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Explainer : नकल से लेकर साइबर सुरक्षा तक कमेटी का गठन... बड़ा सवाल- पेपर लीक बंद होगा?

पेपर लीक से साइबर सुरक्षा तक, परीक्षा की हर गड़बड़ी में सुधार के लिए बड़ा फैसला. रिपोर्ट- कृष्णनंदन

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प्रदर्शन करते छात्र (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 26, 2026 at 4:20 PM IST

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पटना : ''पेपर लीक की घटनाएं व्हाइट कॉलर क्राइम में गिनी जाती है, जिसमें घूस देने वाला भी खुश होता है और घूस लेने वाला भी खुश होता है. दोनों ही पक्षों को फायदा होता है. जो पेपर लीक करते हैं उन्हें भी फायदा होता है और जो पेपर खरीदते हैं, उन्हें भी फायदा होता है.'' शिक्षाविद बीएन प्रसाद कहते हैं कि विजिलेंस के इंटेल पर शुरुआती समय में ही एक्शन लेना सबसे महत्वपूर्ण होता है ताकि पेपर लीक रुक सके. यह एक दिन की समस्या नहीं है, वर्षों से चली आ रही है. किसी भी व्यवस्था में जब दीमक लगना शुरू होता है, उसपर अगर समय से एक्शन लिया जाए तो रिजल्ट आता है, अन्यथा बाद में पूरी व्यवस्था बदलनी पड़ जाती है.

बिहार में जबरदस्त प्रदर्शन का दौर : दरअसल, दिल्ली और रांची के बाद छात्रों का आंदोलन बिहार में वृहत रूप धारण कर रहा है. कई छात्र संगठन धरना प्रदर्शन से लेकर सड़क पर उतर चुके हैं. स्थिति काबू में करने के लिए पुलिस के भी पसीने छूट रहे हैं. इधर परीक्षा विवादों के बीच बिहार सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की तैयारी शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने परीक्षा सुधार के लिए पांच सदस्यीय विशेष समिति के गठन करने की अधिसूचना जारी की है.

बिहार सरकार छात्र मामलों को लेकर एक्टिव : बिहार सरकार द्वारा बनायी गई समिति का उद्देश्य राज्य में होने वाली परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी, सुरक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और समयबद्ध बनाना है. समिति अपने गठन की तारीख से तीन महीने के भीतर सरकार को अपनी अनुशंसाएं देगी. समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाईकोर्ट के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा किए जाने का प्रावधान है.

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ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

बोर्ड से लेकर भर्ती परीक्षाओं तक होगी समीक्षा : समिति के दायरे में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं के अलावा विश्वविद्यालय, व्यावसायिक एवं तकनीकी, प्रवेश एवं पात्रता तथा भर्ती और प्रतियोगिता परीक्षाएं भी शामिल होंगी. यानी बिहार बोर्ड से लेकर BPSC, BSSC, BTSC, विश्वविद्यालय सेवा आयोग और दूसरी भर्ती एजेंसियों की परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी.

समिति परीक्षा प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में जिम्मेदारी तय करने, संस्थागत व्यवस्था मजबूत करने और किसी स्तर पर गड़बड़ी होने पर जवाबदेही निर्धारित करने के उपाय सुझाएगी. साथ ही परीक्षा के विज्ञापन से लेकर परीक्षा, मूल्यांकन, रिजल्ट और पुनर्मूल्यांकन तक हर चरण के लिए समय-सीमा तय करने पर भी विचार होगा.

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ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

पेपर लीक रोकने के लिए एंड-टू-एंड सिक्योरिटी ऑडिट : समिति का सबसे बड़ा फोकस प्रश्न-पत्र की सुरक्षा पर रहेगा. समिति प्रश्न-पत्र तैयार करने, मॉडरेशन, प्रिंटिंग, सुरक्षित भंडारण, परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के संग्रह से लेकर स्कैनिंग, डिजिटलाइजेशन, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने तक पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगी.

परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, CCTV निगरानी, परीक्षकों और वीक्षकों की तैनाती तथा प्रश्न-पत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षित ट्रैकिंग को मजबूत करने की सिफारिश भी की जा सकती है. इसका मकसद सिर्फ पेपर लीक रोकना नहीं, बल्कि परीक्षा के किसी भी चरण में अनधिकृत हस्तक्षेप और हेराफेरी की संभावना को खत्म करना है.

