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राज्यसभा की रेस: जानें वो चार नाम जिनको लेकर JDU में चल रहा है मंथन!

क्या राज्यसभा के माध्यम से निशांत कुमार की राजनीतिक में एंट्री होगी? उनके साथ तीन और नामों पर चर्चा चल रही है. पढ़ें खबर

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राज्यसभा चुनाव पर मंथन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : March 2, 2026 at 8:05 PM IST

8 Min Read
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रिपोर्ट : अविनाश

पटना : बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव है और 5 मार्च तक नामांकन करना है. जदयू और बीजेपी को दो-दो राज्यसभा की सीटें मिल जाएंगी. पांचवीं सीट पर यदि विपक्ष उम्मीदवार दिया तो चुनाव होगा. पांचवीं सीट के लिए तेजस्वी यादव के नाम की भी चर्चा हो रही है. हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से कोई घोषणा नहीं की गई है.

चर्चा में निशांत : इधर, जदयू में जिस नाम की सबसे अधिक चर्चा है वह है मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार की. पिछले 1 साल से निशांत के राजनीति में आने की चर्चा जोर पकड़ रही है. पार्टी के नेता तो चाहते ही हैं कि निशांत राजसभा में चले जाएं. विशेषज्ञ कह रहे हैं यदि नीतीश कुमार एग्जिट का प्लान बना रहे होंगे तो निशांत की राजनीति में एंट्री राज्यसभा से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता है. ऐसे में देखना है कि नीतीश कुमार होली गिफ्ट किसे देते हैं.

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रविवार को सीएम नीतीश के जन्मदिन पर जुटे थे दिग्गज नेता (ETV Bharat)

रामनाथ तय, दूसरे नाम पर मंथन : बिहार विधानसभा में एनडीए के पास 202 विधायक हैं. उसके हिसाब से जदयू को राज्यसभा की दो सीटें और बीजेपी को दो सीटें मिलने में कहीं से कोई परेशानी नहीं है. उसके बाद भी 38 विधायकों का वोट बच जाता है, केवल तीन विधायकों का वोट पांचवीं सीट के लिए जरूरत होगी.

जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार जदयू में रामनाथ ठाकुर के नाम पर सहमति लगभग बन गई है. वहीं दूसरे नाम पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है. दूसरा नाम हरिवंश नारायण सिंह का है, जिनका पत्ता कटना तय माना जा रहा है. इसी बीच चर्चा निशांत कुमार को लेकर भी हो रही है.

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'फैसला तो मुख्यमंत्री ही करेंगे' : पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की तरफ से भी दबाव है कि निशांत की राज्यसभा से एंट्री कर दी जाए, लेकिन नीतीश कुमार ने अभी तक फैसला नहीं लिया है. नीतीश कुमार के नजदीकी संजय गांधी का कहना है कि हम लोग तो काफी समय से चाह रहे हैं कि निशांत की एंट्री हो जाए लेकिन फैसला तो मुख्यमंत्री ही करेंगे.

''निशांत पढ़े लिखे हैं, इंजीनियर हैं, सुलझे हुए व्यक्ति हैं, सब की बात सुनते हैं. इसलिए पूरे बिहार के लोग चाहते हैं कि निशांत राजनीति में आएं.''- संजय गांधी, एमएलसी, जदयू

राजनीतिक विशेषज्ञ सुनील पांडे का कहना है कि जेडीयू उस दौर से गुजर रहा है, जिसमें पार्टी में बड़े पैमाने पर बदलाव होगा या फिर उसका स्वरूप बदलेगा. अब राज्यसभा के बहाने निशांत को राजनीति में लाना, पार्टी को बचाने या पुनर्जीवित करने का एकमात्र विकल्प है. पार्टी के बड़े नेताओं और शुभचिंतकों का नीतीश कुमार के ऊपर दबाव है कि निशांत को राजनीति में लाया जाएं.

''नीतीश कुमार के लिए जीवन का एक बड़ा फैसला लेने का पल है कि निशांत को राज्यसभा भेजें या नहीं. राज्यसभा के माध्यम से राजनीति में एंट्री कराएं या नहीं. निशांत राज्यसभा में जाते हैं तो वहां से बिहार जदयू की कमान संभाल सकते हैं, एक अच्छा मौका होगा.''- सुनील पांडेय, राजनीतिक विशेषज्ञ

देखें रिपोर्ट (ETV Bharat)

CM नीतीश के साथ निशांत के पोस्टर : अब सीएम नीतीश कुमार के साथ निशांत के पोस्टर भी लगने लगे हैं और पार्टी को भी इस पर कहीं से कोई आपत्ति नहीं है. पहले निशांत सार्वजनिक रूप से राजनीति में आने को लेकर पूछे गए सवाल पर मना कर देते थे, कहते थे कि मुझे समाज सेवा करना है, लेकिन अब हंसकर निकल जाते हैं. पार्टी के बड़े नेता भी पहले इनकार करते थे लेकिन अब डिमांड कर रहे हैं. परिवार के सदस्यों का दबाव तो है ही, ऐसे में नीतीश कुमार के लिए यह मुश्किल समय है.

