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कड़ाके की ठंड में भी गर्म रहता है भीमबांध का पानी, महाभारत से जुड़ा है इतिहास

यह तस्वीर बिहार के भीमबांध की है, जहां सर्दियों में पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है. लोग गर्म पानी का आनंद उठाते हैं.

Bihar Tourism Jamui Bhimbandh
भीमबांध में लुत्फ उठाते पर्यटक (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 27, 2025 at 5:45 PM IST

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जमुई: नया साल में पिकनिक स्पॉट की खोज कर रहे हैं तो भीमबांध बेहतर विकल्प है. यहां, सर्दियों में गर्म पानी के कुंड में नहाने से मजा दोगुना हो जाएगा. कड़ाके की सर्दी पड़ने के बावजूद यहां का पानी कभी ठंडा नहीं होता है. इसके पीछे कई कारण हैं.

महाभारत से जुड़ा है इतिहास: बिहार के मुंगेर से जमुई जाने के दौरान मुख्य मार्ग से 10 किमी अंदर जंगल में यह स्थान है, जहां सर्दियों के समय पर्यटकों की भीड़ लगी होती है. इस बांध से पौराणिक मान्यताएं भी जुड़े हुए हैं. जानकार कहते हैं कि इसका इतिहास महाभारत से जुड़ा हुआ है.

Bihar Tourism Jamui Bhimbandh
भीमबांध में लुत्फ उठाते पर्यटक (ETV Bharat)

भीम ने बनाया था बांध: भीमबांध क्षेत्र के निवासी संतन कुमार कहते हैं कि महाभारत काल में जब पांडव अज्ञातवास में थे, उस वक्त इस क्षेत्र में आए थे. उसी समय भीम पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बांध बनाया था. इसलिए इसका नाम भीमबांध पड़ गया. यहां दो तरह के कुंड है, एक में गर्म और एक में ठंडा पानी रहता है.

"भीमबांध एक सुंदर पर्यटक क्षेत्र है, यहां सुंदर पहाड़ियां और हरा भरा प्राकृतिक वादियां लोगों का मन मोह लेता है. नववर्ष और ठंड के समय यहां लोग पिकनिक मनाने आते हैं." -संतन कुमार, स्थानीय

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भीमबांध में लुत्फ उठाते पर्यटक (ETV Bharat)

पानी गर्म होने के कारण: वन विभाग ने पानी गर्म रहने का कारण जियोथर्मल गतिविधि (भूतापीय गतिविधि) माना है. पृथ्वी के अंदर से निकलने वाली गर्मी चट्टान, मैग्मा और भाप पानी के ऊपरी सतह पर आ जाता है, जिससे यहां का पानी गर्म रहता है. कड़ाके की ठंड होने के बावजूद पानी ठंडा नहीं होता.

नक्सली के शिकार हुए थे एसपी: स्थानीय संतन कुमार कहते हैं कि यह इलाका कभी नक्सलियों का गढ़ था. 2005 में मुंगेर के तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू नक्सली द्वारा बिछाए गए बारूद के शिकार हो गए थे. तब से इस इलाके में लोगों का आना जाना बंद हो गया था, लेकिन सीआरपीएफ के कैंप बनने से लोगों में डर खत्म हुआ और अब पर्यटक जुटते हैं. 2005 के बाद स्थिति बदली और अब पर्यटक इस जगह का खूब आनंद लेते हैं.

Bihar Tourism Jamui Bhimbandh
भीमबांध में पर्यटक (ETV Bharat)

"सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और जंगल के अंदर कई जगह कैंप बनाऐ गए. धीरे-धीरे नक्सल समस्या समाप्त हो गई. फिर से लोग इस इलाके में बडे़ पैमाने पर पहुंचने लगे. खासकर ठंढ के महीने में काफी भीड़ जुटती है. पर्यटन के दृष्टिकोण से अदभुत है. धीरे - धीरे इसका सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है." -संतन कुमार, स्थानीय

कैसे पहुंचे: यहां पहुंचने के कई साधन हैं. दूसरे राज्य से हवाई मार्ग या फिर ट्रेन मार्ग से पहुंचते हैं तो सबसे पहले पटना आना होगा. यहां से मुंगेर के बरियारपुर रेलवे स्टेशन या फिर जमुई रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन लेना होगा. या फिर डायरेक्ट वाहन भाड़ा कर जा सकते हैं. मुंगेर के रास्ते बरियारपुर और खड़गपुर होते हुए भीमबांध जा सकते हैं. जमुई जिले से लक्ष्मीपुर के रास्ते भीमबांध पहुंचा जा सकता है.

जंगलों से घिरा है इलाका: जमुई जिला चारों तरफ से नदी घने जंगल ऊंचे-ऊंचे पहाडों से घिरा हुआ है. बडा़ इलाका झारखंड बॉर्डर से सटा हुआ है, इसलिए यहां प्रचुर मात्रा में खनिज है. समय-समय पर जियोलॉजिकल सर्वे भी कराऐ गए हैं. सिमुलतला जिसे 'मिनी सिमला' भी कहा जाता है.

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भीमबांध में गर्म पानी लेते पर्यटक (ETV Bharat)

अन्य पर्यटन स्थ्ल: सोनो के करमटिया में सोना मिलने की सूचना थी, सिकंदरा के धोस मंजोस इलाके में लोह अयस्क की खोज हुई थी. पंचभूर का झड़ना, गिद्धेश्वर पहाड, कुंड स्थान, क्षत्रिय कुंड महावीर स्थान, कुंडधाट, गरही डैम, नागी - नकटी डैम, कुकुरझप डैम, महावीर वाटिका, काकन स्थित जैन मंदिर शामिल है.

भीमबांध का सौंदर्यीकरण: बिहार सरकार की ओर से भीमबांध का सौंदर्यीकरण कर दिया गया है. 8 करोड़ 90 लाख की लागत से क्षेत्र को आधुनिक रूप से विकसित किया गया है. सरकार की ओर से गर्म जल और ठंडा जल के लिए अलग-अलग कुंड बनाया गया है. गर्मी में ठंडा और ठंडा में गर्म पानी का आनंद ले सकते हैं.

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