AI और साइबर सुरक्षा भी कमेटी के एजेंडे में : बदलते तकनीकी दौर में समिति परीक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा के इस्तेमाल की भी समीक्षा करेगी. ग्रामीण इलाकों, आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों और डिजिटल सुविधाओं तक सीमित पहुंच रखने वाले छात्रों के हितों को भी ध्यान में रखने की बात अधिसूचना में कही गई है.

छात्रों ने उठाया सवाल : दारोगा परीक्षा की तैयारी कर रही अर्पिता ने कहा कि सरकार कोई भी कमेटी बना ले लेकिन परीक्षा में पारदर्शिता नहीं रखेगी तो पेपर लीक नहीं रुकेगा. गुपचुप तरीके से सेटिंग गेटिंग का खेल होते रहेगा. उन्होंने कहा कि दारोगा की परीक्षा में क्वेश्चन पेपर भी नहीं मिलता है और ओएमआर शीट का कार्बन कॉपी भी परीक्षा हॉल में जमा कर लिया जाता है. बावजूद इसके सोशल मीडिया पर हू-ब-हू क्वेश्चन और ओएमआर शीट का कार्बन कॉपी वायरल हो जाता है.

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अर्पिता, दारोगा की तैयारी करने वाली छात्रा (ETV Bharat)

''जब परीक्षा केंद्र पर जैमर होते हैं तो इंटरनेट कैसे काम करता है? कैसे क्वेश्चन का फोटो वायरल हो जाता है? छात्रों के आक्रोश को दबाने के लिए सरकार भले कमेटी बनाने का निर्णय ली है लेकिन कमेटी ने पारदर्शिता के छात्रों के सुझाव को नहीं माना तो सरकार की यह पहल भी दिखावा ही साबित होगी.''- अर्पिता, दारोगा की तैयारी करने वाली छात्रा

'परीक्षा में पारदर्शिता है जरूरी' : पटना विश्वविद्यालय की छात्रा सबा आफरीन का कहना है कि सरकार पारदर्शिता नहीं लाना चाहती है. बीपीएसएससी और सिपाही की बहाली में सबसे अधिक अनियमितता होती है. ओएमआर शीट का कार्बन कॉपी भी परीक्षा केंद्र के बाहर नहीं लाने की अनुमति मिलती है, क्वेश्चन पेपर भी जमा कर लिया जाता है. जब अभ्यर्थी इसकी मांग करते हैं तो अभ्यर्थियों को ही हंगामा करने वाला बता दिया जाता है. कोई भी कमेटी बने उनका यही डिमांड है कि परीक्षा में पारदर्शिता आए तभी पेपर लीक की घटना रुक पाएगी.

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छात्रा सबा आफरीन (ETV Bharat)

क्या सिर्फ कमेटी बनाने से रुक जाएगा पेपर लीक? : सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पांच सदस्यीय समिति की सिफारिशों के बाद बिहार में पेपर लीक की समस्या खत्म हो जाएगी? हालांकि अभी पांच सदस्यीय समिति का गठन नहीं हुआ है.

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल नई तकनीक या कड़े कानून पर्याप्त नहीं हैं. प्रश्न-पत्र तैयार करने से लेकर उसके परिवहन और परीक्षा केंद्र पर वितरण तक हर स्तर पर जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करनी होगी. इसके साथ ही सख्त निगरानी, तत्काल कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कानूनी प्रक्रिया जरूरी होगी.

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'हर कानून और नियम अपने समय का सर्वश्रेष्ठ होता है' : शिक्षाविद प्रो. डॉ बीएन प्रसाद ने कहा कि कोई व्यवस्था जो बनती है वह व्यवस्था खराब नहीं होती है. इसकी पहले भी जो परीक्षा की व्यवस्था बनी थी वह अपने समय में सर्वश्रेष्ठ थी. व्यवस्था सबसे अच्छी बनाई जाती है लेकिन दिक्कत क्रियान्वयन में आता है. जब क्रियान्वयन खराब होने लगता है तो व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होने लगते हैं.