जहां तक जदयू में दो राज्यसभा सीटों के नाम की बात है तो रामनाथ ठाकुर पर सहमति होने की बात कही जा रही है. दूसरे नाम पर सहमति होते ही घोषणा कर दी जाएगी, क्योंकि 5 मार्च को ही नामांकन का अंतिम दिन है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो यदि निशांत पर मुहर नहीं लगी तो कोई नया चेहरा हो सकता है. कहकशां परवीन, मनीष वर्मा, चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी भी दावेदारों में हैं.

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ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी जहानाबाद से सांसद रह चुके हैं. 2025 में एनडीए की लहर में भी विधानसभा चुनाव हार गए. उससे पहले 2024 लोकसभा चुनाव में भी हार गए थे. लगातार दो चुनाव में पार्टी ने मौका दिया था लेकिन सफलता नहीं मिली, हालांकि पार्टी के लिए वित्तीय मदद करते रहते हैं. अति पिछड़ा समाज से आते हैं और नीतीश कुमार के नजदीकियों में से एक माने जाते हैं. पार्टी के कार्यक्रमों में भी बढ़-कर कर भाग लेते हैं.

कहकशां परवीन पूर्व राज्यसभा सांसद रही हैं. मुस्लिम समाज से आती हैं, नीतीश कुमार के भरोसेमंद रही हैं. नीतीश कुमार ने पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया है. भागलपुर नगर निगम की महापौर भी रह चुकी हैं. वैसे नीतीश कुमार ने एक बार राज्यसभा इनको भेज दिया है.

मनीष वर्मा आईएएस अधिकारी रहे हैं. वीआरएस लेकर जदयू में शामिल हुए हैं. नीतीश कुमार के नजदीकी माने जाते हैं और नालंदा जिले से ही आते हैं. नीतीश कुमार ने पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया है. हालांकि ना तो लोकसभा और ना ही विधानसभा चुनाव इन्हें लड़ाया गया. हर बार इनके नाम की चर्चा होती है.

होली गिफ्ट किसे मिलेगा? : इस बार हरिवंश नारायण सिंह को नीतीश कुमार मौका नहीं देंगे यह तय माना जा रहा है. हालांकि होली गिफ्ट किसे मिलेगा, इस पर सब की नजर है. वैसे घोषणा करने से पहले एनडीए की भी एक बैठक होगी. जिसमें पांचवीं सीट पर कौन उम्मीदवार जाए, इस पर फैसला होगा. जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी 3 तारीख को पटना पहुंचने वाले हैं.

पवन सिंह या उपेंद्र कुशवाहा पर लगेगी मुहर? : उपेंद्र कुशवाहा भी उम्मीद लगाए हुए हैं. लेकिन उपेंद्र कुशवाहा पर फैसला होना आसान नहीं है. भाजपा-जदयू के साथ अन्य सहयोगी दलों की सहमति भी जरूरी होगी. एक चर्चा यह भी चल रही है कि उपेंद्र कुशवाहा को भाजपा ने कहा है कि अपनी पार्टी बीजेपी में शामिल करा दें तब राज्यसभा के लिए विचार होगा. बीजेपी में पवन सिंह के नाम को लेकर खूब चर्चा हो रही है लेकिन यह भी तय है कि जिन नाम की चर्चा हो रही है उससे अलग चौंकाने वाला भी नाम सामने आ सकता है.

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पांचवीं सीट पर होगा खेला! : नीतीश कुमार और बीजेपी शीर्ष नेता राज्यसभा की पांचों सीटों पर जातीय और सामाजिक समीकरण का भी पूरा ख्याल रखकर ही नाम का चयन करेंगे. विपक्ष की ओर से कौन उम्मीदवार दिया जाता है, उसका भी ध्यान रखा जाएगा. पांचवीं सीट के लिए खेला होना तय है. वैसे सबकी नजर निशांत के नाम पर ही लगी हुई है कि नीतीश कुमार क्या फैसला लेते हैं. यदि निशांत पर फैसला हो गया तो तय है कि आने वाले समय में बिहार में सत्ता में भी बड़े उलट फेर होंगे.

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