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बिहार शिक्षक भर्ती में बड़ा बदलाव, अब प्राइमरी टीचर बनने के लिए करना होगा सिर्फ ये काम

बिहार में अब प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक बनने के लिए अभ्यर्थियों को टीईटी की जरूरत नहीं होगी. शिक्षक बनने के लिए CTET अनिवार्य होगा. पढ़ें

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बिहार शिक्षक भर्ती में बड़ा बदलाव (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 16, 2026 at 3:48 PM IST

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पटना: बिहार में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है. राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (बीटीईटी/बीटेट) का आयोजन नहीं किया जाएगा. यानी प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक बनने के लिए अभ्यर्थियों को अब बिहार टीईटी की जरूरत नहीं होगी. इसके बदले केंद्र सरकार द्वारा आयोजित केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है.

अब नहीं होगा BTET का आयोजन: अब तक बिहार में प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए सीटीईटी के साथ राज्य सरकार द्वारा आयोजित बीटेट के अंक को भी तरजीह जाती थी. लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब पूरी तरह केंद्र की सीटीईटी परीक्षा का अंक ही मान्य होगा.

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अब नहीं होगा BTET का आयोजन (ETV Bharat)

शिक्षा विभाग का मानना है कि दो अलग-अलग पात्रता परीक्षाओं की वजह से अभ्यर्थियों को भ्रम और अतिरिक्त बोझ का सामना करना पड़ता था. कई बार एक ही उम्मीदवार को राज्य और केंद्र, दोनों परीक्षाएं देनी पड़ती थीं. इसी समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अब केवल सीटीईटी को ही मान्य पात्रता परीक्षा माना जाएगा. हालांकि शिक्षा विभाग में 3 साल पहले यह कह दिया था कि बीटेट की परीक्षा लेने की उसकी कोई योजना नहीं है.

प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए CTET अनिवार्य: शिक्षा विभाग के नए प्रावधान के तहत जो भी उम्मीदवार प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक बनना चाहते हैं, उन्हें पहले सीटीईटी उत्तीर्ण करना होगा. इसके बाद वे बिहार लोक सेवा आयोग या अन्य संबंधित माध्यमों से निकलने वाली शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं में आवेदन कर सकेंगे.

नई भर्तियों पर नियम लागू: सरकार का कहना है कि पात्रता परीक्षा को एक समान करने से देशभर में शिक्षकों की योग्यता का स्तर भी तुलनीय होगा. इससे भविष्य में अंतरराज्यीय अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा. विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि टीआरई 4 में केवल वही अभ्यर्थी पात्र माने जाएंगे, जिनके पास सीटीईटी का प्रमाण पत्र होगा. यह नियम केवल नई भर्तियों पर लागू होगा.

महज दो बार हुआ है बीटेट का आयोजन: शिक्षा विभाग के इस निर्णय पर गुरु रहमान का कहना है कि इस बदलाव का कोई बहुत बड़ा असर नहीं होगा. बिहार में सिर्फ 2011 और 2017 में यानी सिर्फ दो बार ही बीटेट परीक्षा का आयोजन हुआ है. यह परीक्षा कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 के शिक्षक बनने के लिए पात्रता परीक्षा थी. इसी तर्ज पर हर वर्ष केंद्र सरकार सीटेट परीक्षा का आयोजन कराती है.

"बीटेट परीक्षा में क्वालीफाई करने के लिए 50% अंक और सीटेट परीक्षा में क्वालीफाई करने के लिए 60% अंक जरूरी होता है. राज्य सरकार की एससीईआरटी भी अब एनसीईआरटी करिकुलम को फॉलो कर रही है. अभ्यर्थी भी सीटेट की तैयारी करते हैं."- गुरु रहमान, शिक्षाविद्

अभ्यर्थियों का माइंडसेट क्लियर होगा: गुरु रहमान ने कहा कि शिक्षा विभाग के निर्णय से अब अभ्यर्थियों का तैयारी को लेकर माइंडसेट क्लियर हो जाएगा. अब अभ्यर्थियों के मन में बीटेट को लेकर कोई कंफ्यूजन नहीं रहेगा और सीटेट की ही तैयारी करेंगे. सीटीईटी एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जिसमें पूरे देश के उम्मीदवार शामिल होते हैं.

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गुरु रहमान (ETV Bharat)

"इसका पाठ्यक्रम और प्रश्नों का स्तर अपेक्षाकृत व्यापक माना जाता है. ऐसे में बिहार के अभ्यर्थियों के लिए इस प्रतियोगिता के माध्यम से पूरे देश में शिक्षक बनने की पात्रता हासिल होगी. शिक्षा विभाग का भी तर्क है कि इससे शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार होगा और चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी."- गुरु रहमान, शिक्षाविद्

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