''पेपर लीक का मामला आज का नहीं है बल्कि यह दशकों से चला आ रहा है और विभिन्न स्तर के परीक्षाओं में चला आ रहा है. इसके लिए दो लेवल पर मॉनिटरिंग की बहुत आवश्यकता है. पहले सरकारी स्तर पर जिसमें जितनी भी विजिलेंस कमेटियां है, उन्हें सतर्क होने की जरूरत है और सरकार को भी सतर्क रहने की जरूरत है.''- प्रो. डॉ बीएन प्रसाद, शिक्षाविद

'समाज को भी जागरूक होने की जरूरत' : बीएन प्रसाद कहते हैं कि किसी भी व्यवस्था का सबसे बड़ा जो भाग है वह नागरिक समाज है. नागरिक समाज को भी सशक्त होने की आवश्यकता है. अभी जो युवाओं का आंदोलन दिख रहा है, जिसे लोग जेन जी आंदोलन का रहे हैं, उसका भी कारण यही है कि जब उन युवाओं को लगा कि उनके अधिकारों का अव्यवस्था के कारण हनन हो रहा है तो वह सड़क पर आ गये.

यह काम सिविल सोसाइटी यानी नागरिक समाज का था, लेकिन युवा अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हुआ और अपनी समस्या से सरकार को अवगत कराया. यह युवाओं में अपने अधिकारों को लेकर जागृति हमारे लोकतंत्र के लिए बहुत ही शुभ संकेत हैं. सरकार यदि कमेटी गठन कर रही है तो उनके सदस्यों का व्यवहार और चरित्र भी बहुत महत्वपूर्ण होगा.

प्रो. डॉ बीएन प्रसाद, शिक्षाविद
प्रो. डॉ बीएन प्रसाद, शिक्षाविद (ETV Bharat)

'सदस्यों का सिविल सबसे महत्वपूर्ण' : छात्र नेता दिलीप कुमार ने कहा कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ कड़ा कानून पिछले दिनों लेकर आई, बावजूद इसके इन नियमों में किसी को सजा नहीं दिलवा पाई है. पेपर लीक रोकने के लिए अब पांच सदस्यीय कमेटी बनाने की बात कर रही है. यह सराहनीय प्रयास है, लेकिन जमीन पर भी इसका असर दिखना चाहिए कि किसी परीक्षा में पेपर लीक ना हो. इसके अलावा हम यह देखेंगे की इस पांच सदस्यीय कमेटी में जो लोग रहेंगे वह कौन हैं और उनका पिछला रिकॉर्ड क्या रहा है?

अब कानून का भी कड़ा शिकंजा : पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के खिलाफ केंद्र का कानून भी 2026 में और सख्त हुआ है. Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Act, 2026 ने 2024 के कानून में बदलाव किया है. इसके तहत संबंधित अपराधों में सजा बढ़ाकर न्यूनतम पांच साल और अधिकतम दस साल तक की गई है तथा जुर्माना 50 लाख रुपये तक हो सकता है.

संगठित अपराध के मामलों में न्यूनतम सजा सात साल और जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक किया गया है. कानून में जांच को दो महीने के भीतर पूरा करने और मामलों के लिए Special Fast Track Court की व्यवस्था का प्रावधान है, जहां चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

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ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)
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ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

अब सरकार की असली परीक्षा : कुल मिलाकर कहा जाए तो बिहार में पांच सदस्यीय समिति के गठन का निर्णय निश्चित तौर पर परीक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम है. हालांकि इसका असर तभी दिखेगा जब समिति गठित हो जाए और उसकी सिफारिशों को जमीन पर लागू किया जाएगा. छात्रों का सवाल अभी भी यही है कि उन्हें यह भरोसा कैसे मिले कि जिस पेपर के लिए उन्होंने महीनों मेहनत की है, वह परीक्षा शुरू होने से पहले बाजार या सोशल मीडिया पर नहीं पहुंचेगा. ऐसे में समिति के सामने सिर्फ परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने की चुनौती नहीं है, बल्कि अभ्यर्थियों का टूटता भरोसा वापस लाने की भी जिम्मेदारी है.

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