रेस को परेशानी होने लगती है.

Published : January 9, 2026 at 5:09 PM IST
मुजफ्फरपुर: केंद्र सरकार की 'जी राम जी' विधेयक को लेकर विरोध पर बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने मुज़फ्फरपुर में प्रेसवार्ता में कांग्रेस पर निशाना साधा. कहा कि राम का नाम जुड़ते ही कुछ लोगों को परेशानी होने लगती है, जबकि महात्मा गांधी स्वयं रामराज्य की कल्पना करते थे.
'गांधीजी के अंतिम शब्द भी हे राम थे': पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने गांधीजी के प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम” का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी जी के अंतिम शब्द भी “हे राम” थे. मंत्री ने कहा कि हर गरीब को रोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो इसी उद्देश्य से यह नया विधेयक लाया गया है.
"गरीबों, जनजातियों और पिछड़े वर्गों को रोजगार उपलब्ध कराना इस योजना का मूल लक्ष्य है. यह विधेयक ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप है. महात्मा गांधी की भावना के अनुसार रामराज्य की स्थापना की दिशा में एक कदम है." -अरुण शंकर प्रसाद, पर्यटन मंत्री, बिहार
'125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार': अरुण शंकर प्रसाद ने बताया कि नई योजना के तहत काम के दिन बढ़ेंगे और मजदूरों को समय पर पारिश्रमिक मिलेगा. प्रत्येक ग्रामीण परिवार जो अकुशल श्रम करने को तैयार हो, सालाना 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार मिलेगा. वन क्षेत्रों में कार्यरत अनुसूचित जनजाति के श्रमिकों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार दिया जाएगा. इससे कृषि और मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित होगा.

"मंत्री ने बताया कि मनरेगा 2006 में लागू हुई थी और अब तक इस पर 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. जिसमें 8.53 लाख करोड़ रुपये मौजूदा सरकार के कार्यकाल में व्यय किए गए. नए विधेयक में 125 दिन के रोजगार की गारंटी के साथ 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है." -अरुण शंकर प्रसाद, पर्यटन मंत्री, बिहार
'हर योजना में गांधी-नेहरू परिवार का नाम':पर्यटन मंत्री ने रोजगार योजनाओं के नामकरण के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 1980 में इंदिरा गांधी सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम शुरू किया, जिसे बाद में जवाहर रोजगार योजना और फिर मनरेगा नाम दिया गया. इसी तरह ग्रामीण आवास योजना का नाम बदलकर इंदिरा आवास योजना और ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का नाम राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना किया गया. "हर योजना में गांधी-नेहरू परिवार का नाम जबरन जोड़ा गया, जबकि मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है."
'योजना का पुनर्गठन जरूरी': अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि 2005 के बाद ग्रामीण भारत में बड़ा बदलाव आया है. 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घटकर 4.86 प्रतिशत रह गई है. कनेक्टिविटी और आजीविका के साधनों में सुधार हुआ है, इसलिए 2005 का ओपन-एंडेड मॉडल अब प्रासंगिक नहीं रहा. 2025 की जरूरतों के हिसाब से योजना का पुनर्गठन जरूरी था.
मनरेगा में घोटालों का आरोप: उन्होंने कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा में घोटालों का आरोप लगाते हुए कहा कि अब पारदर्शिता बढ़ाई गई है. रियल-टाइम डेटा अपलोड, जीपीएस, मोबाइल मॉनिटरिंग और आधार आधारित फ्रॉड डिटेक्शन से सही लाभार्थियों तक योजना पहुंचेगी. इस दौरान मंत्री ने नए अधिनियम में चार प्राथमिकताएं को बताया
- जल संबंधी कार्य
- कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचा
- आजीविका संबंधी बुनियादी ढांचा
- खराब मौसम के कारण काम में आने वाली कमी को कम करना
'किसानों के हित में फैसला': अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि उन्होंने कहा कि किसानों के हित में बुआई और कटाई के मौसम में योजना को 60 दिन के लिए बंद करने का प्रावधान रखा गया है. ताकि कृषि कार्यों के लिए श्रमिक उपलब्ध रहें. बेहतर सिंचाई, भंडारण, सड़क, बाजार पहुंच और बाढ़-सूखा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
साप्ताहिक भुगतान का प्रावधान: नई योजना में मनरेगा के विपरीत साप्ताहिक भुगतान का प्रावधान होगा. खर्च में राज्यों की भागीदारी भी तय की गई है. पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90 प्रतिशत केंद्र व 10 प्रतिशत राज्य, जबकि अन्य राज्यों में 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य का योगदान होगा. मजदूरी दरें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाएंगी और 15 दिन में रोजगार नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता राज्य सरकार देगी. साथ ही, केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के गठन का प्रस्ताव भी है.
'मोदी ने सेवा और विकास को प्राथमिकता दी': प्रेसवार्ता के दौरान मंत्री ने कहा कि देश में करीब 600 संस्थानों, योजनाओं और पुरस्कारों के नाम गांधी परिवार पर रखे गए, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी अपने नाम पर किसी योजना का नामकरण नहीं किया, बल्कि सेवा और विकास को प्राथमिकता दी. कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं ने मंत्री का फूल-मालाओं और शॉल से भव्य स्वागत किया तथा नववर्ष की शुभकामनाएं दीं.
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